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शिक्षा में जीवन मूल्यों, संस्कृति व संस्कारों का भी समावेश हो

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मेरठ में दो दिवसीय ज्ञानोत्सव का आयोजन

मेरठ. शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी जी ने कहा कि ‘देश को बदलना है तो शिक्षा को बदलना होगा. बड़ी-बड़ी बात करने के बजाए, छोटी-छोटी बातों को जीवन में धारण करना होगा. देश के लिए मरने के बजाए, देश के लिये जीना सीखें. शिक्षा में जीवन की दृष्टि प्राप्त होनी चाहिए. हर व्यक्ति शिक्षा पाकर नौकर बनना चाहता है. जबकि शिक्षा ऐसी ग्रहण करो कि दूसरों को नौकरी दे सको. शिक्षा में ऐसे परिवर्तन करने के लिए ही ज्ञानोत्सव का आयोजन किया जा रहा है.’ वे शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं शिक्षा विभाग चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय ज्ञानोत्सव के उद्घाटन अवसर पर संबोधित कर रहे थे.

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चन्द्र बोस सभागृह में शिक्षाविदों, अध्यापकों एवं विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए अतुल कोठारी ने कहा कि वर्तमान शिक्षा बच्चों के लिए बोझ बन गई है. बच्चों पर किताबों का इतना बोझ डाल दिया जाता है कि वह स्कूल जाने से कतराते हैं. जबकि नई शिक्षा नीति ऐसी होनी चाहिए कि बच्चों को स्कूल जाने में आनंद आए. शिक्षा ऐसी हो कि बच्चों को समाज जीवन, देश आदि के प्रति कुछ दृष्टि प्राप्त हो. पैसा कमाने के साथ वह समाज व राष्ट्र के लिए भी समय दे. राष्ट्र को प्राथमिकता दे. हमारी शिक्षा विकास प्रवृत्ति व प्रकृति के अनुरूप होनी चाहिए.

मुख्य अतिथि सूर्य प्रकाश टाँक ने कहा कि पढ़ना-लिखना ही मात्र शिक्षा नहीं होती है. संस्कार व संस्कृति यदि शिक्षा में नहीं है तो जीवन मूल्य समाप्त हो जाते हैं. शिक्षा के साथ इनको भी जोड़ा जाना चाहिए. क्योंकि जीवन मूल्यों के बिना शिक्षा अर्थहीन है. वर्तमान शिक्षा बच्चों को केवल जीविका चलाना सिखा रही है. पैसा कमाना और पेट भरना ही केवल मुनष्य का कर्तव्य नहीं है. यदि शिक्षा में जीवन मूल्य, संस्कृति व संस्कार भी आ जाएं तो शिक्षा के साथ न्याय होगा.

कार्यक्रम के अध्यक्ष चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति नरेंद्र कुमार तनेजा ने कहा कि पाश्चात्य शिक्षा अपूर्णता का परिचायक है. पाश्चात्य शिक्षा का उद्देश्य धन से मनुष्य को प्रभावित करना है. मनुष्य साधन मात्र नहीं है. भारतीय संस्कृति का समाज व राष्ट्र के लिए चिंतन करना आर्थिक उपेक्षा नहीं है. परिवार, समाज, राष्ट्र मानवता के प्रति कर्तव्य का बोध कराने वाली शिक्षा विश्व कल्याण के लिए आवश्यक है.

ज्ञानोत्सव में राजनीतिक विज्ञान विभाग में आयोजित चर्चा सत्र में देश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर मंथन हुआ. सत्र में भारतीय शिक्षा पद्धति में सुधार पर संकल्प पत्र प्रस्तुत किया गया. जिसमें चरित्र निर्माण, पर्यावरण शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं शोध, मातृभाषा में शिक्षा, शिक्षा में भारतीय दृष्टि तथा ज्ञान का समावेश, शिक्षा को स्वायत्त तथा व्यावहारिक दृष्टि मुख्य बिन्दु रहे.

दो दिवसीय ज्ञानोत्सव कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों एवं बच्चों ने नवाचार प्रदर्शनी के स्टॉल लगाए, जिसे सभी ने बहुत सराहा.

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