वीर सावरकर महान क्रांतिकारी व भारत के सच्चे सपूत Reviewed by Momizat on . सावरकर जयंती पर प्रभात फेरी, गोष्ठी, पुष्पांजलि कार्यक्रम, मानव श्रृंखला का आयोजन जयपुर (विसंकें). पिछले कुछ दिनों में राज्य के छोटे बड़े अनेक शहरों में सावरकर सावरकर जयंती पर प्रभात फेरी, गोष्ठी, पुष्पांजलि कार्यक्रम, मानव श्रृंखला का आयोजन जयपुर (विसंकें). पिछले कुछ दिनों में राज्य के छोटे बड़े अनेक शहरों में सावरकर Rating: 0
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    वीर सावरकर महान क्रांतिकारी व भारत के सच्चे सपूत

    सावरकर जयंती पर प्रभात फेरी, गोष्ठी, पुष्पांजलि कार्यक्रम, मानव श्रृंखला का आयोजन

    जयपुर (विसंकें). पिछले कुछ दिनों में राज्य के छोटे बड़े अनेक शहरों में सावरकर जयंती पर कार्यक्रम व गोष्ठी का आयोजन किया गया. राजधानी जयपुर में भी विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित हुए. प्रभात फेरी निकाली गई, मानव श्रृंखला बनाई गई. तो कहीं पुष्पांजलि के कार्यक्रम हुए. इन कार्यक्रमों का आयोजन विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं आम जनता ने किया था.

    जयपुर के मालवीय नगर स्थित पाथेय कण संस्थान में आयोजित गोष्ठी में मेजर जनरल आर.के. कौशल व पत्रकार पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ ने शिरकत की. कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि रिटायर्ड मेजर जनरल आर.के. कौशल, मुख्य वक्ता पत्रकार पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ तथा पाथेय कण के संस्थापक संपादक कन्हैयालाल चतुर्वेदी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इस दौरान वीर सावरकर से संबंधित फिल्म भी दिखाई गई.

    पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि सरकार को सावरकर के पत्र मीडिया के सामने रख कर उनमें लिखे तथ्यों पर बातचीत करनी चाहिए. देश के लिए बलिदान देने वालों के नाम पर राजनीति करना किसी भी प्रकार से ठीक नहीं है. उन्होंने वीर सावरकर को अभी तक भारत रत्न नहीं देने पर भी सवाल उठाए.

    उन्होंने कहा कि 1980 में इंदिरा गांधी ने वीर सावरकर स्मारक को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने वीर सावरकर को देश की मिट्टी का सपूत तथा महान क्रान्तिकारी बताया था. सावरकर ने लंदन जाकर  भी अंग्रेजों को चुनौती दी थी, जिससे पूरा विश्व हतप्रभ था.

    हैनरी कॉलर जो 1904 में कांग्रेस के अध्यक्ष थे, उन्होंने अपनी पुस्तक में लिखा कि सावरकर ने लंदन में जाकर भी अंग्रेजों को ललकारा, किन्तु जितने सम्मान के हकदार वे थे, उतना सम्मान उन्हें भारत में नहीं मिला. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्हें अंडमान की सेल्यूलर जेल में बहुत यातनाएं दी गईं. लेकिन उनके इतिहास को नकारा जा रहा है. कुछ लोग इतिहास में दर्ज होते हैं, तो कुछ दिलों में राज करते हैं, जो दिलों में राज करते हैं उन्हें इतिहास में पढ़ाया नहीं जा रहा है. सावरकर लोगों के दिलों में राज करते हैं.

    उन्होंने सुभाष चन्द्र बोस, लाल बहादुर शास्त्री तथा डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के जीवन के विभिन्न प्रसंगों, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को छिपाए जाने पर रोष व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने संविधान में सौ से अधिक संशोधन किए, वे ही वर्तमान दौर में संविधान बदलने की मंशा का आरोप लगा रहे हैं.

    उन्होंने कहा कि कश्मीर से 3.50 लाख हिन्दुओं को निकाला गया जो अब तक की सबसे बड़ी मॉब लिंचिंग है. अब देश में बदलाव की बयार देखने का मिल रही है. देश राष्ट्रवाद के साथ एकजुट खड़ा है.

    पाथेय कण संस्थान के अतिरिक्त अग्रसेन स्नातकोत्तर शिक्षा महाविद्यालय केशव विद्यापीठ जयपुर, स्वदेशी जागरण मंच जयपुर, क्रांतिवीर स्मृति संस्थान जयपुर, क्रांतिवीर स्मृति मंच सरदारशहर, क्रांतिवीर स्मृति संस्थान वैर, क्रांतिवीर स्मृति संस्थान सीकर, क्रांतिवीर स्मृति मंच नागौर, क्रांतिवीर स्मृति मंच झुन्झनु तथा राज्य के अन्य स्थानों पर सावरकर जयंती मनाई गई.

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