समरसता की भावना को पुष्ट करना ही रक्षाबंधन का संदेश है – तरूण विजय Reviewed by Momizat on . लखनऊ (विसंकें). राज्यसभा सांसद तरुण विजय ने कहा कि भारतीय धरोहर को रक्षा कवच की जरूरत है. आज वह रक्षा सूत्र मांग रही है. भारत की सीमाएं असुरक्षित हैं. हमारा देश लखनऊ (विसंकें). राज्यसभा सांसद तरुण विजय ने कहा कि भारतीय धरोहर को रक्षा कवच की जरूरत है. आज वह रक्षा सूत्र मांग रही है. भारत की सीमाएं असुरक्षित हैं. हमारा देश Rating: 0
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    समरसता की भावना को पुष्ट करना ही रक्षाबंधन का संदेश है – तरूण विजय

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    DSC_1249लखनऊ (विसंकें). राज्यसभा सांसद तरुण विजय ने कहा कि भारतीय धरोहर को रक्षा कवच की जरूरत है. आज वह रक्षा सूत्र मांग रही है. भारत की सीमाएं असुरक्षित हैं. हमारा देश दो परमाणु ताकतों से आक्रान्त है. दोनों भारत में किसी न किसी रूप में आतंक को बढ़ावा दे रहे हैं. विदेशी धन और विदेशी मन का नतीजा है कि आज नक्सलवाद बढ़ रहा है.  रक्षाबंधन उत्सव इन सभी चीजों का रक्षा कवच है. वह शुक्रवार को सरस्वती कुंज निरालानगर में रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे.

    उन्होंने कहा कि यह वह देश है, जब आज से दो हजार साल पहले दुनिया के अन्य देशों के लोग जंगलों में रहते थे. उस समय तक्षशिला विश्वविद्यालय  में 30 लाख हस्तलिखित पुस्तकें थी. यह हजारों वर्ष पुरानी हमारी ज्ञान साधना का प्रतीक है. जाति के आधार पर हिन्दुओं का विभाजन कलंक है. जिनको आज अस्पृश्य कहा जा रहा है, वह सामंत, सिसोदिया चौहान थे. मैला ढोने की प्रथा भारत में कभी नहीं रही. युद्ध में जो हार गये, उनसे कहा गया इस्लाम कबूल करो या मैला ढोने का काम करो. उन्होंने अधरों से राम को छोड़ा नहीं, हृदय से धर्म को छोड़ा नहीं. तरूण विजय ने कहा कि जो समाज दुनिया को वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश देता है, आज वह अपने ही समाज के लोगों को अस्पृश्य कह रहा है. अस्पृश्य करना है तो कुरीतियों को बाहर करो. जाति के विरूद्ध लड़ते हुए समरसता की भावना पुष्ट करना ही रक्षाबंधन का संदेश है. आज भारतीय भूषा और चिति पर आक्रमण हो रहा है. घरों  से हिन्दी गायब हो रही है. मणिपुर में हिन्दी प्रतिबंधित है. वहां कोई हिन्दी साहित्य नहीं रख सकता. यह भारत में हो रहा है. हिन्दी भाषा के अखबारों में कलिष्टता के नाम पर अंग्रेजी रखी जा रही है.

    DSC_1289उन्होंने कहा कि आज शक्ति के पुनः जागरण की आवश्यकता है. आज हमें प्रबल प्रतापी आतंक विहीन, सबल सशक्त समृद्ध भारत का निर्माण करना है. स्वतंत्रता के बाद अकेला भारत देश ऐसा है, जिसके नागरिकों को तिरंगे के प्रति प्रतिबद्धता के कारण देश से निकाला गया. कार्यक्रम की शुरुआत में लोकहित प्रकाशन की ओर प्रकाशित सामाजिक समरसता पुस्तक का भी विमोचन भी किया गया.
    कार्यक्रम की अध्यक्षता न्यायमूर्ति कमलेश्वर नाथ ने की. क्षेत्र कार्यवाह रामकुमार वर्मा जी, प्रान्त संघचालक प्रभुनारायण श्रीवास्तव, विभाग संघचालक जय कृष्ण सिन्हा, सहित अन्य उपस्थित थे.

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