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सीमा का सम्मान करना सीख गये हैं पड़ोसी देश : इंद्रेश कुमार

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Seema ka samman karya seekh gaye hein padosi desh- Indresh jiहोशियारपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अ.भा. कार्यकारिणी के सदस्य श्री इंद्रेश कुमार ने कहा है कि आज 60 साल बाद देखने को मिल रहा है कि हमारे देश की सीमाओं में घुसपैठ करने वाले हमारे पड़ोसी देश अब अपनी सीमा में रहना सीख रहे हैं. इससे देश का मान बढ़ा है. यह इसलिये संभव हो रहा है क्योंकि देश के आम नागरिक जागरूक हो रहे हैं और देश को एक मजबूत नेतृत्व मिला है.

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि बाहरी सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ हमें आज आतंरिक शत्रुओं से भी जागरूक होकर लडऩे की जरुरत है. इसके लिये जरूरी है कि एक राष्ट्र और एक जन की भावना को प्रबल किया जाये. यह तभी संभव है जब हर हाल में हमारा आपसी भाईचारा व देश की अखण्डता बनी रहे. उन्होंने यह भी कहा कि देश की एकता को अक्षुण्ण रखने के लिये अराजकता, अलगाववाद, आतंकवाद तथा हिंसा फैलाने वालों को आवश्यकता पड़ने पर दंड की नीति अपनाने से परहेज नहीं करना चाहिये.

001एक सवाल के जवाब में इंद्रेश जी ने कहा कि हमें एक देश एक जन की धारा में बहना होगा. अब देश में मातृ भाषा व हिन्दुस्थानी बनाकर जीने की संस्कृति शुरू हुई है. हमें कांसेप्ट ऑफ लेडी नहीं अपनाना है बल्कि हमें कांसेप्ट आफ मां, बेटी, बहन अपनाना है. कांसेप्ट ऑफ लैंड नहीं अपनाना है, कांसेप्ट ऑफ मदरलैंड अपनाना है. मगर हमने अभी तक कांसेप्ट ऑफ लेडी तथा कांसेप्ट ऑफ लैंड को अपनाया. जब हम सत्य को छोड़ कर गलत का साथ देते हैं तो अपराध जन्म लेता है. जब तक हम मां, बेटी और बहन का कांसेप्ट नहीं अपनाते तब तक महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को नहीं रोका जा सकता तथा जब तक हम कांसेप्ट ऑफ मदरलैंड नहीं अपनाते तब तक सीमाओं पर बाहरी मुल्क कब्जा करते ही रहेंगे.

उन्होंने कहा कि आज हमें अपनी सोच को देशहित में समर्पित करने की जरूरत है. किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके देश से होती है, उसकी जाति, भाषा या धर्म से नहीं. इसलिये सबसे पहले राष्ट्र होना चाहिये तथा हरेक को मन में राष्ट्रीयता की भावना का संचार करना होगा ताकि देश में बढ़ रही समस्याओं पर काबू पाया जा सके.

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