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अमृत महोत्सव – प्रधानमंत्री ने मोहम्मद जायसी, रस खान, सूरदास, केशवदास, शिवाजी का किया स्मरण

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नई दिल्ली. स्वतंत्रता के 75 वर्ष, अमृत महोत्सव के तहत चलने वाले कार्यक्रमों का शुभारंभ 12 मार्च से हो गया. इसके तहत केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों, सहित विभिन्न राज्यों में भी कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. प्रधानमंत्री ने साबरमती आश्रम से 75 सप्ताह तक चलने वाले कार्यक्रमों का शुभारंभ किया.

इस अवसर पर उन्होंने अनेक अज्ञात या कम ज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों, संतों का भी स्मरण किया, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने सभी स्वतंत्रता सेनानियों, इसके लिए चले आंदोलनों, और उनमें बलिदान हुए लोगों को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए. विशेषकर उन विभूतियों, संघर्षों और आंदोलनों का स्मरण किया, जिन्हें  भारत की स्वतंत्रता के  लिए चले संग्राम की वैभवशाली गाथा में उचित और पूर्ण पहचान नहीं मिल पाई.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हर -एक संघर्ष और प्रतिरोध असत्य की शक्तियों के विरुद्ध भारत के सत्य की सशक्त घोषणा थी और यह भारत के स्वतंत्र स्वभाव का साक्षी है. ये संघर्ष उसी चेतना और शौर्य का प्रतिनिधित्व करते हैं जो कभी राम के समय, महाभारत के कुरुक्षेत्र, हल्दीघाटी और शिवाजी की गर्जना में विद्यमान था.

उन्होंने कोल, संथाल, नगा, भील, मुंडा, सन्यासी, रामोशी, कित्तूर आन्दोलन, त्रावणकोर आन्दोलन, बारडोली सत्याग्रह, चम्पारण सत्याग्रह, संभलपुर, चौर, बुन्देल और कूका आंदोलन का उल्लेख किया.  कहा, ऐसे कई संघर्षों ने हर काल और देश के हर भाग में स्वतंत्रता की मशाल को हमेशा प्रज्ज्वलित रखा. सिक्ख गुरुओं की परम्परा ने संस्कृति और परम्पराओं की रक्षा के लिए देश में ऊर्जा का संचार किया.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें सदा यह याद रखना होगा कि देश के हर कोने में हमारे संतों, महंतों और आचार्यों ने स्वाधीनता की मशाल की अग्नि हमेशा प्रज्ज्वलित रखी. उन्होंने ही देशव्यापी स्वतंत्रता संग्राम के लिए आधार तैयार किया. पूर्व में चैतन्य महाप्रभु और श्रीमंत शंकर देव ने समाज को दिशा दी और लोगों को अपने लक्ष्य के प्रति केन्द्रित किया. पश्चिम में मीराबाई, एकनाथ, तुकाराम, रामदास  और नरसी मेहता, उत्तर में संत रामानन्द, कबीरदास, गोस्वामी तुलसीदास, सूरदास, गुरु नानक देव, संत रैदास ने यह बीड़ा उठाया. इसी प्रकार से दक्षिण में माधवाचार्य, निम्बार्काचार्य, वल्लभाचार्य और रामानुजाचार्य ने किया.

भक्तिकाल में मलिक मोहम्मद जायसी, रस खान, सूरदास, केशवदास और विद्यापति जैसी विभूतियों ने समाज को अपनी कमियां सुधारने के लिए प्रेरित किया. इन  विभूतियों के कारण ही स्वतंत्रता के संघर्ष को अखिल भारतीय रूप मिल पाया. इन महान नायकों और नायिकाओं की जीवन गाथा को आम लोगों तक पहुंचाए जाने की आवश्यकता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि इन प्रेरणास्पद गाथाओं से हमारे देश की नई पीढ़ी को एकता और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दृढ़ संकल्प लेने की अमूल्य शिक्षा  मिलेगी.

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