शिक्षा व्यवस्था में आध्यात्मिक विद्या को शामिल करना होगा – गजपति महाराज दिव्य सिंहदेव जी Reviewed by Momizat on . चार दिवसीय हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला भुवनेश्वर (विसंकें). गजपति महाराज दिव्य सिंहदेव जी ने कहा कि भारत को यदि विश्व गुरु बनाना है तो शिक्षा व्यवस्था में आ चार दिवसीय हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला भुवनेश्वर (विसंकें). गजपति महाराज दिव्य सिंहदेव जी ने कहा कि भारत को यदि विश्व गुरु बनाना है तो शिक्षा व्यवस्था में आ Rating: 0
    You Are Here: Home » शिक्षा व्यवस्था में आध्यात्मिक विद्या को शामिल करना होगा – गजपति महाराज दिव्य सिंहदेव जी

    शिक्षा व्यवस्था में आध्यात्मिक विद्या को शामिल करना होगा – गजपति महाराज दिव्य सिंहदेव जी

    Spread the love

    चार दिवसीय हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला

    भुवनेश्वर (विसंकें). गजपति महाराज दिव्य सिंहदेव जी ने कहा कि भारत को यदि विश्व गुरु बनाना है तो शिक्षा व्यवस्था में आध्यात्मिक विद्या को शामिल करना होगा. भारतीय संविधान को सम्मान देते हुए सभी धर्मावलंबियों से चर्चा कर भौतिक विद्या के साथ शिक्षा व्यवस्था में आध्यात्मिक विद्या को शामिल किया जाना चाहिए. इससे हम अपने बच्चों को चरित्रवान बना सकते हैं. अध्यात्म जीवन में हर प्रकार की भौतिक प्रगति भी है और तभी जाकर भारत विश्व गुरु बन सकता है. वे राजधानी भुवनेश्वर के यूनिट-3 प्रदर्शनी मैदान में आइएमसीटी की ओर से आयोजित चार दिवसीय हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि दो संस्कृति के बीच हम फंस गए हैं. कहां जाएं रास्ता नहीं मिल रहा है. भारत का स्वरूप ऋषि मुनियों का रहा है, जो वर्तमान समय में नहीं रह गया है. भौतिक संस्कृति पिछले कुछ दिनों से काफी तेजी से अपना पैर भारत में भी फैला रही है, जिससे भारत की आध्यात्मिक संस्कृति विलुप्त हो रही है.

    उन्होंने कहा कि हम भारतीय लोग अमेरिका से भी दो कदम आगे बढ़कर भौतिक परंपरा को अपना रहे हैं. इसका प्रमुख कारण है हमारी व्यवस्था. पूरी दुनिया के साथ भारत में भी व्यक्ति निर्माण की प्रक्रिया है, वह अध्यात्म के लिए अनुकूल नहीं है. आज घर का परिवेश ही आध्यात्मिक शिक्षा के लिए अनुकूल नहीं है, स्कूल में आध्यात्मिक शिक्षा है ही नहीं, चरित्र का निर्माण मेडिकल साइंस या साइंस से नहीं हो सकता है. इस पर चिंतन की जरूरत है. गजपति महाराज ने प्रस्ताव दिया कि हमें इसके लिए संतों के विचार का अध्ययन करना होगा, मार्ग खुद प्रशस्त हो जाएगा. घर, शिक्षानुष्ठान एवं समाज में व्यापक सुधार लाकर मानव का निर्माण हो सकता है.

    आइएमसीटी की ट्रस्टी राजलक्ष्मी जी ने कहा कि आप अपने माता-पिता का आदर व सम्मान करें तो आपको किसी मंदिर में जाने की जरूरत नहीं है. आइएमसीटी के कार्यकारी अध्यक्ष मुरली मनोहर शर्मा जी ने मेला आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि 6 विषयों को लेकर 200 स्कूलों में 38 प्रकार की प्रतियोगिता आयोजित की गई और बच्चों को पुरस्कृत किया गया. इस दौरान नारी सम्मान को प्रोत्साहन, कन्या पूजन, आचार्य वंदना, 500 परिवार एक साथ बैठेंगे और अपने माता-पिता का पूजन करेंगे. मेले में 160 सामाजिक संस्थाओं ने स्टॉल लगाए हैं, जो अपने सेवा कार्य को प्रदर्शित कर रहे हैं.

    •  
    •  
    •  
    •  
    •  

    About The Author

    Number of Entries : 6857

    Leave a Comment

    हमारे न्यूज़लेटर के लिए साइन अप करें

    VSK Bharat नवीनतम समाचार के बारे में सूचित करने के लिए अभी सदस्यता लें

    Scroll to top