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निधि समर्पण – 11 साल की भाविका रामकथा कर जुटा रहीं श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए राशि

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सूरत. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण में सभी अपनी तरह से योगदान दे रहे हैं. इसी क्रम में सूरत की 11 वर्ष की बेटी रामकथा के माध्यम से श्रीराम मंदिर निर्माण में सहयोग के लिए लोगों को प्रेरित कर रही हैं. भाविका राम कथा का वाचन करती हैं. अब तक उन्होंने चार स्थानों पर रामकथा का वाचन किया है और इससे प्राप्त 50 लाख रु की राशि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए समर्पित की है.

भाविका ने कोरोना संकट में लगे लॉकडाउन के दौरान ही राम मंदिर के लिए राशि जुटाने का निर्णय लिया था. इसके लिए लॉकडाउन के दौरान अध्ययन किया और अब राम कथा कर राशि जुटा रही हैं. भाविका कहती हैं कि रामायण का पाठ करने के दौरान ही उन्हें भगवान राम की महानता के बारे में पता चला. इसी के चलते उन्होंने प्रण लिया कि वे स्वयं मंदिर निर्माण के लिए समर्पण निधि जुटाएंगी.

भाविका अब तक 4 रामकथा कर चुकी हैं. इसमें उन्होंने करीब 50 लाख रुपये जमा कर लिए हैं. ये राशि श्रीराम मंदिर निधि कोष में जमा भी करा चुकी हैं. श्रीराम मंदिर का निर्माण होने तक उनका यह सफर जारी रहेगा.

व्यासपीठ पर बैठकर जब भाविका रामकथा सुनाती हैं तो लोग उन्हें सुनते ही रह जाते हैं. इतनी छोटी उम्र में रामकथा करने का यह शायद देश में पहला ही मामला है. भाविका छठी कक्षा की छात्रा हैं.

राम मंदिर भारत का राष्ट्र मंदिर है – भाविका

भक्तों को संबोधित करते हुए 11 वर्षीय बाल व्यास भाविका कहती हैं कि राम मंदिर भारत का राष्ट्र मंदिर है. भारत की आत्मा भगवान राम में बसती है. आज ऐसी स्थिति में जहां सामाजिक संरचना बिखरती जा रही है तो ऐसे में केवल रामायण ही हमें सही दिशा दिखा सकती है. रामायण के 7 कांड मानव जीवन की प्रगति की सात सीढ़ियां हैं. इसके वाचन और पालन से मनुष्य सुखी जीवन जी सकता है.

आज बच्चे भारतीय संस्कृति से दूर जा रहे हैं और पश्चिमी संस्कृति का अनुकरण कर रहे हैं. इसी के चलते अपराध भी बढ़ रहे हैं. लेकिन, रामायण की बातों को आत्मसात कर हम अपना जीवन बदल सकते हैं. रामायण केवल धर्मग्रंथ ही नहीं है, बल्कि यह सामाजिक शांति और नैतिक शांति का महाकाव्य है.

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