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    आपातकाल, पुलिसिया कहर और संघ – भाग 2

    सत्ता प्रायोजित आतंकवाद इलाहबाद हाईकोर्ट द्वारा सजा मिलने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने अपने राजनीतिक अस्तित्व और सत्ता को बचाने के उद्देश्य से जब 25 जून 1975 को रात के 12 बजे आपातकाल की घोषणा की तो देखते ही देखते पूरा देश पुलिस स्टेट में परिवर्तित हो गया. सरकारी आदेशों के प्रति वफ़ादारी दिखाने की होड़ में पुलिस वालों ने बेकसूर लोगों पर बेबुनियाद झूठे आरोप लगाकर गिरफ्तार करके जेलों में ठूंसना शुरू ...

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    आपातकाल, पुलिसिया कहर और संघ

    भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 में उस समय एक काला अध्याय जुड़ गया, जब देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सभी संवैधानिक व्यवस्थाओं, राजनीतिक शिष्टाचार तथा सामाजिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर मात्र अपना राजनीतिक अस्तित्व और सत्ता बचाने के लिए देश में आपातकाल थोप दिया. उस समय इंदिरा गांधी की अधिनायकवादी नीतियों, भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा और सामाजिक अव्यवस्था के विरुद्ध सर्वोदयी नेता जयप्रकाश नार ...

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    डॉ. हेडगेवार ने राष्ट्रीय दृष्टि जागृत कर समाज को संगठित करने का कार्य शुरू किया

    संघ संस्थापक के व्यक्तित्व को समझे बिना संघ को समझना संभव नहीं चुनाव के समय भारत में युद्ध सी स्थिति दिख रही थी. अब सारी धूल बैठने के बाद चित्र स्पष्ट हो गया है. देश की जनता ने राष्ट्रीय पक्ष को मज़बूत समर्थन दे कर सत्तासीन किया है. आरोप-प्रत्यारोप के घमासान में विभाजनवादी राजनीति करने वाले खेमे से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी अकारण-आधारहीन आरोप लगते रहे. स्वातंत्र्यवीर सावरकर और द्वितीय सरसंघचालक माधव सदा ...

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    पृथ्वी पर समभाव – सहचर का भारतीय दर्शन

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पांचवे सरसंघचालक कुप्पहली सीतारमय्या सुदर्शन का जन्म 19 जून, 1931 को रायपुर में हुआ था. मूल रूप से कर्नाटक के एक गाँव कुप्पहली के निवासी अपने पिता सीतारमय्या के वन विभाग में कार्यरत होने के कारण लंबे समय तक मध्य प्रदेश में रहे. यहीं उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई और उन्होंने जबलपुर से दूरसंचार अभियांत्रिकी में बी.ई. किया. वे नित्य प्रति के जीवन में स्वदेशी के आग्रही थे और कार्यकर्ताओं ...

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    कारगिल युद्ध – रणक्षेत्र में भारतीय सेना की वीरता, धैर्य और दृढ़ निश्चय की अतुलनीय गाथा

    आज ही के दिन भारत ने कारगिल में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की सार्वजनिक घोषणा की थी, भारत सरकार की कूटनीतिक जीत के साथ भारतीय सेना ने मानवीयता और बहादुरी का उदाहरण प्रस्तुत किया था. भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 07 जून, 1999 को राष्ट्र के नाम संबोधन दिया. विषय भारतीय सीमा के अन्दर कारगिल में पाकिस्तानी सेना की घुसपैठ का था. उन्होंने इसे गंभीर स्थिति बताते हुए कहा, “कोई भी देश इस तरह के आक्रमण को ...

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    कांग्रेस के लिए न महाराणा प्रताप महान और न ही सावरकर वीर

    मार्क्सवादी फोबिया से ग्रस्त कांग्रेसियों के लिए न तो वीर सावरकर ‘वीर’ हैं और न ही महाराणा प्रताप ‘महान’. हां, चित्तौड़गढ़ में 40,000 लोगों का नरसंहार कर अजमेर शरीफ पर सजदा करने वाला अकबर जरूर इनके लिए महान है. अकबर के समय में लिखे गए राजदरबारी फारसी वृत्तान्त ही इनके ऐतिहासिक स्रोत हैं. राजस्थान के लिखित और वहां पढ़े जाने वाले साहित्य को ये देखना तक उचित नहीं समझते, क्योंकि इनकी मानसिकता मार्क्स के इस कथन से ...

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    राम नाम के बहाने

    आज की राजनीति में राम नाम की महिमा के सार्वकालिक महत्व की बात को कोई नहीं झुठला सकता. यह देश राम राज्य की आदर्श कल्पना से लेकर गांधी के राम तक के प्रयोग का साक्षी रहा है. पिछले सप्ताह जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का काफिला बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र के भाटपारा क्षेत्र (24 परगना जिला) से गुजर रहा था तो कुछ व्यक्तियों ने जय श्रीराम के नारे लगाए. जिसके बाद ममता बनर्जी नाराज हो गई थी. इस घटना के एक वी ...

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    कांग्रेस ने सुभाष चन्द्र बोस, श्री अरविन्द और सावरकर को ‘आतंकवादी’ बताया था

    कांग्रेस ने हर अवसर पर सावरकर को अपमानित किया लोकसभा में 17 नवम्बर, 1972 को एक संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा हो रही थी. उस दिन अंडमान और निकोबार द्वीप का नाम बदलकर ‘शहीद और स्वराज द्वीप’ किया जाना प्रस्तावित था. चर्चा के दौरान कांग्रेस (आई) के सांसद, राम गोपाल रेड्डी ने सुभाष चन्द्र बोस, श्री अरविन्द और विनायक दामोदर सावरकर को ‘आतंकवादी’ कहकर संबोधित किया. जब इसका विरोध हुआ तो रेड्डी ने कहा कि मुझे यह कहने ...

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    भारत की जीवनदृष्टि एकात्म और सर्वांगीण है

    भारत की जीवनदृष्टि (View of Life) दुनिया में विशिष्ट (Unique) है, कारण उसका आधार आध्यात्मिकता (Spirituality) है. इसीलिए यह दृष्टि एकात्म है और सर्वांगीण भी है. इसी कारण भारत सत्य के अनेक रूप देखता है, उस तक पहुँचने के मार्ग विभिन्न होते हुए भी वे सभी समान हैं यह मानता है. इसी कारण वह अनेकता में एकता देखता है और विविधता में ऐक्य की प्रस्थापना कर सकता है. वह विविधता को भेद नहीं समझता. प्रत्येक व्यक्ति में, चर ...

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    भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए आनंद का दिन है – डॉ. मनमोहन वैद्य

    यह चुनाव भारत की दो भिन्न अवधारणाओं (Idea of Bharat) के बीच था. एक तरफ भारत की प्राचीन अध्यात्म आधारित एकात्म (Integral), सर्वांगीण (Holistic) और सर्वसमावेशक (All inclusive) जीवनदृष्टि या चिंतन है. जिसे दुनिया में हिन्दू जीवन दृष्टि या हिन्दू चिंतन के नाम से जाना जाता रहा है. दूसरी ओर वह अभारतीय दृष्टि थी जो भारत को अनेक अस्मिताओं में (identities) बाँट कर देखती रही है. और अपने निहित स्वार्थ के लिए समाज को ज ...

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