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    विहिप प्रस्ताव – जम्मू कश्मीर में अलगाववादी व हिन्दू विरोधी नीतियों व प्रावधानों के कारण विस्फोटक स्थिति

    जम्मू कश्मीर में 29-30 जून को विश्व हिन्दू परिषद की केंद्रीय प्रबंध समिति की दो दिवसीय बैठक आयोजित की जा रही है. जिसमें देशभर से प्रतिनिधि उपस्थित हैं. बैठक के पहले दिन जम्मू कश्मीर को लेकर दो विषयों जम्मू कश्मीर में अलगाववादी व हिन्दू विरोधी नीतियों व प्रावधानों, हिन्दू तीर्थस्थलों व तीर्थयात्राओं के विकास पर प्रस्ताव पारित किये गए.

    विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय प्रबन्ध समिति बैठक-29-30 जून, 2019,

    काँगड़ा फोर्ट बैंक्वेट हाल, (मुठी बरनाई), जम्मू (जम्मू कश्मीर)

    प्रस्ताव – जम्मू कश्मीर में अलगाववादी व हिन्दू विरोधी नीतियों व प्रावधानों के कारण विस्फोटक स्थिति

    भारत की स्वतत्रंता के बाद से ही पाकिस्तान जम्मू कश्मीर को भारत से अलग करके उसे हिन्दू शून्य बनाना चाहता है. दुर्भाग्यवश भारत के कुछ राजनीतिज्ञ व कथित बुद्धिजीवी पाकिस्तान के इस एजेण्डे को जाने-अनजाने में लागू करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं. शेख अब्दुल्ला की मांग पर अनुच्छेद 370 को बहुत ही विचित्र तरीके से डाला जाना, इसी एजेण्डे का एक प्रयास है. संविधान के भाग XXI में अनुच्छेद 370 को अस्थाई व परिवर्तनशील प्रावधान के रूप में ड़ाला गया. संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वरा बनाए गए मूल प्रारूप में इसका वर्णन नहीं है. 25 जनवरी 1957 को जम्मू कश्मीर की संविधान सभा का काम पूरा होते ही धारा 370 समाप्त हो जानी चाहिए थी, परन्तु इसको जारी रखा गया. इस प्रावधान का स्वरूप अलगाव के पोषक के रूप में ही रहा है. इस प्रावधान का अनेक राष्ट्रीय संगठन प्रारंभ से ही विरोध करते रहे हैं. विश्व हिन्दू परिषद की प्रबंध समिति का अभिमत है कि वर्तमान समय इसको हटाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है. केन्द्र सरकार को इसे हटाने का अविलम्ब प्रयास करना चाहिए. अलगाववादी तत्वों को परास्त कर शेष देश के साथ जम्मू-कश्मीर का मजबूती से जुड़ाव करने का यह प्रभावी मार्ग है.

    अनुच्छेद 370 का दुरुपयोग करके अनुच्छेद 35-ए का निर्माण किया गया. यह अनुच्छेद 370 के अलगाववाद को तो मजबूत करता ही है, महिलाओं, अनुसूचित जातियों व दशकों से पीड़ित-प्रताड़ित शरणार्थियों के अधिकारों का भी हनन करती है. इस धारा के अन्तर्गत राज्य सरकार स्थाई निवासी (State Subject) का प्रमाण पत्र जारी करती है. पाक अधिक्रान्त जम्मू कश्मीर व पंजाब से आए लाखों शरणार्थी, पंजाब से लाए गए अनुसूचित जाति के बंधु/भगिनी तथा जम्मू कश्मीर से बाहर शादी करने वाली लड़कियों की संतानों को स्थाई नागरिक प्रमाण पत्र नहीं मिलता. लाखों की इस आबादी को सरकारी नौकरी, छात्रवृत्ति, स्थानीय निकायों व विधानसभाओं में मतदान का अधिकार, जमीन खरीदने के अधिकार आदि से वंचित होकर अपमान व पीड़ा की स्थिति को लम्बे समय से भोगना पड़ रहा है. इसको समाप्त करने के लिए वर्तमान केन्द्र सरकार भी वचनबद्ध है. विश्व हिन्दू परिषद की प्रबंध समिति इस शोषणकारी व अलगाववादी धारा को तत्काल समाप्त करने के लिए केन्द्र सरकार से आग्रह करती है.

    80-90 के दशक में आतंकवाद से त्रस्त होकर लाखों कश्मीरी हिन्दुओं को अपनी जन्मभूमि से पलायन करना पड़ा था. वे 30-35 वर्ष के बाद भी अपनी जन्मभूमि के दर्शन करने के लिए तरस रहे हैं. इनकी जन्मभूमि पर इनके पुनर्वास का सपना प्रत्येक सरकार ने दिखाया, परन्तु वह अभी भी अधूरा है. विश्व हिन्दू परिषद केन्द्रीय सरकार व सभी संबंधित पक्षों से यह अपील करती है कि वे इन सबके सुरक्षित  पुनर्वास को सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास करें.

    जम्मू कश्मीर में अलगाववाद की साम्प्रदायिक राजनीति का बीजारोपण करने वाले शेख अब्दुल्ला व अन्य राजनीतिज्ञ 1951 से ही विधानसभा क्षेत्रों का इस प्रकार परिसीमन करते रहे हैं, जिससे जम्मू कश्मीर की राजनीति घाटी परस्त ही बनी रही. पाक अधिक्रान्त जम्मू कश्मीर के नागरिकों के लिए 25 सीटें खाली छोड़ी जाती रही हैं. उस क्षेत्र के 15 लाख विस्थापित भारत के विभिन्न क्षेत्र में रहते हैं. उनके लिए इन सीटों में उचित प्रतिनिधित्व की व्यवस्था रहनी चाहिए. षड़यन्त्र पूर्वक किए गए इस परिसीमन को राष्ट्रहितों को ध्यान में रखकर न्यायपूर्ण बनाना अत्यंत आवश्यक है. कुछ लोग यह तर्क देते हैं कि राज्यपाल को इस काम के लिए कोई जनादेश नहीं है. उन्हें स्मरण रखना चाहिए कि 1995 में राष्ट्रपति शासन में ही परिसीमन का आदेश दिया गया था. विश्व हिन्दू परिषद का केन्द्र सरकार से यह आग्रह है कि न्यायोचित परिसीमन के लिए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें, जिससे जम्मू कश्मीर की राजनीति सम्पूर्ण राज्य की भावनाओं और आकांक्षाओं को परिलक्षित कर सके और संपूर्ण राज्य का संतुलित विकास हो सके.

    जम्मू क्षेत्र में जनसंख्या संतुलन की बिगड़ती हुई स्थिति के कारण विश्व हिन्दू परिषद की प्रबंध समिति चिंतित है. कश्मीर घाटी में हिन्दुओं का नरसंहार कर उसको हिन्दू शून्य बनाने के बाद अब वे जम्मू क्षेत्र में मुस्लिम समाज का प्रभुत्व स्थापित करना चाहते हैं. जेहादी तत्व जम्मू क्षेत्र में बड़े सुनियोजित तरीके से मुस्लिम समाज के लोगों को बाहर से लाकर बसा रहे हैं. बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों के लिए तो जम्मू एक सुरक्षित शरणस्थली बन गया है. अपनी बर्बरता के लिए कुख्यात दस हजार से अधिक रोहिंग्या अब जम्मू की कानून व्यवस्था के लिए भी सिरदर्द बन गए हैं. रेलवे स्टेशन से लेकर संपूर्ण जम्मू क्षेत्र में और उसकी सीमा पर नई मुस्लिम बस्तियों का निर्माण चिंता का विषय है. जंगलों की व सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करके कई मुस्लिम बस्तियों का भी निर्माण किया जा रहा है.

    आज यह दुर्भाग्य है कि हिन्दू शिक्षा व रोजगार के लिए जम्मू से जा रहा है तथा इसको मुस्लिम बहुल बनाने के लिए मुस्लिम तेजी से आ रहे हैं. ये सब षड़यन्त्र पूर्व राज्य सरकारों के संरक्षण में ही फलते-फूलते थे. विहिप की प्रबंध समिति महामहिम राज्यपाल से अपील करती है कि वे जम्मू में शिक्षा व रोजगार के अवसर निर्माण करें, जिससे हिन्दू का पलायन रूक सके. सरकारी व जंगलों की जमीन पर अवैध रूप से बसे मुसलमानों को हटाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है. विहिप जम्मू क्षेत्र के हिन्दुओं से अपील करता है कि वे इन परिस्थितियों पर सजग निगाह रखें व इनको रोकने के लिए संगठित प्रयास करें. वरना जम्मू को कश्मीर बनाने की दिशा में रचे जा रहे इन अपवित्र षड़यन्त्रों के परिणामस्वरूप देवभूमि जम्मू पर जेहादी काली छाया और गहरी हो जाएगी.

    प्रस्तावक – दिलीप भाई, गुजरात

    अनुमोदक – अमिया सरकार, बंगाल

     

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