हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले में सामूहिक कन्या पूजन Reviewed by Momizat on . उड़ीसा (विसंकें). चार दिवसीय हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला में सामूहिक कन्या पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें 500 कन्याओं का 500 बच्चों ने वैदिक रीति के उड़ीसा (विसंकें). चार दिवसीय हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला में सामूहिक कन्या पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें 500 कन्याओं का 500 बच्चों ने वैदिक रीति के Rating: 0
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    हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले में सामूहिक कन्या पूजन

    उड़ीसा (विसंकें). चार दिवसीय हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला में सामूहिक कन्या पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें 500 कन्याओं का 500 बच्चों ने वैदिक रीति के अनुसार पूजन किया. मंत्रोच्चार एवं हुलहुली ध्वनि के बीच कन्याओं की आरती उतारी तथा मिठाई खिलाकर अनुष्ठान का समापन हुआ. सामूहिक कन्या पूजन अनुष्ठान को देखने के लिए काफी संख्या में लोग उपस्थित थे. आइएमसीटी के कार्यकारी अध्यक्ष मुरली मनोहर शर्मा जी ने कहा कि कन्या पूजन की परंपरा भारत में काफी पुरानी है, जो अब लुप्त हो गई है. इसे पुन: प्रचलन में लाने एवं कन्या पूजन के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से कन्या पूजन जरूरी है. इतनी संख्या में बच्चों का यहां पहुंचना इस बात को दर्शाता है कि हम यदि मेहनत करें तो अपनी परंपरा को पुनर्जीवित कर सकते है. इस आयोजन में देव प्रसाद मिश्र एवं आइएमसीटी की टीम ने सहयोग किया.

    500 छात्र-छात्राओं ने गुरु वंदना में भाग लिया

    राजधानी स्थित प्रदर्शनी मैदान में आयोजित हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला लोगों के आकर्षण केंद्र रहा. इनिशिएटिव फॉर मॉरल एंड कल्चरल ट्रेनिंग (आइएमसीटी) फाउंडेशन की ओर से आयोजित मेले में गुरुवार को सुबह आचार्य वंदना कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें 500 छात्र-छात्राओं ने पंडित विश्वनाथ रथ जी की उपस्थिति में अपने-अपने आचार्य की पूजा-अर्चना की.

    मेला परिसर में गो नाशिका, पर्वत एवं पेड़ों की सुरक्षा, जल संरक्षण आदि की आकर्षक झांकी लोगों का ध्यान खींचती रही. इसके अलावा 160 सामाजिक संगठनों की ओर से लगाए स्टॉलों पर विभिन्न प्रकार की देशी औषधि, उपचार आदि की जानकारी दी जा रही है. शाम के समय विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने आध्यात्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये और भारतीय संस्कृति व संस्कारों के प्रति प्रेरित किया. फाउंडेशन के कार्यकारी अध्यक्ष मुरली मनोहर शर्मा जी ने बताया कि भारत में गुरु को भगवान से भी बड़ा माना जाता है, मगर आज के बदलते समाज में यह परंपरा समाप्त होती जा रही है. इस महत्व को भारतीय समाज में पुन: स्थापित करने सहित बच्चों को संस्कारी बनाना, माता-पिता का आदर व सम्मान करना सिखाना, गुरु का सम्मान करना, जल, जीवजंतु के महत्व एवं उसके संरक्षण के लिए प्रेरित करना मेले का मकसद है. इस दौरान बतौर मुख्य अतिथि संस्कृत के विद्वान प्रो. डॉ. प्रफुल्ल मिश्र जी, सेंट्रल यूनिवर्सिटी के उपकुलपति प्रो. डॉ. आदित्य महांती जी, गुणवंत कोठारी जी, अध्यक्ष मनोरंजन महापात्र जी उपस्थित थे.

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