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संस्कार भारती की अखिल भारतीय प्रबंधकारिणी व साधारण सभा की बैठक भाग्यनगर में संपन्न

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भाग्यनगर. साहित्य, संगीत, चित्रकला, नृत्य, नाट्य, भू अलंकरण, लोक कला एवं प्राचीन कला के संरक्षण, संवर्धन एवं संपोषण के क्षेत्र में निरंतर 4 दशकों से गतिशील अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती की अखिल भारतीय प्रबंधकारिणी की बैठक 7 अक्तूबर तथा अखिल भारतीय साधारण सभा 8-9 अक्तूबर 2022 को भाग्यनगर (हैदराबाद) में स्थित “श्री शारदा धाम” में संपन्न हुई.

प्रबंधकारिणी

उद्घाटन के पश्चात् अखिल भारतीय अध्यक्ष तथा अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चित्रकार वासुदेव कामत ने सभासदों का स्वागत किया. प्रबंधकारिणी की पिछली बैठक की कार्यवाही का वाचन अखिल भारतीय मंत्री चेतन जोशी द्वारा किया गया, जिसे सदन द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया.

अगले सत्र में अखिल भारतीय संगठन मंत्री अभिजीत गोखले ने गतिविधि कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें कला के माध्यम से पाँच क्षेत्रों में कार्य करने की विशेष आवश्यकता है – कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य तथा पर्यावरण संरक्षण. अखिल भारतीय महामंत्री अश्विन दलवी ने आगामी दिनों में होने वाले अखिल अखिल भारतीय कला साधक संगम का प्रस्ताव रखा, जिसे आयोजित करने हेतु सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया.

भारत की नई शिक्षा नीति पर अखिल भारतीय उपाध्यक्ष डॉ. हेमलता जी ने विस्तृत चर्चा की तथा शिक्षा नीति में शामिल कला एवं संस्कृति के विषय को जन-जन तक शिक्षक, विद्यालय एवं अभिभावक के बीच कार्यशाला एवं संगोष्ठी के माध्यम से पहुंचाने का निर्णय लिया गया.

संस्कार भारती के संपर्क अधिकारी स्वान्त रंजन जी ने कहा कि बैठक में सदन के समक्ष कार्यक्रम संबंधी लिए गए निर्णय को प्रत्येक जिले में इकाई स्तर पर पहुंचाया जाना चाहिए, जिससे संकल्प को कार्यकर्ता परिणति तक पहुंचा सकें.

अध्यक्षीय उद्बोधन में वासुदेव कामत जी ने कहा कि हमारा ध्येय क्या है, इस पर चिंतन करना चाहिए एवं नदियों तथा पर्यावरण की रक्षा हेतु भगवद्गीता के सूक्त अनुसार कार्य करने की आवश्यकता है. अपने कार्यक्रमों में नित नवीन प्रयोग होने चाहिए. ऐतिहासिक, पौराणिक एवं प्राकृतिक स्थलों का चयन कर वहां कला गतिविधि को किया जाना चाहिए. इसके लिए युवा पीढ़ी को आगे आना होगा.

साधारण सभा

बैठक के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रोफेसर अनुराधा जी (संगीत विभागाध्यक्ष, हैदराबाद विश्वविद्यालय) ने कहा कि आज मैं संस्कार भारती के इस आयोजन में शामिल होकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रही हूं. संस्कार भारती कला एवं संस्कृति तथा हमारी परंपराओं को सहेजने का जो कार्य कर रही है, वह युवा पीढ़ी के लिए मील का पत्थर साबित होगी. तेलंगाना प्रांत के संस्कार भारती के अध्यक्ष कलाकृष्ण जी ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया. संपूर्ण देश से करीब 275 प्रतिनिधि साधारण सभा में उपस्थित रहे.

वासुदेव कामत जी कहा कि यह साधारण सभा केवल औपचारिक सभा नहीं है, बल्कि वार्षिक सिंहावलोकन है. मनुष्य जीवन में जैसे श्वास और स्वास्थ्य आवश्यक है, उसी प्रकार इस राष्ट्र में समाज हेतु संस्कृति एवं संस्कार युक्त प्राण वायु की आवश्यकता है. वातावरण में सतत सावधान रहकर आगे बढ़ना है. इसलिए हमारे कार्य में नवीनता परिपूर्णता विशुद्ध चिंतन मनन मार्गदर्शन हमें आगे बढ़ने में समर्थ करेगा.

गुजरात के कर्णावती में सम्पन्न विगत प्रबंधकारिणी एवं साधारण सभा के पश्चात दिवंगत कला साधकों तथा संस्कार भारती के दिवंगत परिजनों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. जिसमें परम श्रद्धेय शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती, बाबा योगेंद्र, शिवकुमार शर्मा जी, शेखर जोशी, भजन सोपोरी, आचार्य धर्मेंद्र तथा अन्य को स्मरण किया गया. तत्पश्चात विगत साधारण सभा की बैठक की कार्यवाही का वाचन चेतन जी जोशी केंद्रीय मंत्री संस्कार भारती द्वारा किया गया, जिसे सर्वसम्मति से ओम ध्वनि से पारित किया गया.

महामंत्री का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए अश्विन दलवी ने कहा कि विगत 2 वर्ष वैश्विक महामारी के बावजूद विगत 1 वर्ष में संस्कार भारती के संगठनात्मक कार्य, कार्यक्रम, उत्सव तथा प्रशिक्षण में उल्लेखनीय लक्ष्यपूर्ति हुई है. स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव निमित्त संस्कार भारती ने गत वर्ष अनाम स्वतंत्रता सेनानियों पर केवल 75 नाट्य प्रस्तुति करने का संकल्प लिया था, जिसके विरुद्ध अभी तक 87 नाट्य प्रस्तुतियां तैयार हो चुकी हैं एवं उसमें से 78 नाट्य प्रस्तुतियों का सफल मंचन संपूर्ण देश में कर संस्कार भारती ने अपने संकल्प को पूर्ण किया है. अभी तक संपूर्ण देश में विभिन्न राज्यों में संस्कार भारती द्वारा 12 नाट्य समारोह तथा अखिल भारतीय नाट्य महोत्सव भी आयोजित करने का विचार है. भारतीय स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में संस्कार भारती द्वारा आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में “वंदे मातरम गौरव गान” की रचना की गई, जिसमें 15 अगस्त 1947 को संगीत मार्तंड पंडित ओमकारनाथ ठाकुर द्वारा प्रातः 6:30 बजे प्रस्तुत ऐतिहासिक गायन की स्मृति समाज में पुनर्स्थापित करने हेतु देशभर में संस्कार भारती की 437 इकाइयों द्वारा 2356 स्थानों पर कार्यक्रम संपन्न किए. इसमें कुल 194940 जनशक्ति का सहभाग रहा. कर्नाटक के संस्कार भारती के कार्यकर्ताओं के प्रयास से यह कार्यक्रम कनाडा और अमेरिका में भी संपन्न हुआ. “सिने सृष्टि – भारतीय दृष्टि” के अंतर्गत दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र एवं मुंबई विश्वविद्यालय के एकेडमी ऑफ थिएटर आर्ट के संयुक्त तत्वाधान में हुआ, जिसमें स्वतंत्रता आंदोलन में भारतीय सिनेमा की भूमिका विषय पर चर्चा हुई. देश के 17 राज्यों के प्रतिनिधि एवं 12 अग्रणी मीडिया, फिल्म इंस्टीट्यूट के छात्र, कई जाने-माने फिल्म निर्देशकों ने इसमें भाग लिया. अमृत महोत्सव के ही निमित्त 13 और 14 अगस्त 2022 को नासिक में संस्कार भारती ने देश के 40 स्वतंत्रता सेनानियों के रंगोली पोट्रेट बनवा कर प्रदर्शनी के रूप में प्रदर्शित किए. इसमें देश के 40 विभिन्न प्रांतों से पधारे कलाकारों ने इन्हें बनाया. संस्कार भारती दिल्ली प्रांत एवं सीसीआरटी के संयुक्त तत्वाधान में नई शिक्षा नीति में कला संस्कृति संबंधी प्रावधानों से कला शिक्षकों को अवगत कराने की दृष्टि से “उत्कर्ष” कार्यशाला का आयोजन किया गया, इसमें दिल्ली के निजी पाठशालाओं के 77 कला शिक्षक सम्मिलित हुए. इसी वर्ष अप्रैल में संस्कार भारती ने एक प्रस्ताव कोविड-19 से प्रभावित कला साधकों की गतिविधियां एवं उनकी स्थिति को लेकर केंद्र सरकार, राज्य शासन तथा कला संस्थान आदि को उनकी सहायता हेतु अपील की गयी थी. जिसके परिणाम स्वरूप समन्वित प्रयासों से कला जगत का कार्य अपनी पूर्ण क्षमता से पुनः प्रारंभ होकर सही दिशा में अग्रसर है.

देश के कोने-कोने से आए विभिन्न प्रांतों के प्रतिनिधियों एवं अखिल भारतीय विधा संयोजकों ने देशभर में आयोजित विभिन्न आयोजनों की रूपरेखा प्रस्तुत की. स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के आयोजन के संबंध में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 75 वर्षों में हमारे देश में क्या-क्या उपलब्धियां रही हैं, इस विषय पर पूरे भारतवर्ष में हर प्रांत में, हर शहर में आयोजन विभिन्न विधाओं में किए जाएं.

वैचारिक विमर्श पर आधारित एक सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार जी ने बताया कि वैचारिक संगठन होने के नाते समाज में चल रहे वैचारिक विमर्श के संघर्ष में जमीन पर हम हैं, संगठनात्मक रूप से भी प्रभावी हैं. पर अब हमें विमर्श के मैदान में उतरना होगा. आज समाज में जो गलत विमर्श खड़े किए जा रहे हैं, वह राष्ट्र के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं. सत्ता के माध्यम से अथवा आर्थिक प्रगति द्वारा अपना विमर्श स्थापित नहीं हो सकता. समाज में जो स्थापित मॉडल्स हैं, उनके प्रति संदेह पैदा किया जा रहा है जैसे रक्षाबंधन क्यों, विवाह संस्कार क्यों इत्यादि. विपरीत विमर्शों से उपजे भेदों से समाज को संघर्षों में खड़ा कर देना ही इनका उद्देश्य है. इसलिए संस्कार भारती समाज के विमर्श में सकारात्मक भूमिका में दिखे और वैचारिक परिवर्तन की भूमिका के साथ आगे बढ़े यही अपेक्षा है.

साधारण सभा में स्वांत रंजन ने शताब्दी विस्तारक योजना एवं व्यवस्था परिवर्तन पर कहा कि वर्ष 2024 तक भौगोलिक दृष्टि से हमारा कार्य गुणवत्तासहित खड़ा हो, इसके लिए समय देने वाले कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है. हमारा कार्य कलाओं के माध्यम से वैचारिक परिवर्तन करना है. भगवान हनुमान जी को सीता माता को खोजने के उत्साह प्रसंग से हमें प्रेरणा प्राप्त करने की आवश्यकता है. सभी विषयों पर प्रांत और जिले के कार्यकर्ताओं के साथ बैठकर विचार करना चाहिए. हमारा बड़ा लक्ष्य है तो बड़ी साधना, बड़ा ह्रदय रखना आवश्यक है. “दोष हमारा – श्रेय श्री राम का” यही प्रवृत्ति कल्याणी है.

महिला समन्वय की जानकारी नीलंजना राय द्वारा दी गई. जिसमें महिलाओं के बीच समन्वय स्थापित करना क्योंकि मातृ शक्ति संगठन के बिना पूर्ण समाज की शक्ति असंभव है. वंदे मातरम गायन के साथ साधारण सभा का समापन हुआ.

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