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समाज जागरूक रहा तो परिवर्तन चिरस्थायी होगा : सरसंघचालक

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नागपुर. देश में हुए सत्ता परिवर्तन का उल्लेख करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परमपूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने कहा कि यह परिवर्तन जागरूक समाज की वजह से हो सका. परिवर्तन से जनता में अच्छे दिन की उम्मीद बढ़ी है, पर यदि समाज सत्ता सौंप निश्चिन्त होकर सो जाये तो देश में सम्पूर्ण बदलाव नहीं होगा. उन्होंने कहा कि यदि देश में सम्पूर्ण परिवर्तन चाहिये तो समाज को सदैव जागरूक रहना होगा. समाज जागरूक रहा तो यह परिवर्तन चिरस्थायी हो सकता है.

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डॉ.भागवत गुरुवार, 12 जून को संघ के तृतीय वर्ष के प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे. नागपुर के रेशिमबाग स्थित स्मृति मंदिर परिसर के विशाल प्रांगण में आयोजित इस समारोह में आध्यात्मिक गुरु एवं आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर बतौर मुख्य अतिथि व्यासपीठ पर उपस्थित थे.

छत्रपति शिवाजी महाराज के शासन का उदाहरण देते हुए सरसंघचालक डॉ.भागवत ने कहा कि समाज ही शासक को गढऩे का काम करता है. उन्होंने कहा, 440 वर्ष पूर्व देश की जनता को प्रतीत हुआ था कि हमें हमारा राजा मिल गया. शिवाजी महाराज को प्रजा ‘अपना राजा’ मानती थी, क्योंकि शिवाजी महाराज ने लोकतांत्रिक शासन की तर्ज पर स्वराज्य का संचालन किया. वह शासन न्यायपूर्ण, समतायुक्त, शोषणमुक्त, अनुशासन पर कड़ाई से काम करनेवाला और दीन-दुखियों के हितों के लिये कार्य करनेवाला था. उस शासन ने प्रजा में आत्मगौरव को प्रतिष्ठित कर उसे कर्तव्यसिद्ध बनाया. यही कारण है कि शिवाजी के मृत्यु के बाद भी 30 वर्ष तक बिना राजा के स्वराज्य की धरती को मुग़ल शासक (औरंगजेब) जीत न सका. महाराष्ट्र की धरती में ही उसकी मृत्यु हो गई. ऐसा संभव तभी हो सका जब प्रजा समाज के संरक्षण के प्रति जागरूक थी.”

कांग्रेस का नाम लिये बगैर सरसंघचालक ने कहा कि स्वतंत्रता का आंदोलन जनआंदोलन था. स्वतंत्रता के बाद लोगों ने उत्साह के साथ सत्ता सौंपी थी. विकास को दिशा दी जानी थी, लेकिन लोगों की अपेक्षा पूरी नहीं हो पाई.क्योंकि सत्ता सौंपकर जनता निश्चिन्त हो गई. नई सत्ता को लेकर भी लोगों में उत्साह है. अच्छे दिन आने की उम्मीदें हैं.15 दिन ही हुये हैं. जो कुछ देखा जा रहा है उससे नहीं लगता कि उम्मीद अनुचित है. इरादा पक्का है. कदम भी उठ रहे हैं. लेकिन केवल शासकों से सारी उम्मीदें नहीं की जानी चाहिये. उनकी कुछ मर्यादायें होती हैं.

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उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज को ठेका देकर यदि समाज सो जाता तो क्या स्वराज्य की रक्षा हो पाती? देश को सुखी और समृद्ध बनाना है तो सभी को जागना होगा. मतभेद हो सकते हैं, पर मनभेद न हो, सभी मिलकर राष्ट्रविकास के भागीदार बनें.

रिमोट कंट्रोल नहीं, राष्ट्रगौरव का भाव जगाता है संघ

खबरों में यह आरोप लगाया जाता है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का रिमोट संघ के हाथ में होता है और फैसले वहीं लिये जाते हैं. इस बात का खंडन करते हुए सरसंघचालक डॉ.भागवत ने कहा कि संघ किसी पर रिमोट कंट्रोल का काम नहीं करता, वरन देश की जनता में राष्ट्रगौरव का भाव जगाता है. संघ देश के प्रत्येक व्यक्ति के मन में राष्ट्रीय एकात्मता के जागरण के लिये कार्य करता है. संघ जनता में यह भाव सुदृढ़ करने का काम करता है कि मैं समाज की सेवा करूंगा.

बंधुता नहीं तो कुछ नहीं

डॉ.बाबासाहेब अम्बेडकर के संविधान सभा में बोले एक कथन का उद्धरण देते हुए संघ प्रमुख ने प्रश्न किया कि स्वतंत्रता, अधिकार और समता की बातें होतीं हैं, पर समाजजीवन में बंधुता का भाव न हो तो क्या समाज में सुधार हो सकेगा? उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों में बंधुत्व का भाव होना चाहिये. यही बंधुत्व का भाव जिसे हम हिंदुत्व कहते हैं, यही वह सूत्र है जो समाज को जोड़ सकता है. इसलिये हमारे समाज की पीड़ा कोई बाहरी देश के लोग आकर दूर नहीं करेंगे. हमारे समाज में वह शक्ति है जो अपने समाज के दुखों को दूर कर सकता है. इसलिये हमें जाति, पंथ, मतों और विषमता के भाव को छोड़कर अपने देश के सनातन जीवन मूल्यों पर अडिग रहकर आगे बढ़ना होगा. इसी से समाज में सम्पूर्ण परिवर्तन हो सकेगा और यह परिवर्तन चिरस्थायी होगा.

स्वधर्म पर गर्व हो, आत्मविश्वास बढ़ेगा : श्रीश्री रविशंकर

आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि जिस राष्ट्र में अपने देश की विरासत के प्रति गौरव न हो, वह पतनशील बन जाता है. इसलिये देश के गौरव को विश्व पटल पर पुनः प्रस्थापित करना होगा. उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानन्दजी ने स्वतंत्रता के पूर्व अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्वधर्म सम्मलेन में भारत को प्रतिष्ठित किया था. स्वामीजी ने ‘हिन्दू’ होने पर स्वयं को गौरवान्वित होने की बात कही थी, तब भारतीय समाज का आत्मविश्वास बढ़ा था. पर आज लोग स्वयं को ‘हिन्दू’ कहने में भी हिचकिचाते हैं, यह ठीक नहीं. श्री श्री ने कहा कि अपने देश, धर्म और संस्कृति पर हमें गर्व होना चाहिये. इससे हमारे देश का आत्मगौरव बढ़ेगा. उन्होंने समारोह में उपस्थित संघ स्वयंसेवकों और जनता से आह्वान किया कि वे देश के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिये काम करें.

श्री श्री रविशंकर ने कहा कि शासक तो बनाया जाता है, पर अनुशासन स्वप्रेरित होता है. अनुशासन न रहा तो संसद में कुर्सियां उडऩे लगती हैं. समाज में उपद्रव होता है. इसलिये शासन में भी अनुशासन चाहिये. बढ़ती नशाखोरी पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि देश में शराब बिक्री तीन गुना बढ़ी है. अन्य नशा-पान भी बढ़े हैं. नशा अनुशासन विरोधी है. हमें नशामुक्ति के लिये समाज में जागृति लानी होगी. श्री श्री ने कहा कि जीवन की सार्थकता समाज की सेवा में निहित है. समाज का आत्मबल बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जाना चाहिये.

कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रशिक्षण शिविर के वर्ग कार्यवाह प्रकाश शास्त्री ने रखी. कार्यक्रम के प्रारंभ में ध्वजारोहण के बाद शिक्षार्थियों द्वारा दंडयोग, सूर्यनमस्कार, नियुद्ध आदि का प्रदर्शन किया गया.

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