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    सेवा करने में धन्यता का अनुभव करना, यह हिन्दू दर्शन है – डॉ. कृष्णगोपाल जी

    संत ईश्वर फाउंडेशन ने संस्थाओं व व्यक्तियों को संत ईश्वर सम्मान-2019 के सम्मानित किया नई दिल्ली. संत ईश्वर फाउंडेशन ने राष्ट्रीय सेवा भारती के सहयोग से “संत ईश्वर सम्मान 2019” का आयोजन रविवार को एन.डी.एम.सी. कन्वेंशन सेंटर, संसद मार्ग, नई दिल्ली में किया. संत ईश्वर सम्मान में विभिन्न क्षेत्रों में सेवारत संस्थाओं व महानुभावों को सम्मानित किया गया. चार व्यक्तियों व स्वयंसेवी संस्थाओं को संत ईश्वर विशिष्ट सेव ...

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    18 नवम्बर / जन्मदिवस – परोपकार की प्रतिमूर्ति स्वामी प्रेमानन्द

    नई दिल्ली. भारत में सन्यास की एक विशेष परम्परा है. हिन्दू धर्म में ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और फिर सन्यास को आश्रम व्यवस्था कहा गया है, पर कई लोग पूर्व जन्म के संस्कार या वर्तमान जन्म में अध्यात्म और समाज सेवा के प्रति प्रेम होने के कारण ब्रह्मचर्य से सीधे सन्यास आश्रम में प्रविष्ट हो जाते हैं. आद्य शंकराचार्य ने समाज में हो रहे विघटन एवं देश-धर्म पर हो रहे आक्रमण से रक्षा हेतु दशनामी सन्यासियों की परम ...

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    17 नवम्बर / बलिदान दिवस – पंजाब केसरी लाला लाजपतराय

    ‘‘यदि तुमने सचमुच वीरता का बाना पहन लिया है, तो तुम्हें सब प्रकार की कुर्बानी के लिए तैयार रहना चाहिए. कायर मत बनो. मरते दम तक पौरुष का प्रमाण दो. क्या यह शर्म की बात नहीं कि कांग्रेस अपने 21 साल के कार्यकाल में एक भी ऐसा राजनीतिक संन्यासी पैदा नहीं कर सकी, जो देश के उद्धार के लिए सिर और धड़ की बाजी लगा दे....’’ इन प्रेरणास्पद उद्गारों से 1905 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुए कांग्रेस के अधिवेशन में लाला ...

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    श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर हेतु अभी कोई धन संग्रह नहीं – विहिप

    नई दिल्ली. विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने आज स्पष्ट किया कि श्रीराम जन्मभूमि पर मन्दिर निर्माण हेतु किसी प्रकार का धन संग्रह नहीं किया जा रहा है. विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने एक बयान में स्पष्ट किया कि विश्व हिन्दू परिषद या श्रीराम जन्मभूमि न्यास द्वारा 1989 के बाद से आज तक श्रीराम जन्मभूमि के लिए सार्वजनिक रूप से ना तो कोई धन संग्रह किया है और ना ही इस हेतु अभी तक कोई आह्वान किया है. उन ...

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    श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के उन्नायक श्री अशोक सिंहल जी की पुण्यतिथि पर नमन

    बीसवीं इक्कीसवीं सदी का संधि काल हिन्दू समाज के नवजागरण के काल खण्ड के रूप में इतिहास के पन्नों में अंकित होगा. यह वह कालखंड है, जब शताब्दियों से पराधीनता की बेड़ियों में जकड़े जाने से उत्पन्न आत्मविस्मृति एवं आत्महीनता की भावना को तोड़कर हिन्दू समाज ने विश्वपटल पर हूंकार भरी थी. सोए हुए हिन्दू पौरुष को जगाने का आधार बना श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और इस आंदोलन के स्मरण के साथ ही इसके नायकों में जो नाम प्रमुखता ...

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    लेखक, इतिहासकार, दार्शनिक, समाज सुधारक थे वीर सावरकर – उपराष्ट्रपति

    नई दिल्ली. उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि वीर सावरकर बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे. वह स्वतंत्रता सेनानी के साथ ही लेखक, इतिहासकार, राजनेता, दार्शनिक और समाज सुधारक भी थे. उपराष्ट्रपति नेहरू म्यूजियम एवं लाइब्रेरी में 'Savarkar: Echoes from a Forgotten Past' पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि वीर सावरकर तथा देश के विभिन्न हिस्सों में स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान देने ...

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    ब्रि. गगनेजा हत्याकांड में एनआईए ने कोर्ट में दाखिल की चार्जशीट

    नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पंजाब के सह प्रांत संघचालक ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा जी (सेवानिवृत्त) की हत्या के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 15 नवंबर, शुक्रवार को आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. एनआईए जांच के अनुसार ब्रिगेडियर गगनेजा की खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) के वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा रची गई ट्रांस-नेशनल साजिश के तहत हत्या की गई. सभी आरोपी विशिष्ट समुदायों और संगठनों से संबंधित थे. इ ...

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    देश की एकजुटता के लिए बिरसा मुंडा के जीवन से प्रेरणा ले जनजातीय समाज – रामेश्वर तेली

    नई दिल्ली. वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा अशोक विहार स्थित सनातन भवन में बिरसा मुंडा की जयंती पर जनजाति गौरव दिवस आयोजित किया गया. उत्तर पूर्व भारत में बड़ी संख्या में हुए धर्मान्तरण पर चिंता प्रकट करते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री रामेश्वर तेली ने कहा कि बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संग्राम किया था. एक समय बिरसा मुंडा ने भी क्रिश्चैनिटी को ...

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    भारतीय इतिहास की गलत व्याख्या के साथ ही ऐतिहासक प्रमाणों को झुठलाते वामपंथी इतिहासकार

    इसमें कोई दो राय नहीं कि सत्य के उद्घाटन के अतिरिक्त इतिहास की कोई वैचारिक अथवा सांस्कृतिक प्रतिबद्धता नहीं होनी चाहिए. इतिहास में धर्मनिरपेक्ष सोच अथवा पंथनिरपेक्ष मूल्यों का भी समावेश नहीं होना चाहिए, क्योंकि तटस्थ दृष्टिकोण से लिखा इतिहास तो होता ही धर्म अथवा पंथ निरपेक्ष है. इतिहास आस्था का आधार अथवा विश्वास का प्रतीक भी नहीं होना चाहिए, क्योंकि आस्था, विवेक और तर्क का शमन करती है. इतिहास बौद्धिक कट्टरत ...

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    राम और रामायण – भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की अभिव्यक्ति

    अरुण आनंद राम और रामायण, भारत की सांस्कृतिक परंपरा का न केवल अभिन्न, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं. अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण का ओदांलन जब वर्ष 1983 में एक बार पुन: आरंभ हुआ तो बहुत से आलोचकों ने राम और रामायण को लेकर कई प्रश्न भी उठाए थे. पर, वास्तविकता तो यह है कि राम और रामायण पूरे दक्षिण एशिया को एक सांस्कृतिक परंपरा में बांधते हैं. थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, इंडोनेशिया, लाओस, म ...

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