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संघ ने पथसंचलन पर प्रतिबंध के विरुद्ध कानूनी लड़ाई जीती

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चेन्नै. मद्रास उच्चन्यायालय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आगामी 9 नवंबर को तमिलनाडु के हर जिले में प्रस्तावित पथसंचलन को अनुमति नहीं दिये जाने के विरुद्ध संघ के प्रतिनिधियों की याचिका को स्वीकार कर लिया है.

नायायधीश न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रह्मण्यम ने गत तीन और छह नवंबर को मामले की हुई सुनवाई के बाद निर्णय दिया कि संघ अपने प्रस्तावित पथसंचलन का आयोजन कर सकता है. बताया जाता है कि राज्य सरकार इस निर्णय के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय में अपील करने की तैयारी कर रही है.

संघ की ओर से हर जिले के पुलिस कार्यालय में उक्त पथसंचलन के लिये अनुमति मांगी गयी थी, जिसे देने से पुलिस ने चेन्नै पुलिस कानून, 1888 के अनुच्छेद 41 ए (तमिलनाडु जिला पुलिस कानून 1859 के अनुच्छेद 54 ए के साथ पठित) का हवाला देते हुए इंकार कर दिया था.   

विद्वान न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा है कि अनुच्छेद 41 ए जुलूस निकालने पर लागू नहीं होता है. संघ के खाकी नेकर और सफेद कमीज वाले गणवेश पर जब राज्य सरकार की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि यह देश के सशस्त्र बलों और पुलिस की यूनिफॉर्म से मिलता-जुलता है, तो न्यायाधीश ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस फोर्स का कोई सदस्य आज हाफ पेन्ट नहीं पहनता और यह गणवेश 1920 के दशक में तय किया गया था.

न्यायमूर्ति रामसुब्रह्मण्यम ने संघ के प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत याचिका को यह कहते हुए मंजूर कर लिया कि कानून प्रतिबंधात्मक नहीं, अपितु सिर्फ नियमनकारी है. उन्होंने राज्य सरकार को निर्दिष्ट स्थानों पर पथसंचलन और जनसभायें करने के लिये अनुमति देने का निर्देश दिया. फैसले के अनुसार उन सात स्थानों पर संघ के गणवेश में पथसंचलन के लिये अनुमति दी गयी है, जहां के प्रतिनिधियों ने उच्चन्यायालय में याचिका दायर की थी.

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