करंट टॉपिक्स

विश्व हिंदू कांग्रेस का आयोजन 21 नवंबर से दिल्ली में

Spread the love

नई दिल्ली. विश्व हिंदू कांग्रेस का आयोजन 21 से 23 नवम्बर तक दिल्ली में किया जा रहा है. इस सम्मेलन में 54 देशों के लगभग 2000 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे.

विश्व हिन्दू कांग्रेस के स्वामी विज्ञानानंद ने कहा, ‘विश्व हिन्दू कांग्रेस 2014’ का आयोजन नई दिल्ली स्थित अशोक होटेल में विश्व हिंदू फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है. यह महासम्मलेन हिन्दू सिद्धांत ‘संगच्छध्वम् संवदध्वम्’ से प्रेरित है, जिसका अर्थ है “हम साथ मिलकर चलें, हम साथ मिलकर सोचें’.

सात सत्रों का होगा कार्यक्रम

तीन दिन के इस आयोजन में सात आयाम तय किए गये हैं. सम्मेलन का उद्घाटन संघ प्रमुख परम पूज्य मोहनजी भागवत करेंगे. इसके बाद युवा, अर्थव्यवस्था, महिला, शिक्षा, राजनीति, संगठन और मीडिया विषय में इस क्षेत्र के जाने माने दिग्गज अपनी राय देंगे.

तीन दिवसीय सम्मेलन में 54 देशों के 2000 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है. इसमें मारीशस के पूर्व प्रधानमंत्री जगन्नाथ समेत कनाडा, न्यूजीलैंड, सूरीनाम, फिजी आदि देशों के कई हिंदू सांसद और राजनीतिक नेता भी हिस्सा लेंगे. समारोह का आयोजन करने वाले वर्ल्ड हिंदू फाउंडेशन की योजना चर्चा के सार को घोषणा पत्र का रूप दिये जाने की योजना है.

इस महासम्मलेन में 7 सम्मेलन, 45 सत्र, 200 प्रख्यात वक्ता और दुनियाभर से लगभग 2000  प्रतिनिधि भाग लेंगे. प्रमुख वक्ताओं में धर्मगुरु दलाई लामा, स्वामी दयानंद सरस्वती, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत, सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी, सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल एवं दत्तात्रेय होसाबाले, केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी, वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री निर्मला सीतारमण, गुयाना गणराज्य के वित्त मंत्री डॉ. अश्विनी सिंह, प्रख्यात वैज्ञानिक ज़ी. माधवन नायर, डॉ. विजय भाटकर, प्रमुख शिक्षाविद् प्रोफ़ेसर एस.बी. मजुमदार, डॉ. जी. विश्वनाथ, प्रो. कपिल कपूर, फिल्म निर्माता प्रियदर्शन और मेजर रवि, लोकप्रिय दक्षिणी फिल्म अभिनेत्री सुकन्या रमेश विभिन्न सत्रों में उपस्थित रहेंगे.

विश्व हिन्दू कांग्रेस की व्यूह रचना करने वाले स्वामी विज्ञानानन्द कहते हैं– विश्वभर में फैला हिन्दू आज मानवाधिकार हनन, नस्लभेद, सांस्कृतिक अपमान, उपेक्षा और भेद-भाव का शिकार है. स्वयं भारत का हिन्दू भी सांप्रदायिक आधार पर उपेक्षा, विषमता और भेद-भाव का शिकार होता रहा है. हम देश और दुनिया में हिन्दुओं का स्वर्णकाल वापस चाहते हैं. बीते दिनों में हम वैभवशाली और शक्तिसम्पन्न थे, आज हो सकते हैं और भविष्य में इसे बनाये रख सकते हैं.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.