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स्वदेशी जागरण मंच की गुडगाँव इकाई का उदघाटन

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Swadeshi Sangoshthiगुडगाँव. स्वदेशी जागरण मंच दिल्ली एनसीआर प्रान्त की योजनानुसार स्वदेशी संगोष्ठी का सफल आयोजन रविवार 7 सितंबर को जी.आई.ए हाउस महरौली रोड गुड़गांव में किया गया, जिसमें स्वदेशी जागरण मंच की गुड़गांव महानगर इकाई का औपचारिक उदघाटन किया गया.

कार्यक्रम में स्वदेशी जागरण मंच के दस बिन्दुओं में से चार बिन्दुओं शिक्षा, कृषि, जीएम फूडस पर चर्चा हुई. कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध पर्यावरणविद, शिक्षाविद डॉ. सर्वदानन्द आर्य ने की. दर्शकों से खचाखच भरे कार्यक्रम में बोलते हुये स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सहसंयोजक डॉ. अश्विनी कुमार महाजन ने कहा कि मंच की स्थापना के 24 वर्षो के बाद गुड़गांव महानगर का औपचारिक गठन हुआ हैं. उन्होंने स्वदेशी की विचारधारा को भारत कों जड़ो से जोड़ने वाली विचारधारा बताया और कहा कि सन् 1905 में अंग्रेजों के द्वारा बंग-भंग के खिलाफ स्वदेशी आन्दोलन का शंखनाद लाला लाजपत राय, बिपिन चन्द्र पाल और बाल गंगाधर तिलक के नेतृत्व में भारत में हुआ था और अंग्रेजो को बंगाल का विभाजन वापस लेना पड़ा. अगर आज स्वदेशी जागरण मंच के नेतृत्व में भारत की आम जनता विदेशी कम्पनियों के षड्यंत्रों के खिलाफ एकजुट नहीं हुई तो भारत फिर से विदेशी ताकतों का आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक रूप से गुलाम होता चला जायेगा.

Swadeshi Sangoshti--संगोष्ठी में पधारे प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक डॉ. कृष्णवीर चौधरी ने कृषि में भारतीयता का पक्ष रखते हुये पूर्व की राजनैतिक सरकारों के क्रियाकलापों पर चिंता प्रकट की. उन्होनें कहा कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के प्रभाव से देश में भारतीय पद्धति से कृषि करने का ज्ञान क्षीण हो गया हैं, आज आवश्यकता इस बात की है कि भारत के किसान भारतीय परम्परा से बनने वाली देशी खाद और देशी कीटनाशकों का पुनः प्रयोग करके भारतीय कृषि को अंग्रेजों के भारत में आने से पूर्व की भांति पोषक खाद्यान उत्पन करने की स्थिति में पहुंचायें.

भारतीय शिक्षा पर बोलते हुये इलाहाबाद से प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता योगेश सक्सेना ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की पुरजोर भर्तस्ना की और गुरूकुल पद्धति की अच्छाईयों पर प्रकाश डालते हुए शिक्षाविदों का उत्साह वर्धन कर उन्हें प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूलमंत्र एक ही है वह यह कि सुदामा नामक निर्धन और कृष्ण नामक धनवान एक साथ ग्रहण करें लेकिन आज की शिक्षा में बहुत असमानता हैं यह गरीब और अमीर का अन्तर बढ़ा रही है इसे तुरन्त समाप्त किया जाना चाहिये क्योंकि गुरूकुल पद्धति वाली शिक्षा ही भारत में भारतीयों का हित कर सकती है.

विशिष्ट अतिथि के तौर पर पधारे ख्याति प्राप्त भू-राजनीति विशेषज्ञ और खाद्य एवं पोषण सुरक्षा प्रबन्धन वैज्ञानिक डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने जीएम फूडस पर पूर्व की यूपीए सरकार की कड़ी आलोचना की. उन्होंने अमेरिकी कम्पनी मोनसैन्टों के बड़े षडयंत्र से सचेत करते हुए बताया कि भारत के किसानों के पास बीजों को संकलन करने की सर्वोत्तम परम्परा रही हैं लेकिन कुछ पूर्व की सरकारों कें छद्मवेषी राजनेता, विदेशी कंम्पनियों से रिश्वत लेकर देश की कृषि के लिये घातक बने हुये हैं.

अध्यक्ष के तौर पर डॉ. सर्वदानन्द आर्य जी ने स्वदेशी को भारत की आत्मा बताया, उन्होंने कहा कि हम 50 वर्ष पहले तक मौलिक रूप से स्वदेशी को जानते थें, मानते थें लेकिन कुछ भ्रष्ट और धृष्ट राजनेताओं ने आजादी के बाद से ही विदेशी वस्तुओं का अन्धानुकरण किया और देश के आम व्यक्ति को देश का नागरिक बनाने के बजाय विदेशी उपभोक्ता बना दिया.

कार्यक्रम में विषय प्रस्तावना स्वदेशी जागरण मंच के द्विप्रान्त संगठक व प्रचारक कमलजीत द्वारा की गयी. उन्होंने मंच की स्थापना से लेकर आज तक की प्रगति पर प्रकाश डाला तथा सभी दर्शकों से स्वदेशी का संकल्प लेने का वचन लिया. मंच संचालन दिल्ली एनसीआर प्रान्त के प्रभारी ओम कार सिंह ने किया. कार्यक्रम के स्वागताध्यक्ष प्रसिद्ध समाजसेवी एवं व्यवसायी वशिष्ट कुमार गोयल ने सभी मंचासीन व्यक्तियों का परिचय कराया और कार्यक्रम के निवेदक, निगम पार्षद व चैयरमैन राजेन्द्र यादव ने निवेदन प्रस्तुत किया स्वदेशी जागरण मंच के कार्यक्रम संयोजक पूर्णचन्द्र कथुरिया, महानगर संयोजक मुनीषराज गर्ग ने सभी अतिथियों का धन्यवाद किया. कार्यक्रम में प्रमोद मिश्रा, मयंक, दर्शन लाल, सर्वनन समेत सम्पूर्ण कार्यकारिणी उपस्थित थी.

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