हम ध्येय के लिए कार्य करते हैं, अपने स्वार्थ के लिए नहीं – डॉ. मोहन भागवत Reviewed by Momizat on . भारत का किसान, भारत को परम वैभव संपन्न बनाने में योगदान दे भारतीय किसान संघ के नवनिर्मित कार्यालय "किसान शक्ति" का लोकार्पण नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क भारत का किसान, भारत को परम वैभव संपन्न बनाने में योगदान दे भारतीय किसान संघ के नवनिर्मित कार्यालय "किसान शक्ति" का लोकार्पण नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क Rating: 0
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    हम ध्येय के लिए कार्य करते हैं, अपने स्वार्थ के लिए नहीं – डॉ. मोहन भागवत

    भारत का किसान, भारत को परम वैभव संपन्न बनाने में योगदान दे

    भारतीय किसान संघ के नवनिर्मित कार्यालय “किसान शक्ति” का लोकार्पण

    नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हम सब लोग ध्येय के लिए कार्य करते हैं, स्वार्थ के लिए नहीं करते. न अपना स्वार्थ है, न संगठन के लिए स्वार्थ है. भारत का किसान समर्थ हो, समस्या मुक्त हो. भारत का किसान भारत को परम वैभव संपन्न बनाने में योगदान दे. क्योंकि भारत के परम वैभव संपन्न होने से ही विश्व में शांति आएगी. इसलिए अब विश्व शांति के लिए भारत का परम वैभव संपन्न होना अनिवार्य हो गया है. ये हमारा ध्येय है, इसके लिए काम कर रहे हैं. काम करेंगे, हम बढ़ेंगे. हम एक ध्येय के लिए काम कर रहे हैं, ऐसा भाव रहता है.

    वे भारतीय किसान संघ के नवनिर्मित कार्यालय के लोकार्पण कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे. भारतीय किसान संघ के नवनिर्मित प्रशासनिक कार्यालय (नई दिल्ली) “किसान शक्ति” का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी की उपस्थिति में संपन्न हुआ.

    उन्होंने कहा कि साधन बनते हैं, साधनों का उपयोग जरूर करना चाहिए. पर, साधनों पर निर्भर रहने से गडबड़ होती है. साधनों का भरोसा नहीं है क्योंकि साधन परिस्थिति पर निर्भर करता है. साधन आते-जाते रहते हैं, ये तो समय की देन है. लेकिन साध्य अपना पक्का है और अपनी साधना पक्की है, साधक है तो बाकी सारी बातें होंगी.

    किसान संघ शुरू हुआ तो कोई साधन नहीं था, न ही कोई मान्यता थी. छोटे-छोटे प्रयोग हुए. संघ के स्वयंसेवक किसानों ने अपनी खेती में प्रयोग किया. तब कुछ ध्यान में आया. उसको लेकर काम शुरू किया. वहां से शुरू करके यहां तक आए हैं. साधनों के भरोसे हम नहीं आए, हम आए हैं अपनी साधना के भरोसे. यह साधना संगठन की साधना है, जोड़ने की साधना है. कार्य करने वाले हम साधक हैं. साधन हमारे स्वामी नहीं, हम साधनों के स्वामी बनेंगे.

    सरसंघचालक जी ने कहा कि हमारे जीवन का आधार संघर्ष नहीं समन्वय है, संवाद है, बंधुता है. हम संघर्ष भी करेंगे, उसमें से समन्वय, अपनापन भी स्थापित होगा. हम सब को ध्येय की राह पर चलना है. हमको कोई डिगा नहीं सकता है क्योंकि हम अपने मन से चल रहे हैं. हमारा कोई स्वार्थ नहीं है. किसी के भय के कारण काम नहीं कर रहे हैं. अपनी आत्म इच्छा से अपने-अपने विवेक से काम कर रहे हैं. सब साथ मिलकर चले और संगठन का ये कारवां बढ़ता रहे. इसलिए हमने कुछ नियम, विधि बनाकर स्वयं एक होकर स्वीकृत किया है. जिसके कारण किसानों में किसान संगठन के नाते पवित्रता और स्वच्छता है, उसका दर्शन कार्यालय में होना चाहिए. जिसका दर्शन किसान संघ कार्यालय में होता है.

    उन्होंने कहा कि अभी जो समस्या मानव जाति के सामने है. उनका ठीक से उत्तर देने वाला समाज और समाज को खिलाने वाला, बनाने वाला, अपना पूरा योगदान देने वाले किसान को संघ ही खड़ा करेगा. ये बात हम अभिमान के साथ नहीं कह रहे हैं. अभी अपना समाज तैयार नहीं है. उसको तैयार करने लिए संघ को कर्य करना पड़ेगा. तैयार हो जाने के बाद हम कह सकते हैं कि हमारा समाज कर सकता है. इस प्रकार का वातावरण खड़ा करने वाला भारत और भारत का किसान स्वयं को बलशाली बनाकर भारत को बलशाली बनाने में सहयोग करे. ऐसा संघ का विचार है, इसीलिए हम करेंगे, हम जीएंगे..

    मोहन भागवत जी ने कहा कि संगठन में ध्येय निष्ठा है, अनुशासन में रहकर चलता है. एक अनुशासन अपने संगठन का है. एक अनुशासन अपने देश के तंत्र का है. एक अनुशासन मानव हित का है. ये तीनों अनुशासनों का समन्वय से सुसंगत का पालन करके हम आगे बढ़ते हैं. ये बात उतनी ही महत्ववपूर्ण है क्योंकि हमको समस्या ही नहीं सुलझाना, समस्या के लिए किसान को कैसा बनना पड़ता है, इसका उदाहरण भी हमको ही बनना पड़ता है.

     

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