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    समग्र क्रांति के अग्रदूत – योगेश्वर श्रीकृष्ण

    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष अधर्मियों, आतंकवादियों, समाजघातकों, देशद्रोहियों और भ्रष्टाचारियों को समाप्त करने के उद्देश्य से धराधाम पर अवतरित हुए योगेश्वर श्रीकृष्ण जन्म से लेकर अंत तक अपने निर्धारित उद्देश्य के लिए सक्रिय रहे. वे एक आदर्श क्रांतिकारी थे. कृष्ण के जीवन की समस्त लीलाएं/क्रियाकलाप प्रत्येक मानव के लिए प्रेरणा देने वाले अद्भुत प्रसंग हैं. इस संदर्भ में देखें तो श्रीकृष्ण का सारा जीवन ही कर्म ...

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    भारतीय ज्ञान का खजाना – 8

    भारतीय शिल्पकला - कला की सर्वोच्च अभिव्यक्ति सन् 1957 की घटना है. उज्जैन में रहने वाले एवं पुरातत्व विषय के विश्व प्रसिद्ध जानकार, डॉक्टर श्रीधर विष्णु वाकणकर, ट्रेन से दिल्ली से इटारसी प्रवास कर रहे थे. भोपाल स्टेशन निकलने के बाद उन्हें पहाड़ों के बीच कुछ विशेष फॉर्मेशन दिखाई दिए. डॉक्टर वाकणकर ने वे फॉर्मेशन तत्काल पहचान लिए, क्योंकि उन्होंने वैसे ही फॉर्मेशन स्पेन और फ्रांस में भी देखे थे. इसीलिए डॉक्टर व ...

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    The Caravan, तुलसी गेबार्ड और संघ

    दिल्ली से एक मासिक पत्रिका निकलती है - The Caravan. चंपक, सरिता, मुक्ता, गृहशोभा प्रकाशित करने वाली ‘दिल्ली प्रेस’ की यह पत्रिका सन 1988 में बंद हो गयी थी. लेकिन 2009 में इसे मजबूत फंडिंग के साथ फिर से नए अवतार में लाने का प्रयास हुआ और 2010 में Caravan, नए कलेवर में लोगों के सामने आयी. (http://indiafacts.org/caravan-2-0-why-a-defunct-leftist-magazine-was-revived/) यह पत्रिका शुरु से ही हिन्दू विरोधी रही है ...

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    अज्ञात स्वतंत्रता सेनानी : डॉक्टर हेडगेवार – 16

    नरेंद्र सहगल सर्वांग स्वतंत्रता की ओर संघ के बढ़ते कदम 15 अगस्त 1947 को देश दो भागों में विभक्त हो गया. ‘इंडिया दैट इज़ भारत’ और ‘पाकिस्तान’. भारत को राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त होने बाद गांधी जी ने ‘कांग्रेस का काम पूरा हो गया, अब इसे समाप्त कर के एक सेवादल के रूप में परिवर्तित कर देना चाहिए’ का सुझाव कांग्रेस के नेताओं के समक्ष रखा था. परन्तु सत्ता के मोह में फंस चुके कांग्रेस के नेताओं ने गांधी जी की एक न ...

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    वे पन्द्रह दिन – समापन, 15 अगस्त के बाद…

    भारत तो स्वतंत्र हो गया. विभाजित होकर..! परन्तु अब आगे क्या..? दुर्भाग्य से गांधी जी ने मुस्लिम लीग के बारे में जो मासूम सपने पाल रखे थे, वे टूट कर चूर-चूर हो गए. गांधी जी को लगता था, कि ‘मुस्लिम लीग को पाकिस्तान चाहिये, उन्हें वो मिल गया. अब वो क्यों किसी को तकलीफ देंगे..?’ पांच अगस्त को ‘वाह’ के शरणार्थी शिबिर में उन्होंने यह कहा था, कि मुस्लिम नेताओं ने उन्हें आश्वासन दिया है कि ‘हिन्दुओं को कुछ नहीं होग ...

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    अज्ञात स्वतंत्रता सेनानी : डॉक्टर हेडगेवार – 15

    नरेंद्र सहगल अखंड भारत की सर्वांग स्वतंत्रता भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और मुस्लिम लीग की पूर्ण सहमति के बाद विश्व के सबसे प्राचीन राष्ट्र के टुकड़े कर के अंग्रेज अपने घर चले गए. इस दुर्भाग्यशाली अवसर पर ‘अखंड भारत की पूर्ण स्वतंत्रता’ के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले लाखों स्वतंत्रता सेनानियों की आत्मा कितना रोई होगी, कितना तड़पी होगी, इसका अंदाजा वह कांग्रेसी नहीं लगा सकते जो हाथ में कटोरा लेकर अंग्रेजों ...

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    वे पन्द्रह दिन… / 15 अगस्त, 1947

    आज की रात तो भारत मानो सोया ही नहीं है. दिल्ली, मुम्बई, कलकत्ता, मद्रास, बंगलौर, लखनऊ, इंदौर, पटना, बड़ौदा, नागपुर... कितने नाम लिए जाएं. कल रात से ही देश के कोने-कोने में उत्साह का वातावरण है. इसीलिए इस पृष्ठभूमि को देखते हुए कल के और आज के पाकिस्तान का निरुत्साहित वातावरण और भी स्पष्ट दिखाई देता है. रात भर शहर में घूम-घूमकर, स्वतंत्रता का आनंद लेने के पश्चात् सभी लोग अपने-अपने घरों में पहुंच चुके हैं और उन ...

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    अज्ञात स्वतंत्रता सेनानी : डॉक्टर हेडगेवार – 14

    नरेंद्र सहगल संघ संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार के देहावसान के बाद संघ के सभी अधिकारी एवं कार्यकर्ता अपने नए सरसंघचालक श्रीगुरुजी के नेतृत्व में डॉक्टर जी द्वारा निर्धारित कार्य-विस्तार के लक्ष्य को पूरा करने हेतु परिश्रमपूर्वक जुट गए. श्रीगुरुजी एवं सहयोगी संघ अधिकारियों के सामूहिक प्रयास के फलस्वरूप अनेक युवा स्वयंसेवक अपने घर-परिवार छोड़कर देश के प्रायः सभी प्रांतों में प्रचारक के रूप में फैल गए. पहले जो संघ शि ...

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    वे पन्द्रह दिन… / 14 अगस्त, 1947

    कलकत्ता.... गुरुवार. 14 अगस्त सुबह की ठण्डी हवा भले ही खुशनुमा और प्रसन्न करने वाली हो, परन्तु बेलियाघाट इलाके में ऐसा बिलकुल नहीं है. चारों तरफ फैले कीचड़ के कारण यहां निरंतर एक विशिष्ट प्रकार की बदबू वातावरण में भरी पड़ी है. गांधी जी प्रातःभ्रमण के लिए बाहर निकले हैं. बिलकुल पड़ोस में ही उन्हें टूटी-फूटी और जली हुई अवस्था में कुछ मकान दिखाई देते हैं. साथ चल रहे कार्यकर्ता उन्हें बताते हैं कि परसों हुए दंगों ...

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    अज्ञात स्वतंत्रता सेनानी : डॉक्टर हेडगेवार – 13  

    नरेंद्र सहगल भारतवर्ष की सर्वांग स्वतंत्रता के लिए चल रहे सभी आंदोलनों/संघर्षों पर डॉक्टर हेडगेवार की दृष्टि टिकी हुई थी,यही वजह रही कि डॉक्टर हेडगेवार ने अस्वस्थ रहते हुए भी अपनी पूरी ताकत संघ की शाखाओं में लाखों की संख्या में स्वयंसेवकों अर्थात् स्वतंत्रता सेनानियों के निर्माण कार्य में झोंक दी.भविष्य में होने वाले द्वितीय विश्वयुद्ध के समय ब्रिटिश साम्राज्यवाद की होने वाली पतली हालत को उन्होंने भांप लिया ...

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