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वैचारिक स्तर पर सकारात्मकता का संदेश समाज तक पहुंचे- सदानंद सप्रे जी

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bikaner3बीकानेर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीस दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष का समारोप हो गया. समारोप कार्यक्रम  घड़सीसर मार्ग पर गंगाशहर स्थित आदर्श विद्या मंदिर में आयोजित हुआ.

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विश्व विभाग के सह संयोजक डॉ. सदानंद दामोदर सप्रे ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक शाखा को नियमित रूप से चलाने में कम से कम दस लोग पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करते हैं. देश भर में ऐसी पचास हजार शाखाएं नियमित चल रही हैं, इन शाखाओं में पांच लाख से अधिक लोग अपने जीवन का अमूल्य समय देश सेवा में लगा रहे हैं. देशभर में अखिल भारतीय स्तर के 55 से अधिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से चल रहे हैं. सबका उद्देश्य एक है, वैचारिक स्तर पर सकारात्मकता का संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुंचे. इन संगठनों के माध्यम से पूरे देश में डेढ़ लाख से अधिक सेवा कार्य संचालित किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा गौ सेवा एवं संर्वधन, सामाजिक समरसता और ग्राम विकास जैसे अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं.

सप्रे ने कहा कि संघ केवल हिंदुओं का संगठन नहीं है. संघ में चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह का नाम पूरे सम्मान के साथ लिया जाता है तो bikanerअशफाक उल्ला खां का नाम भी पूर्ण आदर से लिया जाता है. संघ की शाखाओं में आ पाना प्रत्येक व्यक्ति के लिए संभव नहीं होता, लेकिन वैचारिक स्तर पर सकारात्मकता का संदेश समाज में पहुंचे, ऐसा कार्य प्रत्येक व्यक्ति कर सकता है. उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण का मानना था कि जब सत्य और असत्य के बीच संघर्ष चल रहा हो तो तटस्थ रहना भी अपने आप में पाप है. ऐसे में यदि हमें लग रहा है कि संघ के कारण देश का भला हो रहा है तो हमें तटस्थ न रहते हुए संघ के समर्थन में कुछ ना कुछ प्रयत्न करने चाहिए.

समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय उष्ट्र अनुंसधान केन्द्र के निदेशक डॉ. नितिन बसंतराव पाटिल ने कहा कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस मनाया जा रहा है. पूरी दुनिया जोर शोर से तैयारी कर रही है. यह प्रत्येक व्यक्ति का कार्यक्रम है. उन्होंने कहा कि बीस दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में दस जिलों के 414 स्वयंसेवकों ने मौसम की प्रतिकूलता के बावजूद प्रशिक्षण प्राप्त किया. यह प्रशिक्षण राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में उनका मार्ग प्रशस्त करेगा.

उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक राष्ट्र को माता के रूप में मानकर सदैव मातृभूमि की सेवा में तत्पर रहते हैं. संघ के अनुशासन तथा समर्पण का डंका पूरे विश्व में बजता है. स्वयंसेवक सहज और सामान्य व्यक्ति होता है जो जरूरत पड़ने पर मातृभूमि के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर देता है. समारोप कार्यक्रम में शिक्षार्थियों ने शारीरिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया. सामूहिक प्रदर्शन में प्रहार, सामूहिक समता, व्यायाम योग और सूर्य नमस्कार का प्रदर्शन किया गया.

bikaner1वर्ग के वर्गाधिकारी पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल गुरूजीत सिंह ढिल्लो ने शिविर का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ग में शिक्षार्थियों को प्रतिदिन प्रातः 4 बजे से रात्रि 10-30 बजे तक की व्यस्त दिनचर्या के बीच अनेक प्रकार के कार्यक्रम सिखाए गए. शिक्षार्थियों को प्रतिदिन ढाई घंटे प्रातः और लगभग पौने दो घंटे सायं के समय शारीरिक अभ्यास की अनेक विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया.

वर्ग के साथ घोष वर्ग में 43 स्थानों से 73 शिक्षार्थी भाग ले रहे हैं, जिन्होंने 11 कुशल शिक्षकों के सानिध्य में घोष के विभिन्न वाद्यों का प्रशिक्षण प्राप्त किया है. कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक दुर्गादास जी , अखिल भारतीय गौ-सेवा प्रमुख शंकर लाल जी , बीकानेर विभाग के संघ चालक नरोत्तम व्यास जी  सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक, प्रशिक्षणार्थी और प्रशिक्षक मौजूद थे.

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