समाज में एकात्मता के भाव के बिना सशक्त भारत की कल्पना नहीं की जा सकती – रामकुमार जी Reviewed by Momizat on . लखनऊ (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र कार्यवाह रामकुमार जी ने कहा कि समाज में जब तक एकात्मता का भाव नहीं होगा, तब तक सशक्त भारत लखनऊ (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र कार्यवाह रामकुमार जी ने कहा कि समाज में जब तक एकात्मता का भाव नहीं होगा, तब तक सशक्त भारत Rating: 0
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    समाज में एकात्मता के भाव के बिना सशक्त भारत की कल्पना नहीं की जा सकती – रामकुमार जी

    13 (1)लखनऊ (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र कार्यवाह रामकुमार जी ने कहा कि समाज में जब तक एकात्मता का भाव नहीं होगा, तब तक सशक्त भारत की कल्पना नहीं की जा सकती है. भारत अपने बल और पराक्रम से ही सशक्त बनेगा. उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में भारत की भूमिका सांस्कृतिक नेतृत्व करने की बन रही है. योग संस्कृति ने पूरे विश्व को स्वतःस्फूर्त चमत्कृत किया है. आगे विश्व का नेतृत्व करने की क्षमता अकेले भारत में है, क्योंकि भारतीय संस्कृति की मूल अवधारणा विश्व एकता, भ्रातृत्व तथा सर्वमंगलकारी मानवता की है.

    वह बुधवार को उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी में विश्व संवाद केन्द्र लखनऊ द्वारा प्रकाशित पत्रिका के विशेषांक ‘‘सशक्त भारत’’ के विमोचन कार्यक्रम में मुख्यवक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश जी ने कहा कि जहां विश्व अशान्ति की ओर बढ़ रहा है, वहीं भारत विश्वबंधुत्व तथा विश्वकल्याण की बात कर रहा है. यही भावना सशक्त भारत का निर्माण कर रही है. भारत सशक्त तभी होगा जब सबकी भागीदारी होगी. सामूहिक सहभागिता के बगैर राष्ट्र सबल नहीं हो सकता.

    विशिष्ट अतिथि कृपाशंकर जी, संयुक्त प्रचार प्रमुख (उप्र.) ने पत्रिका में छपे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के लेख की चर्चा करते हुये उनके जीवन में आये चार अवसरों के बारे में बताया. साथ ही विश्व संवाद केन्द्र द्वारा होने वाली मीडिया गतिविधियों के बारे में बताया. 13कार्यक्रम की अध्यक्षता बाबासाहब भीमराव आम्बेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरसी सोबती जी ने कहा कि हमारे पास एक भाषा संस्कृत थी. जिसको हम लोग भूल गये, अपनी रीति रिवाज और परम्पराओं को भूल गये. सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद हमारे पास थी. आज विदेशों में जोर शोर से आयुर्वेद बढ़ रहा है. भारत की चीजें आज पूरा विश्व सीख रहा है, लेकिन भारतीय अपनी चीजों को सीख नहीं रहे.

    पत्रिका का परिचय कराते हुये राकेश मंजुल जी ने बताया कि सशक्त भारत विशेषांक में समर्थ भारत निर्माण का सकारात्मक मार्ग, कारगिल की निर्णायक विजय, राष्ट्र का अर्थ, हिन्दी पत्रकारिता की तीन विभूतियां, आजाद हिन्द फौज की अमर कहानी, भारत ही विश्व का नेतृत्व करेगा जैसे विषयवस्तु के कुल 28 लेख संकलित हैं. कार्यक्रम में प्रान्त प्रचारक संजय जी, सह प्रान्त प्रचारक रमेश जी, क्षेत्र प्रचार प्रमुख राजेन्द्र सक्सेना जी सहित गणमान्यजन उपस्थित थे.

     

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