समाज में देशभक्ति की भावना पैदा करने का कार्य करता है संघ Reviewed by Momizat on . गोण्डा/अवध (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अवध प्रान्त प्रचारक संजय जी ने कहा कि संघ ही एक मात्र ऐसा संगठन है, जो समाज में देशभक्ति की भावना पैदा कर गोण्डा/अवध (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अवध प्रान्त प्रचारक संजय जी ने कहा कि संघ ही एक मात्र ऐसा संगठन है, जो समाज में देशभक्ति की भावना पैदा कर Rating: 0
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    समाज में देशभक्ति की भावना पैदा करने का कार्य करता है संघ

    avadh (3)गोण्डा/अवध (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अवध प्रान्त प्रचारक संजय जी ने कहा कि संघ ही एक मात्र ऐसा संगठन है, जो समाज में देशभक्ति की भावना पैदा करने का कार्य कर रहा है. हिन्दू दर्शन की विशेषताओं की चर्चा करते कहा कि पहली विशेषता है कि हम ईश्वर के अंश है और जो कुछ भी यहां है, वह सब ईश्वर द्वारा ही निर्मित है. दूसरी हमारी विशेषता है कि ईश्वर सभी में समान रूप से है. तीसरी विशेषता यह है कि सर्वमांगल्य की इच्छा, सभी सुखी हों, यह हमारी दृष्टि रही है और चौथी हमारी विशेषता है एकम् सद् विप्रा बहुदा वदन्ति,  ईश्वर एक है …हम किसी की भी उपासना करें, वह उसी ईश्वर की उपासना होगी… का दृष्टिकोण ही हिन्दू दर्शन है. इसने हमको भेद करने से ऊपर सिखाया, सबको साथ लेकर चलना सिखाया. हमारा चिन्तन यहीं नहीं रूका, हमने सम्पूर्ण पृथ्वी को मां माना है और उस पर रहने वाला प्रत्येक मनुष्य हमारे परिवार का अंग है. संजय जी अवध प्रांत के श्री रघुकुल विद्यापीठ में विगत 20 दिनों से चल रहे संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष के समारोप कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे.

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    उन्होंने कहा कि हम सब स्वयंसेवकों ने भारत माता की जय का स्वप्न संजोया है और उसके लिये संकल्प किया है कि हम राष्ट्र को वैभव के शिखर पर ले जाते हुए अपने धर्म का संरक्षण करेंगे. हम समाज में सज्जन शक्ति का आह्वान करते हैं कि वे कार्य में सहयोग करें, और उनके सहयोग से राष्ट्र को उच्चता के शिखर पर ले जायें. समाज के अन्दर संवेदना होनी चाहिये, संवेदनशील मन के साथ शक्ति की उपासना अत्यंत आवश्यक है. आज के परिदृश्य पर कहा कि आज श्रेष्ठ व अच्छा कैसे दिखा जाए, इस पर हमारा ध्यान केन्द्रित होता जा रहा है, जबकि आवश्यकता है कि हम श्रेष्ठ व अच्छे कैसे बनें, समाज में इस दिशा में परिवर्तन आवश्यक है.

    आरएसएस के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी का स्मरण करते कहा कि डॉ. साहब चाहते तो सुख सुविधा से भरा जीवन जी सकते थे, किन्तु उनके मन में देश व समाज के प्रति संवेदना व करुणा का भाव था. इसके लिये उन्होंने अपना जीवन अर्पण किया, उन्हें मालूम था कि देश को जोड़ने का कार्य हिन्दू संस्कृति ही कर सकती है. जीवन मूल्यों को जोड़ने से एक संस्कृति का निर्माण होता है. अपने पूर्वजों का स्मरण कर गौरव अनुभव करो तो राष्ट्रीयता की भावना जागृत होगी, इसके लिये डॉ. हेडगेवार जी ने दैनिक शाखा का माध्यम अपनाकर राष्ट्र को एक करने का सफल उपाय बताया. इस वर्ग में प्रान्त के 24 जिलों के लगभग 430 शिक्षार्थियों ने शारीरिक के विभिन्न विषयों का प्रशिक्षण प्राप्त किया. समापन समारोह में वर्गाधिकारी नरसिंह नारायण, क्षेत्र प्रचारक प्रमुख अशोक उपाध्याय, क्षेत्र प्रचार प्रमुख राजेन्द्र सक्सेना, प्रान्त कार्यवाह अनिल जी, सह प्रान्त कार्यवाह नरेन्द्र,  डॉ. अशोक जी, सह प्रान्त प्रचारक रमेश जी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे.

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