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स्वाधीनता के पूर्व देवर्षि नारद के आदर्श पर चली पत्रकारिता – गिरीश पंकज

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रायपुर. राजधानी के वृंदावन सभागृह में देवर्षि नारद जयंती समारोह-2022 का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्यकार गिरीश पंकज ने वर्तमान पत्रकारिता और देवर्षि नारद के बीच के संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला. प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार शंकर पाण्डेय को देवर्षि नारद सम्मान से सम्मानित किया गया.

शंकर पाण्डेय ने कहा कि, आज की पत्रकारिता में गिरावट आई है, जैसे समाज के सभी क्षेत्रों में गिरावट आई है. पहले वरिष्ठों का सम्मान होता था, पुराने लोग नए लोगों को अपना अनुभव ट्रांसफर करते थे. प्रिंट मीडिया का सम्मान था, आज मीडिया के नये स्वरूप में विश्वसनीयता कम हो गई है. पहले पत्रकारिता एक मिशन के रूप में थी, अब यह प्रोफेशन हो गई है.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गिरीश पंकज ने कहा कि भारतीय काल में हमारे आदि संपादक महर्षि वेदव्यास हैं, उसी तरह आद्य पत्रकार देवर्षि नारद हैं. कुछ लोग देवर्षि नारद के बारे में विभिन्न माध्यमों से विदूषक के रूप में प्रस्तुत करते हुए दिखाई देते हैं, जबकि वे एक सकारात्मक पत्रकारिता की शुरुआत करने वालों में से थे. आज भी पत्रकारिता देवर्षि नारद के मूल्यों को प्रतिस्थापित करे तो अनेक समस्याओं का समाधान कर सकती है. उन्होंने कहा कि हमारे देश में अखबार का सम्मान स्वतंत्रता के संघर्ष के समय से रहा. उदंत मार्तंड प्रारंभ करने वाले जुगलकिशोर शुक्ल ने भारतीय पत्रकारिता की ज्योति को जलाए रखा.

स्वाधीनता आंदोलन के समय समाचार पत्रों में देश को स्वतंत्र करने का भाव था, उस काल के अनेक संपादकों को कालापानी की सजा हुई. आज कुछ संपादक, मीडिया जगत में मूल्यों की गिरावट आई है, पत्रकारिता आज बाजार में बैठ गई है, “ऐसे हो या वैसे, हमें चाहिए पैसे” का नारा चल रहा है. समाचार पत्रों में आदर्श कम हो गए, अंग्रेजी अखबार के पिछलग्गू हो गए. बाजारवाद ने पत्रकारिता को सांस्कृतिक मूल्यों का पतन कर दिया, समाज की मान्यताओं को बदल दिया है. उन्होंने वर्तमान पत्रकारिता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह आत्मसमर्पण का दौर है, जो भी हो रहा है, सही हो या गलत हो, समाज सब देख रहा है. समाज को सही दिशा दिखाने देवर्षि नारद संवाद स्थापित करते थे, वे समाज की विकृति को दुरुस्त करने के लिए कार्य करते थे, समाज को जोड़ने का काम करते थे. स्वतंत्रता के पहले देश में नारदीय पत्रकारिता होती थी.

देवर्षि नारद जयंती समारोह आयोजन समिति के अध्यक्ष समाजसेवी व चिंतक भास्कर कीन्हेकर ने कहा कि देवर्षि नारद पत्रकारिता के आदर्श हैं. आज भी प्रासंगिक हैं. पत्रकारों ने सत्यान्वेषी कार्य करना चाहिए, भले ही तात्कालिक स्वीकार न हो. लेकिन आखिरकार सत्य सिद्ध हो. समाज को जागृत करना बहुत आवश्यक है. मीडिया समाज जीवन पर बहुत असर डालता है, इसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती.

कार्यक्रम का संचालन, सह संयोजक डॉ. सौम्य पाण्डेय ने किया और आभार प्रदर्शन कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ पत्रकार आर कृष्णा दास ने किया.

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