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शबरीमला – सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हैं

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परंपराओं और रीति-रिवाजों से जुड़े मामले आस्था और विश्वास के मुद्दे हैं. शबरीमला मंदिर में एक विशेष आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध से लिंग असमानता या भेदभाव का कोई संबंध नहीं है, तथा यह प्रतिबंध केवल देवता की विशिष्टता के कारण है. हमारा दृढ़ मत है कि इस मामले में न्यायिक समीक्षा हमारे संविधान द्वारा प्रदत्त पूजा की स्वतंत्रता की भावना का उल्लंघन होगी. और संबंधित पक्ष की राय को ऐसे मामलों में सर्वोपरि माना जाना चाहिए.

हम सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पुनर्विचार याचिका को स्वीकार करने तथा मामले को बड़ी संवैधानिक पीठ के पास भेजने का स्वागत करते हैं.

अरुण कुमार

अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

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