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22 साल से फरार कुख्यात सलीम पतला गिरफ्तार

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मेरठ(विसंके). देश को हिलाकर रख देने वाले मेरठ के हाशिमपुरा दंगे के बाद पीएसी के कैंप पर बम फेंकने की वारदात में मुख्य आरोपी सलीम पतला 22 साल बाद गुरुवार, 30 अक्टूबर की रात एटीएस के हत्थे चढ़ गया. गिरफ्तारी के बाद उसे खतौली पुलिस की अभिरक्षा में दिया गया है. सलीम पतला के पीछे सिविल पुलिस के अलावा एसटीएफ और एटीएस की टीम पिछले दो दशक से लगी हुई थी.

मेरठ में हाशिमपुरा दंगे के बाद सुरक्षा की दृष्टि से हापुड़ अड्डे के पास इमलियान के सामने 41वीं वाहिनी पीएसी का कैंप लगा था. इस कैंप पर सलीम पतला ने अपने साथियों के साथ 26 जनवरी 1993 को बम फेंक दिया था, जिसमें गाजियाबाद के हवलदार समेत दो जवान शहीद हो गए थे और दो जवान घायल हुये थे. वारदात को अंजाम देने के बाद सलीम पतला फरार हो गया था. उस पर शासन ने भारी इनाम राशि घोषित किया था. बाद में अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था. इस मामले में उसके साथियों को उम्रकैद की सजा हुई थी. गुरुवार की रात एटीएस और खतौली पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से सलीम पतला को घेराबंदी के बाद गिरफ्तार कर लिया. पतला को एटीएस की टीम ने खतौली पुलिस के हवाले कर दिया है. बताया जाता है कि सलीम की क्षेत्र में ही लोकेशन मिलने के बाद एटीएस की टीम पिछले एक माह से उसके पीछे लगी थी. देर रात तक एटीएस व पुलिस के अधिकारी गिरफ्तारी की पुष्टि तो करते रहे लेकिन और कोई जानकारी देने से बचते रहे.

आईजी जोन मेरठ आलोक शर्मा ने बताया कि एटीएस की टीम ने सलीम पतला को खतौली से गिरफ्तार कर लिया है. सलीम पर पीएसी की 41 वाहिनी पर बम फेंकने का आरोप है. पुलिस की टीम उसकी 1993 से तलाश कर रही थी. उसका दाखिला खतौली थाने में किया जा रहा है.

टुंडा का चेला है सलीम

बताया जाता है कि सलीम को बम बनाने की ट्रेनिंग पिलखुवा निवासी आतंकवादी अब्दुल करीम टुंडा ने ही दी थी. इसके बाद सलीम ने मेरठ समेत देशभर में कई ब्लॉस्ट की घटनाओं को अंजाम दिया. गत वर्ष टुंडा के पकड़े जाने के बाद सलीम की तलाश भी तेज कर दी गई थी.

यूपी में आइएसआइ का मुखबिर है सलीम पतला

लश्कर और इंडियन मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों से जुड़ा आतंकी सलीम पतला आइएसआइ के लिए उप्र में बतौर मुखबिर काम कर रहा था. कश्मीर से लेकर दिल्ली और यूपी के ज्यादातर शहरों की भौगोलिक स्थिति से वाकिफ सलीम की जिम्मेदारी बाहर से आने वाले आतंकियों को छिपने के लिये सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराने की थी. किसी भी वारदात को अंजाम देने के लिये सलीम ही ज्यादातर जानकारी देता था. इस बाबत कई सबूत भी एटीएस के हाथ लगे हैं.

बिजनौर ब्लास्ट से भी सलीम पतला का कनेक्शन

बिजनौर में आतंकियों के ठिकाने पर हुए धमाके से भी सलीम पतला का कनेक्शन जुड़ रहा है. पुलिस सूत्रों की मानें तो बिजनौर में एटीएस को आतंकियों का जो सिम बरामद हुआ था, उसी सिम से सलीम को कॉल की गई थी. इसके बाद ही एटीएस सलीम की लोकेशन ट्रेस कर सकी और गिरफ्तारी संभव हुई.

12 सितंबर को बिजनौर के मोहल्ला जाटान में सिमी आतंकियों के ठिकाने पर हुए बम धमाके के बाद एटीएस और देश की तमाम जांच एजेंसियों के रडार पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश आ गया था. खास नजर बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मेरठ और सहारनपुर पर थी. एटीएस सूत्रों के अनुसार आतंकियों के ठिकाने से जो सिम बरामद हुए थे, उससे आतंकी सलीम के फोन पर कॉल की गई थी. काफी छानबीन के बाद एटीएस टीम को आरोपी सलीम की लोकेशन मिल गई और गुरुवार रात दबोच लिया गया. सलीम की योजनाओं और बिजनौर के आतंकियों द्वारा बम बनाने की बात की पुष्टि होने के बाद यह साफ हो चला है कि दोनों घटनाओं में संबंध है. ऐसी भी संभावना है कि आतंकी सलीम इन्हीं आतंकियों से धमाके के लिये बम लेने वाला हो. इस बात की आशंका के कारण एटीएस ने फरार आतंकियों की जानकारी के लिये भी सलीम से पूछताछ की.

आतंक के बियावान में बिछे हैं कई हसीन जाल

खतौली से आतंकी सलीम पतला की गिरफ्तारी से पहले भी यहां आइएसआइ और अन्य आतंकी संगठनों के एजेंट की गिरफ्तारी हो चुकी है. खतौली की ही रहने वाली सुरैया इससे पूर्व आइएसआइ के लिए काम करने के आरोप में पकड़ी गई थी. इसके अलावा हाल ही में बिजनौर में भी आतंकियों के ठिकाने पर हुए विस्फोट के बाद दो महिलाओं की संदिग्ध भूमिका सामने आई थी.

पुलिस रिकार्ड के अनुसार खतौली निवासी सुरैया पुत्री लियाकत का निकाह मेरठ के उलधन गांव में हुआ था. लियाकत की बहन अनवरी पाकिस्तान के कराची में रहती थी. इसलिए सुरैया का पाकिस्तान आना-जाना था. वहीं पाकिस्तान में सुरैया का संपर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ के अधिकारियों से हुआ. सुरैया को उन्होंने ट्रेनिंग दी और इसके बाद सुरैया कपड़ों की गठरी में हवाला का रुपया और हथियार लाने भारत में लाने लगी.

पुलिस ने सुरैया को 1997 में गिरफ्तार किया और खतौली थाने में उसके खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 252ध्97 दर्ज किया गया. बाद में सुरैया जमानत पर रिहा हुई और पति से तलाक के बाद अंडरग्राउंड हो गई. कुछ समय बाद पता चला कि सुरैया गाजियाबाद में एक मकान में रह रही है और वहां संदिग्ध लोगों का आना-जाना है. खुफिया विभाग की टीम ने सुरैया की तलाश में दबिश भी दी, लेकिन वह फिर फरार हो गई.

इसके अलावा दिल्ली पुलिस की टीम ने वर्ष 2004 में सहारनपुर से पाकिस्तानी महिला एजेंट जहांआरा को भी गिरफ्तार किया था. वहीं मुजफ्फरनगर की शकीला को का नाम भी आतंकी गतिविधियों में सामने आया था. इतना ही नहीं हाल ही में बिजनौर में आतंकियों के ठिकाने पर हुए विस्फोट के बाद भी दो महिलाओं की आतंकियों के साथ शमिल होने की बात सामने आई थी. इन दोनों महिलाओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. सूत्रों की मानें तो अकेले वेस्ट यूपी में ही दर्जन भर के आसपास ऐसी महिलाएं एजेंट है जो आइएसआइ के लिए सक्रिय रूप से काम करती है.

फोटो युक्त मतदाता पहचान पत्र फर्जी

आतंकी सलीम के पास से बरामद मतदाता पहचान पत्र वर्ष1995 में जारी हुआ था. इसके जारी होने की तिथि से स्पष्ट हो गया है कि मेरठ से फरार होते ही सलीम मुरादाबाद आकर एकता विहार में रहने लगा था. वर्ष 1995 में ही फोटो युक्त पहचान पत्र बनने का काम शुरू हुआ था. उसी दौरान आतंकी पतला ने पहचान पत्र बनवाया था. पहले एकता विहार कालोनी मुरादाबाद देहात क्रमांक संख्या 34 में थी जो अब 27 में है. जो पहचान पत्र मिला है, उसका रिकार्ड जिला निर्वाचन कार्यालय में नहीं हैं. जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा सलीम और मेवाराम के फोटो युक्त पहचान पत्र के बारे में जानकारी एकत्र करना शुरू कर दिया गया है. आतंकी सलीम पतला के पास से बरामद पहचान पत्र मेवाराम के नाम से मिला है, पर उस पर फोटो सलीम का ही है. उप जिला निर्वाचन अधिकारी महेंद्र वर्मा ने बताया कि फोटो युक्त पहचान पत्र परीक्षण के लिये आयेगा तो जांच करायेंगे.

सलीम का बेटा भी आतंकी गतिविधियों में शामिल?

एटीएस के हत्थे चढ़े आतंकी सलीम पतला के जुर्म की कालख से उसका बेटा भी नहीं बच सका. पूछताछ में पता चला कि सलीम के साथ मुरादाबाद में उसका बेटा दानिश भी रह रहा था और दोनों साथ ही गाड़ियों की सप्लाई करते थे. मुरादाबाद की कटघर थाना पुलिस ने दानिश की तलाश में दबिश भी दी, लेकिन वह हाथ नहीं आया.

खतौली इंस्पेक्टर सुनील त्यागी ने बताया कि सलीम पतला काफी शातिर आतंकी है. उसने काफी समय से अपने परिवार से संपर्क नहीं किया था. पूछताछ में पता चला कि सलीम कुछ साल पहले मेरठ भी आया था. सलीम पतला के साथ उसका बड़ा बेटा दानिश मुरादाबाद में ही रह रहा था. दोनों साथ मिलकर गाड़ियां चोरी करके कश्मीर में सप्लाई करते थे. इंस्पेक्टर ने संभावना जताई कि सलीम के बेटे ने भी आतंकियों से ट्रेनिंग ली है. तभी तो पिता के साथ आरोपी बड़ी सफाई से वारदात अंजाम दे रहा था. इंस्पेक्टर ने बताया कि दानिश की तलाश में कटघर पुलिस ने सलीम के मकान पर दबिश दी, लेकिन दानिश हाथ नहीं आया. दानिश का मोबाइल नंबर भी बंद जा रहा है. आरोपी की तलाश में एटीएस लगी हुई है.

 

 

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