सामाजिक विकास की गतिविधियों से सशक्त, समृद्ध समाज व राष्ट्र निर्माण में योगदान वानप्रस्थ की अवधारणा – डॉ. मोहन भागवत जी Reviewed by Momizat on . नागौर/जोधपुर (विसंकें). सम्पूर्ण समाज के संगठन, संस्कार के लिए समाज के सभी वर्गों में काम किये जाने की आवश्यकता है और संघ का उद्देश्य किसी एक समूह समुदाय के लिए नागौर/जोधपुर (विसंकें). सम्पूर्ण समाज के संगठन, संस्कार के लिए समाज के सभी वर्गों में काम किये जाने की आवश्यकता है और संघ का उद्देश्य किसी एक समूह समुदाय के लिए Rating: 0
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    सामाजिक विकास की गतिविधियों से सशक्त, समृद्ध समाज व राष्ट्र निर्माण में योगदान वानप्रस्थ की अवधारणा – डॉ. मोहन भागवत जी

    नागौर/जोधपुर (विसंकें). सम्पूर्ण समाज के संगठन, संस्कार के लिए समाज के सभी वर्गों में काम किये जाने की आवश्यकता है और संघ का उद्देश्य किसी एक समूह समुदाय के लिए नहीं, वरन् सम्पूर्ण समाज को संस्कारित एवं संगठित करना, इस लक्ष्य को संघ ने धारण किया है. सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने वानप्रस्थी कार्यकर्ता बैठक में आए स्वयंसेवकों को विभिन्न गतिविधियों को सक्रिय करने में अपना  योगदान देने का आह्वान किया. शारदा विद्या निकेतन परिसर स्थित निवेदिता छात्रावास परिसर के सभागार में सम्पन्न राजस्थान क्षेत्र की वानप्रस्थी कार्यकर्त्ता बैठक (24, 25 सितंबर) में सरसंघचालक जी के साथ 175 वानप्रस्थी कार्यकर्त्ता सहभागी हुए.

    अपने पारिवारिक कौटुम्बिक दायित्वों से निवृत होने के बाद अपने समय को संघ योजना से समर्पित करने वाले स्वयंसेवक कार्यकर्त्ता वानप्रस्थी कहलाते हैं. संघ के माध्यम से समाज परिवर्तन के अन्यान्य कार्य – सेवा, शिक्षा, संस्कार, समरसता, ग्राम विकास, पर्यावरण, गौ संवर्धन जैसे कार्यों द्वारा समाज के उत्थान में अपना योगदान देने वाले ऐसे वानप्रस्थी कार्यकर्ता संघ के आग्रह पर इन कार्यों  का उत्तरदायित्व वहन  कर रहे हैं.

    24 सितम्बर को विभिन्न सत्रों में वानप्रस्थी कार्यकर्ताओं द्वारा किये जा रहे कार्यों, उनकी स्थिति, उनसे आ रहे परिवर्तन एवं उनकी अनुभूति को सबके बीच में कहने-सुनने-बताने अर्थात् अनुभव कथन का अवसर वानप्रस्थी कार्यकर्त्ता को मिला.

    बढ़ते हुए संघ कार्य, उसके प्रति समाज का विश्वास तथा युवाओं के साथ-साथ हर आयु वर्ग संघ कार्य को जानने समझने की जिज्ञासा के दौर में स्वयंसेवकों द्वारा समरसता एवं कार्यों के साथ पर्यावरण के क्षेत्र में व घुमन्तू जाति के क्षेत्र में भी कार्य व्याप्ति व बढ़ती आवश्यकता पर चर्चा हुई. ग्रामीण क्षेत्र मंडल एवं शहरी क्षेत्रों में बस्तियों तक समाज सभी वर्ग उनके बीच संघ के चल रहे सेवा संस्कार कार्य तथा उनकी अधिक बढ़ती आवश्यकता का अनुभव उस बैठक में सभी कार्यकर्ताओं को अनुभव कथन करने के पश्चात हुआ.

    घुमन्तू जाति यानि स्वतंत्रता के इतने वर्षों के बाद भी यह जातियां अपना स्थान बदलती रहती हैं अर्थात् वे एक स्थान पर स्थिर नहीं रहते हैं. ऐसी सभी जातियों के बीच भी शिक्षा, सेवा संस्कार के काम उनके जीवन स्तर को उठाने एवं समाज मुख्यधारा में लेने के लिए कार्य की आवश्यकता पर चर्चा हुई.

    पर्यावरण के क्षेत्र में अपना संस्थान (अपना देवी पर्यावरण नागरिक संस्थान) के माध्यम से स्वयंसेवकों द्वारा किये गए वृक्षारोपण कार्य की जानकारी दी गई एवं समीक्षा हुई. कुछ वर्षों से राजस्थान में स्वयंसेवक अपना संस्थान के माध्यम से वृक्षारोपण का कार्य कर रहे हैं.

    25 को प्रातः से दोपहर भोजन तक के सत्रों में सरसंघचालक जी से विकास, गौ सेवा एवं कुटुंब प्रबोधन पर मार्गदर्शन प्राप्त हुआ. सरसंघचालक जी ने वानप्रस्थी कार्यकर्ताओं के मध्य अपने समय समर्पण के माध्यम से समाज परिवर्तन के कार्य की आवश्यकता को प्रतिपादित करते हुए सशक्त समाज की अवधारणा स्वयंसेवकों के मध्य रखी.

    विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए सरसंघचालक जी ने बताया कि सशक्त समाज के लिए समाज के सभी वर्गों का समान रूप से उत्थान विकास यह आवश्यक है एवं स्वयंसेवकों द्वारा इन गतिविधियों से संवेदनशील सज्जन शक्ति के साथ लग कर अपने समाज को सशक्त समाज की दिशा में बढ़ाने को अपनी ऊर्जा क्षमता का योगदान करना चाहिए.

    तीनों  प्रान्त (जयपुर, जोधपुर एवं चित्तौड़) से आए वानप्रस्थी कार्यकर्त्ता सरसंघचालक जी का मार्गदर्शन प्राप्त कर विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से परिवर्तन के कार्य चलने में योगदान का संकल्प लेकर अपने  क्षेत्र को लौटे.

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