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अयोध्या – बाल स्वरूप में होंगे श्री रामलला के दर्शन, 2024 मकर संक्रांति तक होगी प्राण-प्रतिष्ठा

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अयोध्या. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल (गर्भगृह) का निर्माण कार्य अक्तूबर तक पूरा हो जाएगा. तत्पश्चात रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चम्पत राय ने श्रीराम मंदिर निर्माण कार्य की अब तक की गति पर संतोष व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर के पहले तल का निर्माण कार्य अक्तूबर में पूरा हो जाएगा. उसके बाद दिसंबर या अगले साल मकर संक्रांति तक शुभ मुहूर्त में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी. इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है.

शुक्रवार को मीडियाकर्मियों से बातचीत में चम्पत राय ने कहा कि मंदिर निर्माण का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है. 2024 की मकर संक्रांति तक या उससे पहले रामलला की मंदिर के गर्भगृह में प्राण प्रतिष्ठा हो जाएगी. रामलला की मूर्ति 5 वर्ष से 7 वर्ष के बीच के बालक स्वरूप में तैयार होगी. यह 8.5 फुट लंबी होगी. अयोध्या में भगवान राम की पूजा बालक रूप में होती है. उन्होंने बताया कि मूर्ति के लिए ऐसे पत्थर का चयन किया जाएगा जो आकाश के रंग का हो यानी आसमानी रंग का हो. साथ ही महाराष्ट्र और ओडिशा के मूर्तिकला के विद्वानों ने आश्वासन दिया है कि ऐसा पत्थर उनके पास उपलब्ध है. ओडिशा के मूर्तिकार सुदर्शन साहू एवं वासुदेव कामत और कर्नाटक के रमैया वाडेकर रामलला की मूर्ति बनाएंगे. मूर्तिकारों से मूर्ति का डायग्राम तैयार करने को कहा गया है. चम्पत राय ने बताया कि गर्भ गृह की दीवार, खंभों, फ़र्श पर मकराना का मार्बल लगेगा. मंदिर के ग्राउंड फ्लोर पर पांच मंडप तैयार किये जा रहे हैं.

इस अवसर पर उनके साथ ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा, निर्माण कार्य में लगे प्रमुख इंजीनियर भी उपस्थित थे.

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