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    कठोर कारावास में वीरव्रती जीवन की तपस्वी दिनचर्या

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 7 हिन्दू धर्म के सिद्धांतों और अधिकांश रीतिरिवाजों में डॉ. हेडगेवार पूर्ण निष्ठा रखते हुए जेल में अपनी दिनचर्या का निर्वाह करते थे. वे यज्ञोपवीत पहनते थे. जेल के नियमों के अनुसार जब उन्हें इसे उतारने के लिए कहा गया तो उन्होंने ऐसा करने से साफ इन्कार कर दिया ‘मैं इसे नहीं उतार सकता, यह मेरा धार्मिक हक है, इसमें दखलअंदाजी करने का आपका कोई अधिकार नहीं बनता’. उस समय ...

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    गांधी जी के असहयोग आंदोलन में अग्रणी भूमिका

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 6 प्रखर राष्ट्रभक्ति की सुदृढ़ मानसिकता के साथ डॉक्टर हेडगेवार ने ‘कांग्रेसी’ कहलाना भी स्वीकार कर लिया. नागपुर अधिवेशन में अपना रुतबा जमाने के बाद वे महात्मा गांधी द्वारा मार्गदर्शित असहयोग आंदोलन को सफल बनाने के लिए जी जान से जुट गए. गांधी जी के आह्वान पर सारा देश अहसयोग आंदोलन में हर प्रकार से शिरकत करने को तैयार हो गया. पूर्व में अनुशीलन समिति द्वारा संचालित ...

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    आजादी के लिए संघर्षरत कांग्रेस को पूर्ण समर्थन

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 5 भारत में चल रहे सभी प्रकार के स्वतंत्रता-आंदोलनों, शस्त्रक्रांति के प्रयत्नों, समाज सुधार के लिए कार्यरत विभिन्न संस्थाओं तथा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के जागरण में जुटी सभी धार्मिक संस्थाओं का निकट से अध्ययन करने के लिए डॉक्टर साहब इनके सभी कार्यकलापों में यथासम्भव भागीदारी करते थे. उनका यह निश्चित मत था कि देश के शत्रुओं को जिस किसी भी मार्ग से भारत भूमि से निकाल ...

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    प्रथम विश्व युद्ध और महाविप्लव की तैयारी

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 4 नेशनल मेडिकल कॉलेज कलकत्ता से डॉक्टरी की डिग्री और क्रांतिकारी संगठन अनुशीलन समिति में सक्रिय रहकर क्रांति का विधिवत प्रशिक्षण लेकर डॉक्टर हेडगेवार नागपुर लौट आए. स्थान-स्थान से नौकरी की पेशकश और विवाह के लिए आने वाले प्रस्तावों का तांता लग गया. डॉक्टर साहब ने बेबाक अपने परिवार वालों एवं मित्रों से कह दिया ‘मैंने अविवाहित रहकर जन्मभर राष्ट्रकार्य करने का फैसला ...

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    डॉक्टरी की शिक्षा और क्रांति का प्रशिक्षण

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम - 3 भारत को ब्रिटिश साम्राज्यवाद के क्रूर पंजे से मुक्त करवाने के लिए समस्त भारत में एक संगठित सशस्त्र क्रांति का आधार तैयार करने हेतु केशवराव हेडगेवार को तत्कालीन राष्ट्रवादी नेताओं विशेषतया लोकमान्य तिलक ने कलकत्ता भेजा था. तिलक की सांस्कृतिक राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रभावित केशवराव नागपुर में सक्रिय रहते हुए बंगाल के क्रांतिकारी दल ‘अनुशीलन समिति’ से भी जुड़ गए ...

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    जब अंग्रेजों ने केशव के भाषणों पर प्रतिबंध लगाया…..

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम - 2 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार जन्मजात स्वतंत्रता सेनानी थे. ‘हिन्दवी स्वराज’ के संस्थापक छत्रपति शिवाजी, खालसा पंथ का सृजन करने वाले दशमेशपिता श्रीगुरु गोविंदसिंह और आर्यसमाज के संगठक स्वामी दयानन्द की भांति डॉ. हेडगेवार ने बालपन में ही संघ जैसे किसी शक्तिशाली संगठन की कल्पना कर ली थी. भारत की सनातन राष्ट्रीय पहचान हिन्दुत्व, भ ...

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    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 1

    एक प्रखर स्वतंत्रता सेनानी डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने जन्मकाल से आज तक नाम, पद, यश, गरिमा, आत्मप्रसंशा और प्रचार से कोसों दूर रहकर राष्ट्र हित में समाजसेवा, धर्मरक्षा और राष्ट्रभक्ति के प्रत्येक कार्य में अग्रणी भूमिका निभाई है. भारत में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध लड़े गए स्वतंत्रता संग्राम में भी संघ ने आजादी के लिए संघर्षरत तत्कालीन प्रायः सभ ...

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    हम क्यों खोते जा रहे हैं अपने शब्दों को, ऐसे तो विलुप्त हो जाएंगे हमारे शब्द

    अपनी भाषा, बोली और अपने शब्दों का उपयोग न करने या उन्हें प्रचलन में न रखने पर वे मृत हो जाते हैं. ‘भाषा किसी भी व्यक्ति एवं समाज की पहचान का एक महत्वपूर्ण घटक तथा उसकी संस्कृति की सजीव संवाहिका होती है.’ आज विविध भारतीय भाषाओं व बोलियों के चलन तथा उपयोग में आ रही कमी, उनके शब्दों का विलोपन तथा विदेशी भाषाओं के शब्दों से प्रतिस्थापन एक गंभीर चुनौती बन कर उभर रही है. अनेक भाषाएं व बोलियां विलुप्त हो चुकी हैं ...

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    प्रणब दा के साथ संघ विरोधियों को भी धन्यवाद

    अपने ही लोगों के तीव्र विरोध के बाद भी पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में नागपुर आए, इसके लिए उनका विशेष अभिनंदन एवं धन्यवाद. वह डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार के कक्ष में भी गए और वहां अपना भाव एकदम स्पष्ट शब्दों में लिखा. वह अत्यंत सहज-सरल थे. परिचय सत्र में जब संघचालक परिचय कराने वाले ही थे कि प्रणबदा ने कहा सब अपना-अपना परिचय देंगे और स्वयं खड़े होकर कहा, ‘मैं प्रणब मुखर ...

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    वैचारिक आदान – प्रदान का बेजा विरोध !

    नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रशिक्षण वर्ग के समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के नाते आने के लिए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी ने अपनी स्वीकृति दी है. इससे देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल है. डॉ. मुखर्जी एक अनुभवी और परिपक्व राजनेता हैं. संघ ने उनके व्यापक अनुभव और उनकी परिपक्वता को ध्यान में रखकर ही उन्हें स्वयंसेवकों के सम्मुख अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित किया है. वहां वह भी संघ के विच ...

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