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    हाईटेक संघ – ई-शाखा, परिवार शाखा के बाद अब ई-बाल शिविर

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    देशभर में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित हो रहे कार्यक्रम

    राजेश दत्त

    हरियाणा. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समय के साथ अपनी कार्यप्रणाली में परिवर्तन करता रहता है, परिस्थिति कोई भी हो कार्य की गति को निरंतर बनाए रखने के लिए संघ मार्ग तलाश लेता है तथा नित्य नए-नए प्रयोग भी करता रहता है. एक ओर जहां कोरोना की महामारी ने समस्त विश्व की रफ्तार को रोक दिया है. महामारी के कारण पूरा विश्व चिंतित है. लेकिन संघ के कार्य की गति नहीं थमी है. संकट की स्थिति में स्वयंसेवक देशभर में जरूरतमंदों की सेवा में जुटे हुए हैं. तो दूसरी ओर शाखाएं भी निरंतर लग रही हैं.

    देश में घोषित लॉकडाउन के चलते प्रतिदिन लगने वाली शाखाओं को सुचारु रखने के लिए ई-शाखा (वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से) का प्रयोग शुरू किया, साथ ही परिवार शाखा का भी सफल प्रयोग किया. और अब उत्सव, कार्यक्रम, शिविरों का आयोजन भी हाईटेक रूप में हो रहा है. कार्यक्रम वैसे ही होते हैं, अंतर केवल इतना है कि मैदान सामूहिक कार्यक्रम होते हैं, और ई शाखा या शिविर में अकेले अपने-अपने घर पर सभी के साथ.

    इसी कड़ी में हरियाणा में 11 अप्रैल प्रातः 8.00 बजे से 14 अप्रैल 12.30 बजे तक ई-बाल शिविर का आयोजन किया गया. जिसमें 27 जिलों के 90 नगर, 122 खंडों से 3516 पंजीकरण हुए. शिविर के दौरान 11 विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ. प्रतियोगतिओं के लिए 2500 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं. शिवि के संचालन के लिए 300 कार्यकर्ता लगे थे.

    शिविर के समापन समारोह में मुख्य अतिथि प्रतिष्ठित पहलवान योगेश्वर दत्त रहे. प्रांत प्रचारक विजय जी ने प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को शुभकामनाएं प्रदान कीं. उन्होंने कहा कि भारतीय घरों में सदियों से अपने सुसंस्कृत तरीके से रसोई बनती चली आई है. किंतु चीन में धरती पर मनुष्य को छोड़कर, आसमान में उड़ने वालों में हवाई जहाज छोड़ कर तथा समुद्र में पानी के जहाज को छोड़कर बाकी सभी कुछ खा जाने की परंपरा रही है. उनके इस अजीब खानपान के व्यवहार के कारण ही यह कोरोना वायरस पूरे विश्व में फैला है. भारतवासियों की दिनचर्या में योग, ध्यान शामिल है. यहां स्वच्छता को महत्व तथा पर्यावरण की शुद्धता को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां वन्यजीवों एवं अन्य पशु-पक्षियों की भी चिंता की जाती है. इसीलिए हमारे यहां ऐसी बीमारियां नहीं फैलती.

    दिल्ली में स्वयंसेवकों ने ई शाखाएं शुरू की हैं, अधिकांश शाखाएं तकनीक का उपयोग करते हुए लग रही हैं. 14 अप्रैल को दिल्ली में 650 शाखाओं में बाबा साहेब आम्बेडकर की जयंती मनाई गई. दिल्ली में 11दद से अधिक ई शाखाएं तथा 250 से अधिक परिवार शाखाएं चल रही हैं. इसी प्रकार परिवार प्रबोधन गतिविधि के तहत तकनीक का उपयोग कर आयोजित कार्यक्रम में दो हजार से अधिक परिवार सहभागी हुए थे. हिमाचल में परिवार शाखा का प्रयोग चल रहा है, हिमाचल में 800 से अधिक परिवार शाखाएं चल रही हैं, जिसमें परिवार के सभी सदस्य एक साथ शाखा लगाते हैं.

    कर्नाटक में ई शाखा का कंसेप्ट काफी समय से चल रहा है, आईटी क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए ई शाखा (ऐप के माध्यम से) का प्रयोग संघ के स्वयंसेवकों ने लगभग तीन साल पहले किया था. कोरोना संकट के समय स्वयंसेवकों ने बड़ी तेजी के साथ इस कंसेप्ट को लागू किया है.

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