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    समग्र क्रांति के अग्रदूत – योगेश्वर श्रीकृष्ण

    नरेंद्र सहगल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष अधर्मियों, आतंकवादियों, समाजघातकों, देशद्रोहियों और भ्रष्टाचारियों को समाप्त करने के उद्देश्य से धराधाम पर अवतरित हुए योगेश्वर श्रीकृष्ण जन्म से लेकर अंत तक अपने निर्धारित उद्देश्य के लिए सक्रिय रहे. वे एक आदर्श क्रांतिकारी थे. कृष्ण के जीवन की समस्त लीलाएं/क्रियाकलाप प्रत्येक मानव के लिए प्रेरणा देने वाले अद्भुत प्रसंग हैं. इस संदर्भ में देखें तो श्रीकृष्ण का सारा ...

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    राम मंदिर भूमि पूजन, हिन्दू मन:स्थिति व भारतीय मुसलमान

    गोपाल गोस्वामी, रिसर्च स्कॉलर 05 अगस्त को भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में 482 वर्ष के पश्चात पुनः मंदिर निर्माण कार्य का शुभारंभ हुआ. यह दिन सनातन हिन्दू समाज के लिए मानसिक गुलामी से मुक्ति के आरम्भ के रूप में भी जाना जाएगा. लगभग पांच शती बीत गयी अपने भगवान, आदर्श मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जन्मस्थान को मुक्त करने में. क्या 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी 72 वर्ष कानूनी लड़ाई में फंसी रही अयोध्य ...

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    प्रथम विश्व युद्ध और भारत का मुस्लिम नेतृत्व

    डॉ. श्रीरंग गोडबोले प्रथम विश्व युद्ध में हुई अनेक घटनाओं के कारण भारत के मुस्लिमों का अखिल-इस्लामी चरित्र ब्रिटिश विरोधी रूप धारण करने लगा. इसके अलावा, भारत और मुस्लिम जगत में घटी कुछ घटनाओं के कारण ब्रिटिश शासन के प्रति भारत के मुस्लिमों का रुख मित्रता (1906-1911) से संघर्ष में बदल गया. ब्रिटिश शासन के प्रति भारत के मुस्लिमों के रवैये में आमूल परिवर्तन लानेवाली प्रथम विश्व युद्ध की घटनाओं का अध्ययन एवं वि ...

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    सब भारतवासी मूलनिवासी – जनजातियों के धर्मान्तरण के पीछे राष्ट्र को खंडित करने का षड्यंत्र

    भारतीय सनातन संस्कृति सदैव  से आक्रांताओं के निशाने पर रही है, जिसका क्रम मुगलों एवं अंग्रेजों से स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भी थम नहीं पाया है. विदेशी शक्तियां एवं देश के अन्दर राष्ट्रघाती तत्वों द्वारा गुपचुप तरीके से भारत राष्ट्र की एकता-अखण्डता-संस्कृति को खण्डित करने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्रों के जाल बिछाए जा रहे हैं जो सरसरी निगाह से देखने पर तो स्पष्ट नहीं दिखते, किन्तु यदि गहराई के साथ जमीनी स् ...

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    सनातन हिन्दू धर्म-संस्कृति का संवाहक जनजातीय समाज

    भारतीय सनातन धर्म एवं संस्कृति जो शाश्वत है, जिसके संस्थापक या प्रारंभ काल का कोई भी उल्लेख नहीं मिलता. लेकिन यह सदैव अपनी विराटता के साथ रहती आई. इतना ही नहीं बल्कि इसी सनातन धर्म से सिक्ख, बौद्ध, जैन पंथों का प्रादुर्भाव हुआ. हमारी सनातन संस्कृति बिना किसी बन्धन के लोगों के स्वतंत्र चिन्तन -मत के अनुसार बहुलतावादी सांस्कृतिक जीवटता के इतिहास को संजोकर अमर चेतना की तरह प्रवाहित हो रही है. अनेकानेक षड्यंत्र ...

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    भारत में ‘विश्व मूल निवासी दिवस’ का औचित्य…?

    प्रशांत पोळ कल ‘विश्व मूल निवासी दिवस’ (World Indigenous Day) है. सन् १९९४ में संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस दिवस की घोषणा की थी. इस कल्पना को लेकर सन १९८२ में Working Group on Indigenous People समूह की पहली बैठक ९ अगस्त को हुई थी. इसलिए ९ अगस्त को ‘विश्व मूल निवासी दिवस’ मनाया जाता है. इसके पीछे संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका बड़ी स्पष्ट है. उनके अनुसार विश्व के लगभग ९० देशों में ४७.६ करोड़ मूल निवासी रहते हैं, ज ...

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    संस्कृत भाषा : वैदिक से वैश्विक यात्रा तक

    सूर्यप्रकाश सेमवाल देववाणी संस्कृत भाषा विश्व की ही नहीं सृष्टि की प्रथम सर्वस्वीकार्य भाषा मानी जाती है. यह श्रेष्ठ वाणी –वैदिक संस्कृत एवं लौकिक संस्कृत के रूप में प्रचलित हुई. वैदिक संस्कृत में जहां वेद-पुराण एवं उपनिषद् आदि वांड्मय की रचना हुई, वहां थोड़ा सहज, सरल भाषा लौकिक संस्कृत कहलाई. जिसमें संस्कृत के आदिकवि वाल्मीकि ने जनता के मन मस्तिष्क में रमने वाली रामकथा को रामायण नामक ग्रन्थ के रूप में व्यक् ...

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    राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण – अंतिम

    नरेन्द्र सहगल   मंदिर निर्माण का शुभारंभ राष्ट्रीय आस्था की विजय अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के शुभारंभ का ऐतिहासिक कार्यक्रम भारत की सनातन संस्कृति पर आधारित परम वैभवशाली राष्ट्र के पुनर्जागरण की गगनभेदी रणभेरी था. भारत के सभी प्रमुख संतों-महात्माओं की उपस्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शास्त्रीय विधि के अनुसार पूजन किया. मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम को समर्पित इस कार्यक्रम ...

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    राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष : अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण – 14

    नरेंद्र सहगल राष्ट्र की अस्मिता : ‘शौर्य दिवस’ 06 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बने एक जर्जर ढांचे को भारत के राष्ट्रीय स्वाभिमान पर एक विदेशी आक्रांता द्वारा लगाया गया कलंक का टीका मानकर लाखों कारसेवकों की भीड़ ने इस कलंक को मिटा दिया था. यह एक ऐतिहासिक सच्चाई है कि श्रीराम जन्मभूमि को मुक्त करवाने का यह 78वां प्रयास था. इस दिन को कुछ लोगों ने शौर्य दिवस कहा तो कुछ लोगों ने शर्म का दिन करा ...

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    श्रीराम मंदिर – यह केवल एक मंदिर नहीं, भारत के सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है

    डॉ. मनमोहन वैद्य सह सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अयोध्या में रामजन्मभूमि पर करोड़ों भारतीयों की आस्था और आकांक्षा के प्रतीक भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण का शुभारम्भ 5 अगस्त, 2020 को होने जा रहा है. भारत के सांस्कृतिक इतिहास में यह पर्व  स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा. 1951 में सौराष्ट्र (गुजरात) के वेरावल में सुप्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा स्वतंत्र भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजें ...

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