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बस्तर – मिशनरियों द्वारा किये जा रहे धर्मांतरण के खिलाफ जनजातीय समाज का शंखनाद

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आश्चर्य की ही बात है कि छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े जनजातीय क्षेत्र बस्तर संभाग में हजारों की संख्या में जनजातीय ग्रामीण अपनी संस्कृति, सभ्यता, परंपरा और अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरे हुए हैं और इस पर कोई चर्चा नहीं हो रही है. छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में जनजातीय समाज ने समाज के भीतर ईसाई मिशनरियों द्वारा किए जा रहे धर्मांतरण के खिलाफ शंखनाद कर दिया है.

बीते 5 दिनों से कोंडागांव जिले में जनजातीय समाज के नागरिकों द्वारा सड़क पर जमकर प्रदर्शन किए गए हैं. जनजातीय समाज ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्म परिवर्तन के जाल के खिलाफ प्रशासन और सरकार को स्पष्ट चेतावनी दे रहा है.

दरअसल, पूरा क्षेत्र जनजातीय बहुल क्षेत्र है. यहां पिछले कुछ दशकों में ईसाई मिशनरियों द्वारा जनजातीय ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर उनका धर्मांतरण किया जा रहा है. इस कारण ना सिर्फ जनजातीय समाज की वर्तमान पीढ़ी अपने रीति-रिवाजों और परंपराओं से कट रही है, बल्कि एक ऐसी सभ्यता का अनुसरण कर रही है जो उनकी अपनी नहीं है. इसके अलावा अलग-अलग समय में मिशनरियों पर जनजाति समाज के ऐतिहासिक संस्कृतियों और परंपराओं को अपमानित करने और उसे तोड़ मरोड़ कर पेश करने का भी आरोप लगता रहा है.

वर्तमान में भी क्षेत्र के जनजातीय ग्रामीणों के साथ असभ्य व्यवहार और जनजातीय देवी-देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणियां मिशनरियों द्वारा की गई हैं. कोंडागांव जिले में चल रहे प्रदर्शन के पीछे भी यही कारण है. एक तरफ पुलिस प्रशासन इसे भूमि अधिकार से संबंधित विवाद के रूप में प्रदर्शित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ वामपंथी मीडिया समूह जनजातीय समाज को ही निशाना बना रहे हैं.

ईसाई धर्म में परिवर्तित हो चुके कुछ परिवारों का कहना है कि क्षेत्र में स्थानीय जनजातीय ग्रामीणों द्वारा उनके घरों को तोड़ा गया है. जबकि स्थानीय जनजाति ग्रामीणों का आरोप है कि ईसाइयों द्वारा उनके देवी देवताओं का अपमान किया जा रहा है. छल कपट से समाज के लोगों का धर्मांतरण कर संस्कृति को खत्म करने की कोशिश की जा रही.

यही कारण है कि जिले में चिपाबन्द ग्राम पंचायत में पिछले एक सप्ताह से धर्मांतरण के खिलाफ आक्रोशित जनजातीय ग्रामीणों ने मोर्चा खोल रखा है.

क्षेत्र में इस पूरे आंदोलन के समर्थन में सर्वाधिक समाज के संभाग के पदाधिकारी भी उपस्थित हुए हैं. जनजाति समाज के अलग-अलग मुखियाओं ने पूरे राज्य में चल रहे धर्मांतरण को जनजातीय संस्कृति और समाज के लिए खतरा बताया है. जनजातीय समाज खतरे को भांपते हुए आगामी समय में बस्तर संभाग के सभी जिलों में बैठक आयोजित करके इस विषय में रणनीति बनाकर कार्य करने की योजना पर विचार कर रहा है.

आरोप है कि ईसाई धर्म में परिवर्तित हुए लोगों के सहयोग के लिए पूरे क्षेत्र में बाहर से आए हुए पादरी कोंडागांव जिले के कलेक्टर परिसर में घुसते हुए दिखाई दिए हैं. इसमें लखनऊ, चैन्नई, रायपुर जगदलपुर से आए पादरियों का जमावड़ा भी शामिल है.

यहां पर प्रश्न यह भी उठता है कि जब यह मामला स्थानीय है तो इसमें दूसरे राज्यों के ईसाई पादरियों के शामिल होने की क्या वजह है?

जनजातीय समाज ने स्पष्ट तौर पर अपनी बात सामने रख दी है कि किसी भी हाल में जनजातीय क्षेत्रों में धर्मांतरण की गतिविधियों को रोकना आवश्यक है. ईसाई मिशनरियों को चेतावनी दे दी गई है कि यदि धर्मांतरण और जनजाति संस्कृति से खिलवाड़ का कार्य नहीं रुकता है तो जनजातीय समाज उग्र प्रदर्शन करेगा.

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One thought on “बस्तर – मिशनरियों द्वारा किये जा रहे धर्मांतरण के खिलाफ जनजातीय समाज का शंखनाद

  1. जैसे किसी मकान को खोखला करने के लिए दीमक बहुत धीरे-धीरे पूरे मकान की नीवों में लग कर अपना कार्य करती है, जैसे घुन सारे अन्न के भण्डार को धूल धूसर करते दिखती भी नहीं, पता भी नहीं लगने देती ऐसे ही कुटिलता से बुने जालों और चालों से मिशनरी ही नहीं वरन वामपंथी भी भारतीय समाज, सभ्यता और संस्कृति को पूरी शक्ति से अत्यधिक धैर्य से शनै शनै संक्रमित करके सम्पूर्ण भारतवर्ष राष्ट्र का सामाजिक ताना बाना नष्ट भ्रष्ट करने में अन्तर्राष्ट्रीय षडयंत्र के साथ लगे है ताकि भारतवर्ष राष्ट्र बिखर जाए।
    इसका ताजा उदाहरण खेरवाडा डूंगरपुर विवाद है।

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