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हिन्दू समाज की शक्ति विध्वंसक नहीं, रचनात्मक है – भय्याजी जोशी

इस देश के सभी संतों ने परहित का संदेश दिया है – भय्याजी जोशी

पनवेल, मुंबई (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश (भय्या जी) जोशी ने कहा कि “खुद को प्रबुद्धजन दर्शाकर समाज में संघर्ष उत्पन्न करने वाली कुछ शक्तियाँ दुर्भाग्य से कार्यरत हैं. अपने स्वार्थ के लिए यह लोग न्याय व्यवस्था, न्यायाधीशों पर आरोप लगाते समय कुछ सोचते नहीं. विश्‍वविद्यालय में लगाए गए भारत तेरे टुकटे होंगे के नारे लगाना, आतंकवादियों का उदात्तीकरण यह शहरी माओवाद की ही नीति है”. सरकार्यवाह जी पनवेल (मुंबई) में आयोजित विजयादशमी उत्सव में स्वयंसेवकों को संबोधित कर रहे थे. उत्सव में खारघर के पोल फाऊंडेशन के संचालक उपस्थित रहे. कोकण सह प्रांत कार्यवाह विठ्ठलराव कांबले सहित अन्य उपस्थित रहे.

सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने शहरी माओवाद, उच्चतम न्यायालय का आदेश, चुनाव में ‘नोटा’ का उपयोग आदि विषयों पर विचार रखे. कला, साहित्य, चित्रपट, राजनीती, क्रीड़ा, उद्यम, समाजसेवा आदि क्षेत्रों में कार्यरत प्रबुद्धजनों को दृष्टिकोण देने की आवश्यकता प्रकट की. “हिन्दू समाज की शक्ति विध्वंसक नहीं, बल्की रचनात्मक है. इस देश के सभी संतों ने परहित का संदेश दिया है”.

उन्होंने कहा कि “विश्‍वभर की सभी शासन व्यवस्थाओं में गणतंत्र यह सर्वोत्तम व्यवस्था है. परंतु, जीवित रहने के लिये समाज के हर एक व्यक्ति का जागरूक होना अनिवार्य है. गणतंत्र में ‘सब लोग गलत हैं’ ऐसा नहीं कह सकते. उपलब्ध पर्यायों में से योग्य व्यक्ति को चुनना चाहिए. ‘नोटा’ का पर्याय चुनना यह ‘सब लोग गलत हैं’, इसका समर्थन करता है. यह विचार गणतंत्र के लिये उपयुक्त नहीं.” “जीवन में परिश्रम करके धन प्राप्ति करना उचित है. मात्र, समाज के उत्थान के लिये उसका उपयोग होना भी आवश्यक है. इसलिये केवल प्रश्‍न न पूछते हुए, नकारात्मक वातावरण की निर्मिति न करते हुए प्रबुद्धजनों का मिलकर राष्ट्रहित के लिये रचनात्मक कार्य करते रहना भी आवश्यक है.”

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