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साहित्य में भाव को लेकर अर्थ निकलता है: प्रो. चांद

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Sanskrit Bharti Photoदेहरादून (विसंके). संस्कृत भारती देहरादून द्वारा विश्व संवाद केन्द्र धर्मपुर के विवेकानन्द सभागार में 12 अक्टूबर को एक दिवसीय संस्कृत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया. जिसमें मुख्य अतिथि अखिल भारतीय अध्यक्ष संस्कृत भारती प्रों. चाँद किरण सजुला सहित विशिष्ट अतिथि श्री हरवन्त सिंह हलूवालिया एवं प्रान्ताध्यक्ष संस्कृत भारती डॉ. बुद्धदेव शर्मा विशेष रूप से उपस्थित थे. इस प्रशिक्षण वर्ग में 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया.

प्रशिक्षण के मुख्य अतिथि प्रों. चाँद किरण सजुला ने बताया कि किसी भी भाषा को चार सोपानों से गुजरना पड़ता है. श्रवण, भाषण, पठन और लेखन-इन्हीं के आधार पर भाषा प्रगति के पथ पर चलती है. साहित्य में भाव को लेकर अर्थ निकलता है, जबकि विज्ञान में अर्थ को लकर भाव निकलते हैं. उन्होंने कहा कि जब-जब भाषा के नियम टूटते हैं तो वह साहित्य बन जाता है.

Sanskrit Bharati Dehradunप्रशिक्षण वर्ग को सम्बोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि हरवन्त सिंह ने कहा कि संस्कृत भाषा विश्व की समस्त भाषाओं की जननी है. संस्कृत विश्व का जीवन है व संस्कृत से ही संस्कृति का जन्म होता है. उन्होंने कहा कि अन्य भाषाओं में शब्द कुछ और उच्चारण कुछ और होते हैं. किन्तु संस्कृत में शब्द और उच्चारण मन की अभिव्यक्ति है. हमारे देश की भाषा में क्रिया बाद में आती है जबकि अन्य भाषाओं में क्रिया पहले आती है.

इस अवसर पर प्रान्ताध्यक्ष डॉ. बुद्धदेव शर्मा ने संस्कृत भारती का विस्तृत परिचय करवाया. इस प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गये और आयोजन का समापन शान्ति पाठ के साथ किया गया.

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