सेवा परमो धर्मः – दिव्यांग राज़ू ने 100 से अधिक परिवारों को एक माह का राशन बांटा Reviewed by Momizat on . जालंधर. रविवार को प्रसारित मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विभिन्न हिस्सों के कुछ उदाहरणों का जिक्र कर भारत में समाज के सेवा भाव को जालंधर. रविवार को प्रसारित मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विभिन्न हिस्सों के कुछ उदाहरणों का जिक्र कर भारत में समाज के सेवा भाव को Rating: 0
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    सेवा परमो धर्मः – दिव्यांग राज़ू ने 100 से अधिक परिवारों को एक माह का राशन बांटा

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    जालंधर. रविवार को प्रसारित मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विभिन्न हिस्सों के कुछ उदाहरणों का जिक्र कर भारत में समाज के सेवा भाव को बताया. उन्होंने कहा कि सेवा और त्याग भारत की जीवन पद्धति है.

    सेवा में सब कुछ समर्पित कर देने वाले लोगों की संख्या अनगिनत है. पंजाब के पठानकोट निवासी दिव्यांग राजू (45 वर्षीय) भी सेवा और त्याग का भी उनमें से एक अनुकरणीय उदाहरण है. संकट काल में राजू के सेवा भाव ने सभी का दिल जीता है. दिव्यांग राजू लॉकडाउन की अवधि में अभी तक 100 से अधिक परिवारों को एक माह का राशन बांट चुका है, साथ ही कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये 2500 मास्क वितरित कर चुका है.

    राजू बचपन से ही चलने-फिरने में असमर्थ है और मांगकर अपना निर्वाह करता है. रोजाना 500 से 700 रुपए एकत्रित होते हैं. खाने और खर्च के बाद कमाई का बाकी हिस्सा लोगों की सेवा पर खर्च करता है. रोजाना एकत्रित राशि में से कुछ राशि बचाकर एकत्रित करता है तथा उससे जरूरमंदों की सहायता करता है. लोगों को भी पता है कि उनका पैसा भलाई के काम में लगना है तो लोग राजू को खुले दिल से पैसे भी देते हैं. राजू दिव्यांग ही नहीं स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी प्रेरणा स्रोत है. राजू सेवा कार्य में अभी तक 80 हजार रुपये से अधिक की राशि खर्च कर चुके हैं. कोरोना संकट काल के दौरान राजू गरीब परिवारों की मदद में जुट गया. शहर के गरीब परिवारों के बारे में जानकारी हासिल की और उन्हें एक माह राशन उपलब्ध करवाया.

    राजू का कहना है कि लोग उसे बहुत पैसा देते हैं, वह पैसे जोड़ता है और मौका मिलते ही जरूरतमंदों पर खर्च कर देता हूं. जीते जी उसके अपनों ने उसे दूर रखा, कुछ नेकी कर लूंगा तो शायद आखिरी समय में लोगों के कंधे मिल सकें.

    यह पहली बार नहीं…..

    राजू पिछले 20 साल में 22 गरीब कन्याओं की शादी करवा चुका है. गर्मियों में छबील, भंडारा करवाता है. शहर में ढांगू रोड पर एक गली की पुली पर रोजाना हो रहे हादसों से तंग आकर राजू ने अपने पैसों से पुली का निर्माण करवाया.

    हर साल 15 अगस्त को महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई मशीनें उपलब्ध कराता है. सर्दियों में कंबल बांटना, कुछ बच्चों की फीस का खर्च उठाता है. कॉपी-किताब के लिए मदद करता है. राजू का कहना है कि यह सब मेरे अपने हैं. इनकी मदद कर मन को शांति मिलती है. यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में दिव्यांग राजू के कार्य की सराहना की.

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