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    विश्व संवाद केंद्र द्वारा संगोष्ठी का आयोजन

    देहरादून (विसंकें). देवभूमि उत्तराखण्ड औद्योगिक विकास एवं कृषि विकास की सम्भावनाओं पर दो सत्रों में संगोष्ठी का आयोजन विश्व संवाद केन्द्र द्वारा किया गया. प्रथम सत्र की अध्यक्षता दून विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. चन्द्रशेखर नौटियाल जी तथा दूसरे सत्र की अध्यक्षता वन विभाग के पूर्व मुख्य वन संरक्षक डॉ. आर.बी.एस. रावत जी ने की. दोनों सत्रों का संचालन कार्यक्रम के लक्ष्मीप्रसाद जायसवाल जी ने किया.

    प्रथम सत्र के वक्ताओं में उत्तराखण्ड इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता जी, उद्योगपति अशोक विंदलास जी, डॉ. बृजमोहन शर्मा जी, उद्योगपति राकेश ओबराय जी ने विचार व्यक्त किए. आभार विश्व संवाद के अध्यक्ष सुरेन्द्र मित्तल जी ने किया. संचालक लक्ष्मीप्रसाद जायसवाल ने विश्व संवाद केन्द्र के कार्यों के बारे में जानकारी दी.

    उत्तराखण्ड में औद्योगिक विकास की सम्भावनाएं विषय का प्रारम्भ स्पेक्स के सचिव डॉ. बृजमोहन शर्मा जी ने किया. उन्होंने सुदूरवर्ती क्षेत्रों में स्थायी आधार देने के लिये लघु उद्योगों की गहनता से चर्चा की. उनका मानना है कि महत्वपूर्ण उद्योगों का जाल बिछाकर आम लोगों को जोड़ना आवश्यक है. उत्तराखण्ड इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता जी ने व्यवस्थाओं को यथार्थ में उतारने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं को नौकरी मांगने की बजाए, नौकरी देने वाला बनना चाहिए. उद्योगों और शिक्षण संस्थाओं में सामंजस्य पर भी बल दिया. अशोक जी उद्योग को आर्थिक आधार बताते हुए कहा कि उद्योगों को तेजी से बढ़ाने के लिये कुछ बातें आवश्यक हैं. दवाओं के क्षेत्र में उत्तराखण्ड की जड़ी-बूटियों के द्रव्यों का उपयोग करने और इन पर विशेष कार्य करने की चर्चा की. औषधियाँ सस्ती हों, यह जरूरी नहीं है. पर वह गुणवत्तापूर्ण हों, यह जरूरी है. उद्योगपति राकेश ओबराय ने उत्तराखण्ड के सकल घरेलू उत्पाद में उत्तराखण्ड के तीन जिलों ऊधम सिंह नगर 21 प्रतिशत, हरिद्वार 24 प्रतिशत तथा देहरादून 19 प्रतिशत के योगदान की चर्चा की.

    दून विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. चन्द्रशेखर नौटियाल जी ने उत्तराखण्ड के सम्बन्ध में व्यावहारिक ज्ञान देने की चर्चा की. उन्होंने कहा कि क्षेत्र की भाषाओं को विशेष पहचान दिलाई जाए.

    दूसरे सत्र का प्रारम्भ पूर्व औषधीय पादप बोर्ड उपाध्यक्ष डॉ. आदित्य कुमार जी ने किया. उन्होंने जड़ी-बूटी क्षेत्र में नेशनल मेडिकल प्लांटेशन बोर्ड की चर्चा करते हुए पिछले सत्रह वर्षों के मुख्य कार्यों की जानकारी दी. सगंध पादप केन्द्र के निदेशक नृपेन्द्र चैहान ने 109 अरोमा क्लस्टर तथा मिन्ट से 18000 किसानों के जुड़ने की जानकार दी. उन्होंने कहा कि 4-5 वर्षों में पूरे देश में उत्तराखण्ड के उत्पादकों की धूम होगी. राजेश थपलियाल ने इलायची उत्पादन से लाभ की जानकारी दी.

    डॉ. वी.बी. चौरसिया जी ने कृषि विपणन के आर्थिक पहलू पर चर्चा करते हुए कहा कि समर्थन मूल्य बढ़ाकर सरकार किसानों को आर्थिक लाभ देना चाह रही है. उन्होंने कृषि भूमि की गुणवत्ता तथा मृदा परीक्षण पर भी विचार व्यक्त किए. जैविक कृषि करने वाले किसान दीपक उपाध्याय ने अपने साथ जुड़े किसानों की जैविक कृषि की जानकारी दी. दून विश्वविद्याल के प्रो. एच.सी. पुरोहित ने कहा कि ऊधम सिंह नगर व हरिद्वार को छोड़कर अन्य जनपदों में खेती व्यावसायिक नहीं है.

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