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सिरीफोर्ट में छलका पाक-बांग्ला-अफगान से आए पीड़ितों का दर्द

विहिप व मोदी के प्रति व्यक्त की कृतज्ञता, अधिनियम का विरोध करने वालों को कोसा

नई दिल्ली. पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर हिन्दू, सिक्ख, जैन, ईसाई और बौद्ध शरणार्थियों को संबोधित करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि अब आपके दुख के बादल छंट गए हैं और आप भारत में इज्जत के साथ सिर ऊंचा करके रहो, भारत तुम्हारे साथ खड़ा है. इंद्रप्रस्थ विश्व हिन्दू परिषद द्वारा नागरिकता संशोधन अधिनियम पर संभ्रम से सच की ओर विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में कानून मंत्री ने कहा कि तीन पड़ोसी मुस्लिम देशों में गैर मुस्लिमों पर अमानवीय जुल्म ढाए गए. दुःखी हो कर वो भारत आए, इन लोगों को नागरिकता देने का विरोध और रोहिंग्या की चिंता कर रहे लोग विशुद्ध रूप से वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं. नागरिकता संशोधन अधिनियम किसी भारतीय नागरिक की नागरिकता नहीं छीन रहा है. लोकतंत्र में शांति पूर्ण प्रदर्शन और विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन भारत की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले को बख्शा नहीं जाएगा. विश्व हिन्दू परिषद शरणार्थियों के हितों और कल्याण में बरसों से लगी है. परिषद की जितनी प्रशंसा की जाए, कम है.

दिल्ली के सिरीफोर्ट सभागार में आयोजित कार्यक्रम में तीनों पड़ोसी देशों से आए शरणार्थी अपने परिवारों के साथ आए हुए थे. वे बीच बीच में ‘जय श्री राम’ और ‘मोदी है तो मुमकिन है’ के नारे लगा कर प्रसन्नता का प्रदर्शन कर रहे थे. कार्यक्रम में राष्ट्रीय नवजागरण की पाक्षिक पत्रिका ‘हिन्दू विश्व’ के ‘नागरिकता कानून’ विशेषांक का विमोचन भी किया गया.

विश्व हिन्दू परिषद के कार्याध्यक्ष एडवोकेट आलोक कुमार जी ने कहा कि तीन पड़ोसी मुस्लिम देशों से प्रताड़ित हो कर भारत आए शरणागतों को भारतीय नागरिकता देना अटल निर्णय है, इसको बदलेंगे नहीं. यदि इसका विरोध करने वालों ने हिंसा करने का मन बना ही लिया है तो भारत सरकार और समाज दोनों ही इसका सामना करने में सक्षम हैं. सीएए का विरोध करने वालों से, पाकिस्तान में ननकाना साहिब गुरुद्वारे की घटना का जिक्र करते हुए पूछा कि यदि पाकिस्तान की बिटिया जगजीत भारत में शरण मांगेगी तो तुम्हारा क्या जवाब होगा? कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शन करने वालों के घर उनका हाल चाल पूछने तो जाती हैं, लेकिन आज तक कभी पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए पीड़ित हिन्दू और सिक्ख शरणार्थी कैंपों में नहीं गयी?

विश्व हिन्दू परिषद के विश्व समन्वय विभाग को देखने वाले केंद्रीय मंत्री प्रशांत हरतालकर ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में गैर मुस्लिमों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहारों के दृष्टांत रखते हुए बताया कि अफगानिस्तान में अब केवल पांच सौ सिक्ख बचे हैं. उनको भी एक दिन भारत आना ही पड़ेगा. सभागार में उपस्थित सभी शरणार्थियों का अभिनंदन करते हुए उन्होंने कहा कि अब उन्हें नागरिकता का जो अधिकार मिला है, ये अपने साथ बहुत सारे कर्तव्य भी लेकर आया है. उन्हें भारत के प्रति अपना कर्तव्य भी निभाना है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इन्द्रेश कुमार जी ने गत 1500 वर्षों के इतिहास का वर्णन करते हुए कहा कि हमने विदेशों से आए अनेक धर्मावलम्वियों व मत-मतान्तर के लोगों को शरण, सहायता व सहोदर के भाव के साथ अंगीकार किया, किन्तु आज बड़ा दुर्भाग्य है कि कुछ लोग मात्र अपने राजनैतिक स्वार्थ सिद्धि के लिए पीड़ितों को न्याय देने का भी विरोध कर रहे हैं. भगवान उनको सद्बुद्धि प्रदान करे. सीएए को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान सहित किसी भी देश ने यह नहीं कहा कि हमारे यहां अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित नहीं किया जाता. इसके अलावा दुनियाभर के किसी भी यहूदी, क्रिस्चियन, मुस्लिम या बुद्धिस्ट देश ने यह नहीं कहा कि उक्त तीनों देशों के अल्पसंख्यकों को वे अपने यहां की नागरिकता देंगे. जबकि 50 से ज्यादा मुस्लिम,150 से ज्यादा क्रिस्चियन और यहूदी देश हैं. इसके अलावा 30 बुद्धिस्ट देश हैं. केवल भारत ने उन्हें नागरिकता देने का कानून बनाया है. इसकी दुनियाभर में तारीफ होनी चाहिए, जबकि कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शनों की आड़ में कोई हिंसक, अराजक, असंवैधानिक, अशिष्ट या राष्ट्रद्रोही व्यवहार करे तो भारत कदापि स्वीकार नहीं करेगा.

कार्यक्रम के प्रारम्भ में राजधानी दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले पाकिस्तानी, अफगानिस्तानी और बांग्लादेशी हिन्दू और सिक्ख परिवारों के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नागरिकता संशोधन अधिनियम के लिए तथा विश्व हिन्दू परिषद् को उनका संरक्षण, सुरक्षा व अनवरत रूप से हर मामले में सहायता देने हेतु कृतज्ञता व्यक्त की, साथ ही पाकिस्तानी अत्याचारों की अपनी दर्द भरी दास्तानें सुनाईं. दिल्ली के रोहिणी में रहने वाले राहुल ने कहा कि अब हमें कोई पाकिस्तानी ना कहे, हम हमेशा से हिन्दुस्तानी थे, हैं और रहेंगें. क्योंकि हमने पाकिस्तान मांगा ही नहीं था.

मजनूं का टीला में रहने वाले सोनादास ने कहा कि हम बहुत गरीब हैं और साथ ही हमने पाकिस्तान में बहुत जुल्म सहे, अब भारत सरकार की कृपा से नागरिकता मिल गयी तो सब दुख भूल जाएंगे. अफगानी सिक्खों की दीवान खालसा संस्था के अध्यक्ष मनोहर सिंह ने कहा कि अब हमारी पहचान भारतीय सिक्  के रूप में होगी, हमने और हमारे बच्चों ने दर दर की ठोकरें खाई हैं. निखिल भारत बंगाली समन्वय समिति के अध्यक्ष बिनय कुमार बिश्वास ने कहा कि बांग्लादेश में हिन्दू नारकीय जीवन जी रहे हैं. वहां विश्व हिन्दू परिषद एक पंजीकृत संस्था है और 64 जिलों में वीएचपी काम कर रही है. हिन्दुओं के तैंतीस करोड़ देवी देवता हैं, लेकिन हमारा तो एक ही देवता है प्रधानमंत्री. बलोचिस्तान और सिंध पाकिस्तान के ऐसे क्षेत्र हैं, जहां हिन्दुओं पर सबसे ज्यादा जुल्म ढाए जाते हैं.

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