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    हिंदवी स्वराज्य : एक परिपूर्ण व्यवस्था

    -  प्रशांत पोळ ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी, विक्रम संवत १७३१, तदनुसार अंग्रेजी दिनांक 06 जून १६७४, बुधवार को छत्रपति शिवाजी महाराज का, स्वराज्य की राजधानी रायगढ़ में राज्याभिषेक हुआ. वे सिंहासनाधीश्वर हुए. हिन्दूपदपादशाही की स्थापना हुई. सैकड़ों वर्षों के बाद इस देश में पुनः शक्तिशाली हिन्दू साम्राज्य की नींव रखी गई. यह साधारण घटना नहीं थी. इस देश का भाग्य बदलने वाला इतिहास, रायगढ़ में लिखा जा रहा था. यह स्वराज्य ...

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    हिन्दू साम्राज्य दिनोत्सव – समाज राष्ट्र को बचाने के लिए एकजुट होकर शक्तिशाली बनें

    नरेंद्र सहगल हिन्दूपद पादशाही की स्थापना प्रत्येक युद्ध में विजयी शिवाजी धर्मान्तरित हिन्दुओं की घर वापसी गुरिल्ला युद्ध तकनीक का अविष्कार समुद्री बेड़ा (नौसेना) का निर्माण भगवा ध्वज एवं संस्कृत को मान्यता हिन्दू सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज ने ज्येष्ठ शुक्ल, त्रयोदशी (सन् 1674) के दिन हिन्दुपद पादशाही की स्थापना करके सारे संसार में रणभेरी बजा दी – भारत हिन्दू राष्ट्र था, है और रहेगा. भीषणतम एवं विपरीत परिस ...

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    वयं राष्ट्रांग्भूता – हम राष्ट्र का एक घटक हैं

    डॉ. मनमोहन वैद्य   भारत के साथ पूरी दुनिया कोरोना वायरस के कारण निर्मित परिस्थिति से जूझ रही है. भारत की वैविध्यपूर्ण और विशाल जनसंख्या को देखते हुए इस लड़ाई में दुनिया के अन्य दिग्गज देशों से हमारी स्थिति काफी अच्छी है ऐसा कह सकते हैं. पहली बार लॉकडाउन का अनुभव लोगों ने किया. इस के अनुकूल और विपरीत परिणामों की चर्चा भी सर्वत्र चल रही है. धीरे धीरे लॉकडाउन खुल रहा है, सावधानीपूर्वक आगे बढ़ना होगा. इस ए ...

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    हमारी चुनौतियां और भारत की संभावनाएं

    रवि प्रकाश बगैर किसी भूमिका के सीधी बात की जाए तो फरवरी के आरम्भ होते-होते दुनिया को अहसास हो गया था कि एक भारी संकट विश्व समुदाय को अपनी चपेट में ले रहा है और इससे बाहर निकलना तत्काल संभव नहीं है. यह संकट मानव-निर्मित है या बेलगाम और बेहिसाब दोहन से क्षुब्ध प्रकृति का प्रकोप है, इस पर अभी दुनिया भर में माथापच्ची चल रही है. इस बीच संकट सुरसा के मुँह के समान विशाल और विकराल होता जा रहा है. कोरोना वायरस की बि ...

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    भाग चार, नवसृजन की प्रसव पीड़ा है – ‘कोरोना महामारी’

    नरेंद्र सहगल छोड़ने होंगे संस्थागत स्वार्थ सर्वस्वीकृत मंच की आवश्यकता कोरोना महामारी व्यापक एवं भयंकर रूप धारण कर रही है. बड़े-बड़े पूंजीवादी, साम्यवादी, समाजवादी और तथाकथित सुधारवादी देश इसकी चपेट में आकर कराह रहे हैं. इस जानलेवा त्रासदी में भी कुछ बड़े देश हथियारों के परीक्षण की योजना बना रहे हैं. साम्यवादी चीन पर कोरोना वायरस को बनाने और इसे पूरे विश्व में फैलाने का आरोप लग रहा है. एक प्रकार से यह विश्व ...

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    क्या प्रवासी श्रमिक भोजन के लिए तरसने वाले लोग हैं या देश की एकता के सेतु

    श्याम प्रसाद कोरोना से पूरा देश लॉकडाउन हो गया. प्रवासी श्रमिकों की अपने-अपने घर की ओर बाल-बच्चों के साथ पैदल चलने वाली हृदय विदारक तस्वीर ने देश की जनता के हृदयों को झकझोर दिया. सबसे पहले हमारी नजर में यह बात आई थी कि हर राज्य में हमारी कल्पना से परे प्रवासी श्रमिक जीवन बिता रहे हैं. ये प्रवासी श्रमिक कौन हैं? उनकी समस्याएँ क्या-क्या हैं? निकट रास्ते से अधिकार पाने की चाह रखने वाले हमारे राजनैतिक नेता कई ब ...

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    भाग तीन, नवसृजन की प्रसव पीड़ा है – ‘कोरोना महामारी’

    नरेंद्र सहगल भारत का वैश्विक लक्ष्य विश्व कल्याण सर्व सक्षम भारत की आध्यात्मिक परंपरा एकात्म मानववाद ही भारतीयता है                 प्रत्येक व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र किसी दैवी उद्देश्य के साथ धरती पर जन्म लेते हैं. कर्म करने में स्वतंत्र सृष्टि के यह सभी घटक जब अपने-अपने कर्तव्यों को स्वार्थ रहित होकर निभाते हैं तो सृष्टि शांत रहती है. परंतु यही घटक जब अपने वा ...

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    भाग दो – नवसृजन की प्रसव पीड़ा है – ‘कोरोना महामारी’

    नरेंद्र सहगल भौतिकवादी विचारधाराओं का अंत सनातन भारतीय संस्कृति का उदय संपूर्ण विश्व को एक साथ अपनी लपेट में लेने वाले कोरोना वायरस में सभी धर्मों, विचार धाराओं और चिंतन प्रहारों को अपने गिरेबान में झांकने के लिए बाध्य कर दिया है. जो काम बड़ी-बड़ी क्रांतियां,  दो विश्वयुद्ध, जन संघर्ष, राजनीतिक परिवर्तन, सामाजिक बगावतें और कथित धर्मगुरू नहीं कर सके, वह काम कोरोना वायरस ने कर दिया है. किसी दिव्य शक्ति के उदय ...

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    नव सृजन की प्रसव पीड़ा है – ‘कोरोना महामारी’

    नरेंद्र सहगल दिशाहीन भौतिकवाद के दुष्परिणाम विश्वगुरू भारत का पुनर्जन्म आध्यात्मिक क्रांति की शुभ बेला निष्ठुर भौतिकवाद की अंधी दौड़ में एक दूसरे को पीछे छोड़ने की प्रतिस्पर्धा में पागल हो चुके विश्व को कोरोना महामारी ने झकझोर कर रख दिया है. समस्त संसार की संचालक दिव्य शक्ति ‘प्रकृति’ के विनाश के कारण ही कोरोना जैसी भयंकर बीमारियां मानवता को पुन: प्रकृति माता की गोद में लौट आने का आह्वान कर रही है. वास्तव म ...

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    दीपनिष्ठा को जगाओ अन्यथा मर जाओगे

    जयराम शुक्ल यह घड़ी बिल्कुल नहीं है शांति और संतोष की, ‘सूर्यनिष्ठा’ सम्पदा होगी गगन के कोष की. यह धरा का मामला है घोर काली रात है, कौन जिम्मेदार है यह सभी को ज्ञात है.. रोशनी की खोज में किस सूर्य के घर जाओगे, ‘दीपनिष्ठा’ को जगाओ अन्यथा मर जाओगे.. प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन को गुन-धुन रहा था कि सयास बालकवि बैरागी के उपरोक्त काव्यांश का स्मरण हो आया. उस दिन बैरागी जी दूसरी पुण्यतिथि भी थी. कवि को ...

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