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120 ‘प्रलय’ बैलिस्टिक मिसाइल खरीदने को स्वीकृति; 150 से 500 किमी तक मारक क्षमता

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नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने 120 प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलों की खरीद को स्वीकृति प्रदान कर दी है. चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद के बीच निर्णय को बड़ा कदम माना जा रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने सशस्त्र बलों के लिए 120 प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलों की खरीद को स्वीकृति दे दी है.

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा तैयार की गई मिसाइल को अधिक विकसित किया जा रहा है. 2015 से इस सिस्टम को विकसित करने पर काम जारी था.

प्रलय बैलिस्टिक मिसाइलें 150 से 500 किलोमीटर तक मार कर सकती हैं. यानि इसकी जद में आने वाले दुश्मनों का बचना नामुमकिन जैसा है. रिपोर्ट्स की मानें तो इन मिसाइलों को चीन और पाकिस्तान से लगी सीमा पर तैनात किया जाएगा. इन्हें सबसे पहले वायुसेना में शामिल किया जाएगा. इसके बाद यह थलसेना का हिस्सा बनेंगी.

रिपोर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय बैठक में सशस्त्र बलों के लिए करीब 120 मिसाइलों की खरीद और सीमाओं पर उनकी तैनाती को मंजूरी दी गई. चीन और पाकिस्तान दोनों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं. यह बैलिस्टिक मिसाइल चीन की बैलिस्टिक मिसाइलों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम है.

प्रलय की विशेषता

– अर्ध-बैलिस्टिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल

– इंटरसेप्टर मिसाइलों को छकाकर हमला करने में सक्षम

– उड़ान भरने के बाद रास्ते में ही राह बदलने की क्षमता

– दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली पूर्णत: ध्वस्त करने में सक्षम

– ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलों के साथ मिलकर लंबी दूरी की रणनीतिक रक्षा प्रणाली का करेगी निर्माण

– मोबाइल लॉन्चर से किया जा सकता है लॉन्च

प्रलय मिसाइल का पिछले साल दिसंबर में लगातार दो दिनों में दो बार सफल परीक्षण किया गया था. तब से सेना इसके अधिग्रहण और शामिल करने की दिशा में काम कर रही है. 150 से 500 किमी की सीमा के साथ, ‘प्रलय’ रॉकेट मोटर और अन्य नई तकनीकों से संचालित है.

मिसाइल के बारे में डीआरडीओ द्वारा साल 2015 में चर्चा की गई थी. डीआरडीओ ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया था कि यह बैलिस्टिक मिसाइल चीन की बैलिस्टिक मिसाइलों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम है. इस मिसाइल की विशेषता ये है कि इसे जमीन के साथ-साथ हवा से भी दागा जा सकता है.

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