‘सेवांकुर’ – ‘एक सप्ताह देश के नाम’ संकल्प के साथ महाराष्ट्र के चिकित्सकों का दल चित्रकूट में दे रहा सेवाएं Reviewed by Momizat on . चित्रकूट. दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट एवं डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर वैद्यकीय प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित सेवांकुर – 2018 के तहत डॉ. हेडगेवार रूग्णालय औरंगाबाद एवं म चित्रकूट. दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट एवं डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर वैद्यकीय प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित सेवांकुर – 2018 के तहत डॉ. हेडगेवार रूग्णालय औरंगाबाद एवं म Rating: 0
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    ‘सेवांकुर’ – ‘एक सप्ताह देश के नाम’ संकल्प के साथ महाराष्ट्र के चिकित्सकों का दल चित्रकूट में दे रहा सेवाएं

    चित्रकूट. दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट एवं डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर वैद्यकीय प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित सेवांकुर – 2018 के तहत डॉ. हेडगेवार रूग्णालय औरंगाबाद एवं महाराष्ट्र के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के तीन सौ चिकित्सकों व मेडिकल विद्यार्थियों का दल चित्रकूट आया है. ‘एक सप्ताह देश के नाम’ संकल्प के साथ वे चित्रकूट में दीनदयाल शोध संस्थान के उद्यमिता विद्यापीठ परिसर में एक सप्ताह तक राष्ट्रऋषि नानाजी के समाजमूलक कार्यों का अवलोकन करने के साथ ही संस्थान के 108 स्वावलम्बन केन्द्रों पर रहेंगे, व निःशुल्क चिकित्सा शिविर का भी आयोजन करेंगे.

    सेवांकुर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन दीनदयाल परिसर चित्रकूट में किया गया. जिसमें अकोला के सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. सदानंद भुसारी जी ने कहा कि 20 वर्षों से सेवांकुर गतिविधि चल रही है, उसमें देशभर से कई वरिष्ठ चिकित्सकों का मार्गदर्शन मिलता है. उद्घाटन सत्र में विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की अ.भा. उपाध्यक्ष पद्मश्री निवेदिता रघुनाथ भिड़े दीदी, दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन जी, सेवा इंटरनेषनल यू.के से भरत भाई, नरेन्द्र भाई, दानजी भाई एवं बसंत पंडित प्रमुख रूप से मंचासीन रहे.

    इस अवसर पर दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन जी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय एवं राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख के जीवन वृत्त पर प्रकाश डाला और दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना से लेकर अब तक के सफर को विभिन्न संस्मरणों के माध्यम से सभी के समक्ष रखा.

    निवेदिता दीदी ने भारतीय जीवन पद्धति की विविधता पर कहा कि हम सब एक दूसरे के परस्परपूरक – परस्परावलम्बी है. हमारे अंदर का यही तत्व हमारी चैतन्यता का परिचायक है. उसी प्रकार, सारे विषयों में जो चैतन्य खड़ा है, एक ही चैतन्य अनेक रूपों से विभूषित है. यही इस पृथ्वी की विशेषता है. हमारे भारतीय जीवन का मूल आधार धर्म है. उस एकात्मता को धारण करना, आत्मीयता को धारण करना ही धर्म है. धर्म को साकार रूप में विद्यमान रूप में अगर देखना है तो वो भगवान श्रीराम के जीवन दर्शन से देखा जा सकता है. धर्म का पहला आधार ही आत्मीयता है.

    उद्घाटन सत्र के पश्चात् पूरे समूह को आरोग्यधाम में चल रही सभी स्वास्थ्य गतिविधियों एवं गोवंश विकास, अनुसंधान केन्द्र, फार्मेसी व हर्बल गार्डन का भ्रमण करवाया.

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