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ग़रीबों के बीच चल रहा धर्मान्तरण का कुचक्र

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शिवपुरी (विसंके). जिले के सबसे पिछड़े क्षेत्र खनियाधाना में विगत अनेक वर्षों से धर्मान्तरण का कुचक्र चलने की घटना सामने आई है. वहीं इस प्रकार के गंभीर मामले में प्रशासनिक उदासीनता भी प्रकाश में आई है. लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व बुकर्रा निवासी तुलाराम जाटव ने जब मुसलमान बन जाने का निर्णय किया तो उसकी पत्नी नाराज होकर अपने मायके हसर्रा चली गई  तथा उसने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसका पति उसे भी जबरन मुसलमान बन जाने को विवश कर रहा है. उसने यह भी बताया कि ग्राम छिरवाहा में भी इसी प्रकार की घटनायें हो रही हैं.

स्मरणीय है कि मध्यप्रदेश में लागू धर्म परिवर्तन अधिनियम के अंतर्गत धर्मांतरण से पूर्व प्रशासनिक सहमति लेना अनिवार्य है तथा बिना अनुमति धर्मान्तरण दंडनीय अपराध है. इसी प्रकार, किसी को भय व प्रलोभन से धर्मान्तरण हेतु प्रेरित करना भी अपराध माना गया है. अतः खनियाधाना तहसील के बुकर्रा व छिर्वाहा ग्राम के कुछ लोगों के मुसलमान बन जाने की शिकायत पर स्थानीय पुलिस ने कलेक्टर शिवपुरी से ऐसे लोगों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध करने की अनुमति मांगी.

छिरवाहा निवासी मनीराम तथा बुकर्रा निवासी तुलाराम को जैसे ही इस बाबत जानकारी मिली, दोनों ने प्रशासन के समक्ष शपथ-पत्र प्रस्तुत किया कि वे अब अपने मूल धर्म में वापस आ गये हैं. किन्तु तब तक जिलाधिकारी की अनुमति आ जाने के कारण इन लोगों का मामला पंजीबद्ध हो चुका था. इससे नाराज होकर दोनों ने अपने पूरे परिवार के साथ मुस्लिम बन जाने की घोषणा की तथा गत 2 सितम्बर को इस संबंध में जिलाधिकारी को आवेदन देने लग्जरी कारों से शिवपुरी आ धमके. शिवपुरी में भाजपा तथा स्थानीय विहिप कार्यकर्ताओं ने इन लोगों को एक तरफ तो समझाने-बुझाने का प्रयत्न किया. वहीं, दूसरी ओर प्रशासन से इन लोगों को बरगलाने वालों को चिन्हित कर कार्रवाई करने का आग्रह भी किया. इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि इन गरीब लोगों को शिवपुरी आने के लिये लग्जरी वाहन किसने उपलब्ध कराये.

इस सम्पूर्ण प्रकरण में कुछ अन्य विशेष घटनायें भी उल्लेखनीय हैं. छिरवाहा निवासी मनीराम के पुत्र केशव ने चार वर्ष पूर्व हिन्दू धर्म छोड़कर मुस्लिम मत अपना लिया था. केशव से कासिम बने इस नवयुवक को इसके बदले खनियाधाना में एक दुकान दी गई थी. इसके बाद उसके माता पिता ने भी अपना धर्म परिवर्तन कर लिया. तथा बुकर्रा निवासी अपने रिश्तेदार तुलाराम को भी मुसलमान बन जाने को तैयार किया. पिछले दिनों एक समुद्रपारीय वार्तालाप का मामला गर्माया था मगर उस समय पुलिस ने इसे अनदेखा कर दिया था. जांच का विषय यह भी है कि धर्मांतरण का यह खेल पिछले कई सालों से खेला जा रहा है मगर अब तक प्रशासन इससे अनभिज्ञ क्यों बना रहा.

खनियाधाना क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय द्वारा धन का लालच देकर धर्मपरिवर्तन कराने का समाचार दैनिक स्वदेश ने प्रमुखता से प्रकाशित किया. 31 अगस्त के दैनिक स्वदेश के अनुसार धर्म परिवर्तन का मामला तब उजागर हुआ जब धर्म परिवर्तन करने वाले एक व्यक्ति को निर्धारित पैसा नहीं दिया गया. शपथ पत्र थाने में देकर उसने पुनः अपना धर्म वापस अपनाने की बात कही. धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों के विरुद्ध तो मामला दर्ज कर लिया गया, लेकिन धर्म परिवर्तन कराने वाले रैकेट में शामिल लोगों के विरुद्ध कोई वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई, जिससे क्षेत्र के लोगों में रोष व्याप्त है. धर्म परिवर्तन कराने के लिये गरीब लोगों को लाखों रुपये दिये जाते हैं, लेकिन प्रशासन में बैठे शासकीय प्रतिनिधियों द्वारा कभी भी इस तथ्य को जानने का प्रयास नहीं किया गया कि धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को दिया जाने वाला धन आता कहाँ से है, तथा वे लोग कौन हैं जो इस कृत्य में संलिप्त हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार इस सम्पूर्ण प्रकरण में खनियाधाना निवासी नीलू पुत्र वहीदुल हक़ कुरैशी, बिलाल पुत्र इनायत अली “फूल”, तथा मुन्नाखान अकाझिरी बाले का नाम सामने आया है.

धर्म परिवर्तन मामले में 9 पर मुकदमा

कलेक्टोरेट में मंगलवार को धर्म परिवर्तन को पहुंचे तुलाराम समेत सभी 9 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया और मुकदमा दर्ज कर लिया है. अब पुलिस इस मामले की जांच में जुटी हुई है.

हिरासत में लिए गये आरोपियों में मनीराम उर्फ अब्दुल्ला की पत्नी मक्खो (अमीना), समरथ (शाहिद) व उसकी पत्नी साबी (फरजाना) व बेटा सरदार (इल्यास), प्रीतम की पत्नी गीता (जयनम), अनरथ (उस्मान) व उसकी पत्नी राजो (शकीना), तुलाराम (अब्दुल करीम) पर केस दर्ज कर जमानत पर रिहा कर दिया. सभी आरोपियों से पुलिस देर रात तक पूछताछ करती रही.

तुलाराम की पत्नी का सम्मान

इस मामले में तुलाराम की पत्नी लीला ने अपने पति का साथ न देते हुए धर्म परिवर्तन करने से इनकार कर दिया था. बुधवार को खनियाधाना थाने का पूरा स्टाफ गांव पहुंचा और लीला का सम्मान किया. टीआई योगेंद्र प्रतापसिंह जादौन से लीला से राखी बंधवाकर उसे साड़ी भेंट की. साथ पहुंचे स्टाफ ने भी लीला के पैर छूकर उसका सम्मान किया और उसे बहन का दर्जा दिया.

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