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सुभाष के सपनों को साकार करने के लिए बनाया गया नागरिकता संशोधन कानून

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वाराणसी. नागरिकता संशोधन कानून पर देशभर में मचे बवाल के बीच विशाल भारत संस्थान एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय पीठ, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित सुभाष महोत्सव के पहले दिन ‘नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के सपनों के भारत के निर्माण में नागरिकता संशोधन कानून की भूमिका’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया.

मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार, संघ विचारक विराग पचपोर, डॉ. इरफान अहमद शम्सी ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर, दीप प्रज्ज्वलन कर संगोष्ठी का शुभारम्भ किया. विशाल भारत संस्थान की आजाद हिन्द बटालियन ने इन्द्रेश कुमार जी को सलामी दी. पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों से आए मुस्लिम समुदाय के बुद्धिजीवियों ने इंद्रेश कुमार जी को सम्मानिचत किया.

कुंवर मोहम्मद नसीम रजा खाँ के 12 पीढ़ियों की वंशावली का विमोचन अतिथियों ने किया, कुंवर नसीम रजा की वंश परम्परा राजा खरसिंह से शुरू होती है जो बिहार के समहुता के सकरवार राजपूत थे. कुंवर नसीम रजा ने बताया कि कुंवर नवल सिंह उर्फ दीनदार खाँ की एक शाखा औरंगजेब के काल में मुसलमान हो गयी और दूसरी आज भी हिन्दू है. हमारे पूर्वज हिन्दू थे, इसमें छिपाने की कौन सी बात है, बल्कि हमें गर्व है.

मुख्य अतिथि इन्द्रेश कुमार जी ने नागरिकता संशोधन कानून के सम्मान के लिये मुस्लिम समुदाय को शपथ दिलायी. हम भारत के, हमारी जन्मभूमि भारत. इंद्रेश कुमार जी ने कहा कि ‘नागरिकता संशोधन कानून पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के जान माल धर्म की हिफाजत के लिए बना है. नागरिकता कानून से किसी भी भारतीय मुसलमान की नागरिकता नहीं जाएगी. इस बात की गारंटी है. जो लोग मुसलमानों को गुमराह कर रहे हैं, उनका मकसद मुसलमानों को भड़काकर हिंसा करवाना है, ताकि मुसलमान बदनाम हो, रोजी रोटी छिन जाए और मुसलमान हमेशा गरीब और लाचार बना रहे, कांग्रेस जैसे दल मुसलमानों को अपने ऊपर आश्रित कर उनका राजनैतिक लाभ उठा सकें. भारत का मुसलमान राष्ट्रभक्त है और उनका जवाब वो खुद ही देगा. सन् 1947 में पाकिस्तान नहीं था. दुनिया में 54 मुस्लिम देश हैं, किसी देश ने रोहिंग्या मुसलमानों को शरण देने की बात नहीं कही. भारत ने कहा – अल्पसंख्यकों को जो उत्पीड़न के शिकार हैं, उनको हम शरण देंगे. बांग्लादेश ने कहा कि हिन्दुस्तान के मुसलमान भ्रम में न रहें, उनके ऊपर जुल्म होता है तो उन्हें हम बांग्लादेश में घुसने नहीं देंगे. केवल दुनिया में एकमात्र देश भारत है, जिसमें मुसलमानों के 72 फिरके अमन चैन से रहते हैं. अल्पसंख्यक केवल हिन्दुस्तान में सुरक्षित हैं. नागरिकता संशोधन कानून नागरिकता देने का कानून है. पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, अल्पसंख्यकों पर जुल्म बन्द करो. दुनिया में हिन्दुस्तान वह देश है, जिसने आपको गांरटी दी है कि आप हिन्दुस्तानी थे हैं और रहेंगे.’

विशाल भारत संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि ‘दुनिया के हर व्यक्ति को अपने पूर्वजों के बारे में जानकारी रखनी चाहिये. नागरिकता हमारे पूर्वजों का उपहार है. नागरिकता कानून किसी भारतीय मुसलमान को बाहर जाने नहीं देगा और किसी पाकिस्तानी को भारत में आने नहीं देगा.’

पं. दीनदयाल उपाध्याय पीठ, काशी हिन्दू विशवविद्यालय के समन्वयक प्रो. श्याम कार्तिक मिश्रा ने कहा कि ‘नागरिकता संशोधन कानून अल्पसंख्यकों के अधिकारों को सुरक्षित करने वाला कानून है. वैश्विक स्तर पर इससे भारत का सम्मान बढ़ेगा. विश्वविद्यालय पड़ोसी देशों में धार्मिक आधार पर प्रताड़ित अल्पसंख्यकों पर रिपोर्ट तैयार करेगा और उसको संयुक्त राष्ट्र संघ को भेजेगा.’

उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद की प्रो. गीता रेड्डी के कहा कि ‘नागरिकता कानून किसी मुसलमान के पहचान पर प्रश्नचिन्ह नहीं खड़ा करता. यह कानून किसी को डराने के नहीं, बल्कि डरे हुए लोगों को डर से बचाने के लिये बना है.’

अध्यक्ष इतिहासकार प्रो, अशोक कुमार सिंह ने कहा कि ‘अन्य कोई भी देश अल्पसंख्यकों के अधिकार को लेकर चिन्तित है तो उसे भी ऐसे कानून लाने चाहिये. विरोध करने वालों का नाम इतिहास में देश के खिलाफ बगावत करने वालों में लिखा जाएगा.’

विराग पचपोर ने कहा कि ‘सदियों से रह रहे भारतीय खून, खानदान, पूर्वजों से एक हैं. उनको दुनिया का कोई कानून अलग नहीं कर सकता.’ मुस्लिम राष्ट्रीय मंच काशी प्रांत के संयोजक डॉ. इरफान अहमद शम्सी ने कहा कि ‘जब मुस्लिम फातिहा देता है तो अपने पीढ़ियों के सिलसिले को अल्लाह को बताता है तो फिर यहां बताने में क्या परेशानी है. मुसलमान बगावती न बनें, भारत के कानून का पूरी तरह सम्मान करें.’ संगोष्ठी का संचालन मो. फैज खान ने किया एवं धन्यवाद मो. अजहरूद्दीन ने दिया.

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