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    स्वामी विवेकानंद ने विश्व बंधुत्व का विचार सबके सम्मुख रखा था – डॉ. मनमोहन वैद्य

    कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ के साथ करने पर संघ से परिचित और राष्ट्रीय विचार के लोगों आश्चर्य होना स्वाभाविक है. भारत के वामपंथी, माओवादी और क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थ के लिए राष्ट्र विरोधी तत्वों के साथ खड़े तत्वों को इससे आनंद होना भी अस्वाभाविक नहीं है. वैसे, इसका अर्थ ये नहीं कि राहुल गांधी जिहादी मुस्लिम आतंकवाद की वैश्विक त्रासदी से अनजान ह ...

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    ‘सवर्ण’ और ‘दलित’ – हिन्दुओं को बांटने का षड्यंत्र है यह समाजघातक शब्दावली

    मैं अपनी बात को एक प्रश्न के साथ शुरु करता हूं. जब अनेक सड़कों, शहरों, योजनाओं, संस्थाओं और अदारों के नाम बदले जा रहे हैं तो फिर समाज को तोड़ने वाली सवर्ण और दलित जैसी खतरनाक शब्दावली को क्यों नहीं बदला जा रहा? इन दिनों दलित बनाम सवर्ण के प्रश्न पर हो रहे राजनीतिक घमासान को देखकर उन अंग्रेज शासकों की आत्माएं फूली नहीं समा रही होंगी, जिन्होंने अपने सम्राज्यवादी शिकंजे को कसने के लिए हिन्दू समाज में जाति आधारित ...

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    अर्बन नक्सलियों में अटकी माओवादियों की जान

    अगस्त 2008 में बिहार में भयानक बाढ़ आई थी. बताया गया था कि नेपाल का कुसहा बांध टूटने की वजह से यह बाढ़ आई है. यही वह साल था, जब पहली बार मेरा परिचय 'अर्बन नक्सल' यानि शहरी नक्सलवाद शब्द से हुआ था. बिहार में बाढ़ का पानी उतर चुका था. एक शाम 'बाढ़ मुक्ति अभियान' के संयोजक दिनेश कुमार मिश्र का फोन आया. टिकट भिजवा दिया है, पटना आना है. उनके आदेश के बाद पटना पहुंच गया. देश के एक दर्जन पत्रकारों के साथ बिहार की ब ...

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    स्वयंसेवक ‘अटल’

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निष्ठावान स्वयंसेवक अटल बिहारी वाजपेयी बाल्यकाल से लेकर जीवन के अंतिम क्षण तक अपने स्वयंसेवकत्व पर अटल रहे. संघ का स्वयंसेवक अर्थात् अपने संगठन, समाज और राष्ट्र के हित में स्वयं की प्रेरणा से निःस्वार्थ भाव से निष्ठापूर्वक निरंतर काम करने वाला आदर्श नागरिक. 15 वर्ष की आयु में डी.ए.वी. कॉलेज कानपुर के छात्रावास की संघ शाखा में अपना संघ जीवन प्रारम्भ करने वाले अटल जी को वामपंथी विचा ...

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    ‘सर्वांग स्वतंत्रता/सर्वांगीण विकास’ की ओर संघ के बढ़ते कदम

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम - 16 (अंतिम) 15 अगस्त 1947 को देश दो भागों में विभक्त हो गया. ‘इंडिया दैट इज़ भारत’ और ‘पाकिस्तान’. भारत को राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त होने बाद गांधी जी ने ‘कांग्रेस का काम पूरा हो गया, अब इसे समाप्त कर के एक सेवादल के रूप में परिवर्तित कर देना चाहिए’ का सुझाव कांग्रेस के नेताओं के समक्ष रखा था. परन्तु सत्ता के मोह में फंस चुके कांग्रेस के नेताओं ने गांधी जी की एक ...

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    ‘खंडित भारत’ की ‘आधी अधूरी’ राजनीतिक स्वतंत्रता

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 15 1942 में हुए ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने के साथ स्वातंत्र्य वीर सावरकर ने एक आशंका प्रकट करते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को विशेषतया महात्मा गांधी जी को चेताया था - ‘भारत छोड़ो’ का अंत कहीं भारत तोड़ो न हो जाए. ‘1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम’ जैसे ऐतिहासिक शोधग्रंथ के लेखक तथा अंडमान जेल में कोल्हू के बैल की तरह अमानवीय यातनाएं भो ...

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    ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में स्वयंसेवकों की अतुलनीय शहादतें

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 14 संघ संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार के देहावसान के बाद संघ के सभी अधिकारी एवं कार्यकर्ता अपने नये सरसंघचालक श्री गुरुजी के नेतृत्व में डॉक्टर जी द्वारा निर्धारित कार्य-विस्तार के लक्ष्य को पूरा करने हेतु परिश्रमपूर्वक जुट गए. श्रीगुरुजी एवं सहयोगी संघ अधिकारियों के सामूहिक प्रयास के फलस्वरूप अनेक युवा स्वयंसेवक अपने घर-परिवार छोड़कर देश के प्रायः सभी प्रांतों में प्रच ...

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    अंतिम श्वास तक ‘अखंड भारत की पूर्ण स्वतंत्रता’ की चिंता

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 13 भारतवर्ष की सर्वांग स्वतंत्रता के लिए चल रहे सभी आंदोलनों/संघर्षों पर डॉक्टर हेडगेवार की दृष्टि टिकी हुई थी, यही वजह रही कि डॉक्टर हेडगेवार ने अस्वस्थ रहते हुए भी अपनी पूरी ताकत संघ की शाखाओं में लाखों की संख्या में स्वयंसेवकों अर्थात् स्वतंत्रता सेनानियों के निर्माण कार्य में झोंक दी. भविष्य में होने वाले द्वितीय विश्वयुद्ध के समय ब्रिटिश साम्राज्यवाद की होने ...

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    ‘संघ शिविर’ में महात्मा गांधी के साथ डॉक्टर हेडगेवार की ऐतिहासिक भेंट

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 12 14 फरवरी 1930 को अपने दूसरे कारावास से मुक्त होकर डॉक्टर हेडगेवार ने पुनः सरसंघचालक का दायित्व सम्भाला और संघ कार्य को देशव्यापी स्वरूप देने के लिए दिन-रात जुट गए. अब डॉक्टर जी की शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक शक्तियां संघ-स्वयंसेवकों के शारीरिक, मानसिक तथा बौद्धिक विकास में लगने लगीं. स्वभाव से परिश्रमी, मन से दृढ़ निश्चयी और बुद्धि से चतुर इस महापुरुष ने अपने स ...

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    हजारों स्वयंसेवकों के साथ डॉक्टर हेडगेवार पुनः सश्रम कारावास में

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 11 पूर्व में हुए असहयोग आंदोलन की विफलता से शिक्षा लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अब एक और देशव्यापी आंदोलन करने की योजना बनाई. महात्मा गांधी जी को इस नए, ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ का नेतृत्व सौंप दिया गया. अतः गांधी जी ने 6 अप्रैल 1920 को सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत अपनी ऐतिहासिक दांडी यात्रा के माध्यम से कर दी. गांधी जी ने सरकार द्वारा बनाए गए नमक कानून को तोड़ ...

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