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सरिता बनी सविता

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रांची (विसंके). पुरुलिया जिले के राजड़ा गांव की 15 वर्षीय सविता की शादी सातवीं कक्षा में पढ़ते हुए ही उसके पिता तृभंग बागदी ने कर दी. लेकिन उसके नर्स बनने की चाहत उसकी शादी में आड़े नहीं आ पाई. पहले तो उसने घर में इसका प्रबल विरोध किया किन्तु सफलता नहीं मिलने पर ससुराल में अपनी पढ़डाई के लिये अड़ गयी. फलस्वरूप, शादी के एक सप्ताह के उपरान्त ससुरालवालों ने उसे मायके वापस भेज दिया. तत्पश्चात् मायके की दुश्वारियों को दरकिनार करते हुए उसने आद्र मणिपुर होम से संपर्क कर अपनी कहानी सुनायी. संस्था ने उसके जज्बे की सराहना करते हुए उसके घरवालों से लिखित तौर पर उसकी जिम्मेदारी ले ली और अब वह पुनः विद्यासागर विद्यापीठ में सातवीं कक्षा में पढ़ रही है.

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