संस्कृति का स्मृतिभ्रंश ही देश में बड़ी समस्या – अरुण कुमार जी Reviewed by Momizat on . नागपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार जी ने कहा कि अपने देश का इतिहास गौरवशाली रहा है. मात्र ब्रिटिश शिक्षा पद्धति क नागपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार जी ने कहा कि अपने देश का इतिहास गौरवशाली रहा है. मात्र ब्रिटिश शिक्षा पद्धति क Rating: 0
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    संस्कृति का स्मृतिभ्रंश ही देश में बड़ी समस्या – अरुण कुमार जी

    नागपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार जी ने कहा कि अपने देश का इतिहास गौरवशाली रहा है. मात्र ब्रिटिश शिक्षा पद्धति के कारण नागरिकों की विचार करने की प्रवृत्ति ही बदल गई है. इसके चलते हम लोग अपने ही इतिहास पर प्रश्नचिन्ह लगाने लगे हैं. अपनी संस्कृति परंपरा के बारे में होता स्मृतिभ्रंश ही देश के सामने बड़ी समस्या बन कर उभरी है. इसलिये समाज के सभी क्षेत्रों में भारतीय प्रतीकों की स्थापना करने की आवश्यकता है. नारद जयंती यही सुनहरा क्षण है जो अब पत्रकार जगत में अपनाया जा रहा है. अरुण जी विश्व संवाद केंद्र नागपुर द्वारा आयोजित देवर्षि नारद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित पत्रकार सम्मान समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे.

    डॉ. हेडगेवार रक्तपेडी के सभागार में आयोजित कार्यक्रम के अध्यक्ष नागपुर विद्यापीठ के कुलगुरु सिद्धिविनायक काने जी थे. अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र कुमार जी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे. नारद जयंती के निमित्त पत्रकारिता के क्षेत्र में विशेष योगदान करने वाले वरिष्ठ पत्रकार अविनाश महालक्ष्मे जी, प्रवीण मुधोलकर जी तथा नंदू अंधारे जी को सम्मानित किया गया.

    अरुण कुमार जी ने कहा कि आधुनिकता के नाम पर हमारी परम्पराओं को नीचा दिखाने का प्रयास किया जा रहा है. सोशल मीडिया के कारण पत्रकारिता की व्याख्या बदलती दिख रही है. अंग्रेजों के आने से पूर्व ही भारत में विकसित शिक्षा पद्धति थी. नालंदा जैसे उच्चविद्या संस्थान हमारे देश में थे. देश विदेशों से विद्यार्थी यहाँ पढ़ने के लिये आते थे. भारत का व्यापार काफी बड़ा था. भारत की संस्कृति को विश्व में मान्यता थी. लेकिन अंग्रेजों ने ऐसी शिक्षा का निर्माण किया कि पीढ़ी दर पीढ़ी हम लोग अपनी गौरवशाली संस्कृति, इतिहास और पराक्रमी पूर्वजों को भूल गए. स्वामी विवेकानंद कहते हैं – आत्म विस्मृति से ही आत्म गौरव लुप्त होता है. उसके आगे आत्मनिंदा करने की प्रवृति बढ़ती है, परिणाम आत्मविश्वास समाप्त होता है. इसीलिये ‘स्व’ का साक्षात्कार होना, यही आज की आवश्यकता है.

    समारोह में प्रान्त की जागरण पत्रिका के पूर्व संपादक प्रभाकर राव करपे जी तथा सुषमाताई पाचपोर जी को भी सम्मानित किया गया. नागपुर के प्रमुख मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित थे. समाज के गणमान्य नागरिक भी काफी संख्या में उपस्थित थे. राष्ट्रगीत से कार्यक्रम का समापन हुआ.

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