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उपद्रवियों के समर्थन में आया एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्टशन ऑफ सिविल राइट्स

संगठन की फैक्ट फाइंडिंग टीम बनी कोर्ट, पत्थरबाजों को दी क्लीन चिट

भोपाल. अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए निधि समर्पण के लिए निकाली जा रही हिन्दू संगठनों की रैलियों पर घात लगाकर हमला, पत्थरबाजी व मारपीट करने वाले उपद्रवियों के समर्थन में एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्टशन ऑफ सिविल राइट्स आया है. एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्टशन ऑफ सिविल राइट्स की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने बीते दिनों उज्जैन के बेगमबाग, इंदौर के चंदनखेड़ी और मंदसौर के डोराना का दौरा किया और संबंधित घटना के आरोपियों को न्यायालय बनकर क्लीन चिट दे दी. टीम में सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता एहतेशाम हाशमी, सीआईपी-एमएल के मुकेश किशोर, अधिवक्ता शोएब इमानदार, ज्वलंत सिंह चौहान, पत्रकार काशिफ अहमद फराज के साथ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र एम हुफैजा और सैय्यद अली शामिल हैं.

गुरुवार दोपहर भोपाल में पत्रकारवार्ता कर टीम के सदस्यों ने उज्जैन के बेगमबाग, इंदौर के चंदनखेड़ी और मंदसौर में हिन्दू संगठनों की निधि संग्रह के लिए निकाली गई रैली पर पत्थरबाजी करने वालों का बचाव करते हुए घटना को हिन्दू संगठनों का पूर्वनियोजित कदम बता दिया. जबकि पुलिस तीनों घटनाओं को अंजाम देने वालों के खिलाफ आपराधिक धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारी कर जांच कर रही है.

तीनों स्थानों पर हिन्दू संगठनों की रैलियों पर घात लगाकर सुनियोजित तरीके से की गई पत्थरबाजी और तोड़फोड़ को संगठन की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने उकसावे की कार्रवाई बताया है. जबकि पुलिस की जांच में स्पष्ट आया है कि तीनों स्थानों पर शांतिपूर्वक निकाली जा रही रैलियों पर सुनियोजित तरीके से पत्थरबाजी की गई. टीम के सदस्यों का तर्क था कि तीनों घटनाएं हिन्दू संगठनों के उत्तेजनापूर्ण नारों व स्थानीय निवासियों को लेकर लगाए गए अपमानजनक नारेबाजी के कारण हुई. लेकिन, घरों की छतों पर पत्थर, हथियार, कहां से आए, इसका कमेटी के पास कोई जवाब नहीं है.

नहीं दे पाए पत्रकारों के सवालों के जवाब

पत्रकार वार्ता के दौरान टीम के सदस्य एहतेशाम हाशमी और मुकेश किशोर ने पत्रकारों के इस सवाल का जवाब नहीं दे पाए कि अगर अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा घटनाएं सुनियोजित नहीं थीं तो एक साथ सैकड़ों की संख्या में समुदाय के लोग पत्थर, धारदार हथियार लेकर रैली पर कैसे टूट पड़े.

टीम के सदस्यों से जब पत्रकारों ने सवाल किया कि अगर इस तरह की घटनाएं प्रदेश के अन्य जिलों में होंगीं, तब क्या होना चाहिए. तब टीम के सदस्यों ने कहा कि जो भी व्यक्ति अपराध करता है, हिंसा फैलाता है उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. पुलिस को अपना काम करना चाहिए.

अधिवक्ता एहतेशाम हाशमी जो फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्य हैं, एहतेशाम हाशमी कांग्रेस पार्टी के विधि प्रकोष्ठ के सदस्य भी हैं. हाशमी पहले तीन तलाक कानून के खिलाफ भी कोर्ट जा चुके हैं.

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