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आचार्य धर्मेंद्र जी महाराज का जीवन अग्नि की भांति दिव्य था – आलोक कुमार

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जयपुर. विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष एडवोकेट आलोक कुमार ने आचार्य धर्मेंद्र जी महाराज को श्रद्धांजलि देने जाते समय कार्यकर्ताओं से कहा कि आचार्य धर्मेंद्र जी महाराज का जीवन अग्नि की भांति दिव्यता लिए हुए था. उन्होंने जीवन भर भगवान राम के कार्य को आगे बढ़ाया. एक मर्मज्ञ धर्म चिंतक, एक ओजस्वी कथाकार, एक प्रखर वक्ता, एक प्रखर कवि, जिन-जिन रूपों में भी उनके व्यक्तित्व का वर्णन किया जाए, वह कम है. आचार्य धर्मेंद्र जी महाराज सामाजिक समरसता के पुरोधा पुरुष थे, जिन्होंने ऐतिहासिक दिवराला सती प्रथा के प्रचलित विषय में धर्म संदेश को सात्विक पक्ष दिखाया तो वहीं सैकड़ों मंदिरों से पशु बलि को निषिद्ध करवाया जो सनातन धर्म के मूल विचार को ईसाइयत व मुगलिया परतंत्रता से मुक्त करने का एक बड़ा कार्य था. विश्व हिन्दू परिषद राम जन्मभूमि आंदोलन के संघर्ष में पूज्य धर्मेंद्र जी महाराज के योगदान को सदैव प्रेरणा के रूप में स्मरण रखेगा. आचार्य धर्मेंद्र जी महाराज जब धर्म संदेश का उद्घोष करते थे, तो पवित्र लोगों के हृदय में उनकी अग्नि रूपी दिव्यता का वाणी प्रवाह हिन्दुत्व के बोध का जागरण कराता था, वहीं वह तामसिक स्वभाव के लोगों को भयभीत करता था. परिषद परिवार ने अपना एक अमूल्य संरक्षक खोया है. हम उनके बताए संदेश पर राम कार्य और गोरक्षा के उनके संकल्प को आगे बढ़ाएंगे.

पत्रकारों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए आलोक कुमार ने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद सदैव हिन्दुत्व व राष्ट्र रक्षा के लिए भारतीय समाज को जागृत करता रहा है, इसी चरण में संस्कृति ज्ञान का प्रवाह आने वाली पीढ़ियों में निरंतर रहे, इस दृष्टि से विद्यालय स्तर पर ऐसी परीक्षा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित करेंगे.

क्षेत्र संघचालक ने दी आचार्य धर्मेन्द्र को श्रद्धाजंलि

जयपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र के संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने श्री पंचखंड पीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्र महाराज के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धाजंलि दी.

क्षेत्र संघचालक डॉ. अग्रवाल ने कहा कि श्री पंचखंड पीठाधीश्वर पूज्य आचार्य धर्मेन्द्र महाराज के ब्रह्मलीन होने के समाचार से भारत का सम्पूर्ण हिन्दू समाज विशेषतः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता शोकमग्न हैं. पूज्य आचार्य जी का राष्ट्र के धार्मिक जगत में एक श्रेष्ठ स्थान था. आपकी वाणी तेज एवं ओज से परिपूर्ण थी. वर्तमान युग में हिन्दुत्व के पुरोधाओं की मालिका के आप मोती थे. हिन्दुत्व विरोधियों को आपकी हुंकार डर से कम्पायमान कर देती थी. श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में आपका योगदान अतुलनीय था – सदैव याद किया जाएगा. संघ के स्वयंसेवकों को आपका स्नेहपूर्ण आशीर्वाद समय-समय पर प्राप्त होता ही था. आपश्री के पुण्यों के प्रताप स्वरुप श्रीपरमेश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देंगे ही.

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