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    कांग्रेस ने सुभाष चन्द्र बोस, श्री अरविन्द और सावरकर को ‘आतंकवादी’ बताया था

    कांग्रेस ने हर अवसर पर सावरकर को अपमानित किया लोकसभा में 17 नवम्बर, 1972 को एक संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा हो रही थी. उस दिन अंडमान और निकोबार द्वीप का नाम बदलकर ‘शहीद और स्वराज द्वीप’ किया जाना प्रस्तावित था. चर्चा के दौरान कांग्रेस (आई) के सांसद, राम गोपाल रेड्डी ने सुभाष चन्द्र बोस, श्री अरविन्द और विनायक दामोदर सावरकर को ‘आतंकवादी’ कहकर संबोधित किया. जब इसका विरोध हुआ तो रेड्डी ने कहा कि मुझे यह कहने ...

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    भारत की जीवनदृष्टि एकात्म और सर्वांगीण है

    भारत की जीवनदृष्टि (View of Life) दुनिया में विशिष्ट (Unique) है, कारण उसका आधार आध्यात्मिकता (Spirituality) है. इसीलिए यह दृष्टि एकात्म है और सर्वांगीण भी है. इसी कारण भारत सत्य के अनेक रूप देखता है, उस तक पहुँचने के मार्ग विभिन्न होते हुए भी वे सभी समान हैं यह मानता है. इसी कारण वह अनेकता में एकता देखता है और विविधता में ऐक्य की प्रस्थापना कर सकता है. वह विविधता को भेद नहीं समझता. प्रत्येक व्यक्ति में, चर ...

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    भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए आनंद का दिन है – डॉ. मनमोहन वैद्य

    यह चुनाव भारत की दो भिन्न अवधारणाओं (Idea of Bharat) के बीच था. एक तरफ भारत की प्राचीन अध्यात्म आधारित एकात्म (Integral), सर्वांगीण (Holistic) और सर्वसमावेशक (All inclusive) जीवनदृष्टि या चिंतन है. जिसे दुनिया में हिन्दू जीवन दृष्टि या हिन्दू चिंतन के नाम से जाना जाता रहा है. दूसरी ओर वह अभारतीय दृष्टि थी जो भारत को अनेक अस्मिताओं में (identities) बाँट कर देखती रही है. और अपने निहित स्वार्थ के लिए समाज को ज ...

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    “सिक्ख दंगे – कांग्रेस का दोहरा चरित्र”

    इटली के चिंतक, विचारक व राजनीति विज्ञानी मकियावेली ने जो कहा है, कांग्रेस उसके बहुत ही समीप है - “ज्ञानियों ने कहा है कि जिसका भविष्य देखना हो उसका भूतकाल देख लो”. इसके बाद कांग्रेस के सिक्ख दंगों से जुड़ाव को लेकर अमेरिकी कवि, चित्रकार व विचारक इमर्सन की कही एक बात भी स्मरण आती है - “उचित रूप से देखें तो इतिहास कुछ भी नहीं है, सब कुछ मात्र आत्मकथा है”. सिक्ख दंगों के समूचे संदर्भों में ये दो बातें कांग्रेस ...

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    1857 के बाद मुस्लिम तुष्टिकरण, साम्प्रदायिकता और विभाजन

    स्वतंत्रता संग्राम की व्यापकता, तीव्रता और प्रभाव डलहौजी ने भारत से जाने के बाद, अगले दिन (29 फरवरी, 1956) ही विक्टोरिया को एक पत्र लिखा. उसने अपनी महारानी को बताया कि भारत में शांति कब तक बनी रहेगी, इसका कोई भी सही आंकलन नहीं कर सकता. उस पत्र में आगे लिखा कि इसमें कोई छिपाव नहीं है कि किसी भी समय संकट उठ खड़ा हो सकता है. भारत का अगला गवर्नर-जनरल कैनिंग बना और उसने भी डलहौजी के मत की पुष्टि की.[i] इस चिट्ठी ...

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    संघ और राजनीति

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना के समय से ही स्वयं को सम्पूर्ण समाज का संगठन मानता, बताता रहा है. स्वतंत्रता के पश्चात भी संघ की इस भूमिका में कोई अंतर नहीं आया. इसलिए स्वतंत्रता के पश्चात 1949 में संघ का जो संविधान बना उस में भी यह स्पष्ट है कि यदि कोई स्वयंसेवक राजनीति में सक्रिय होना चाहता है तो वह किसी भी राजनैतिक दल का सदस्य बन सकता है. यह संविधान भारतीय जनसंघ की स्थापना के पहले बना है. जनसंघ की स्थापन ...

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    जिन्ना महान कैसे – जिन्ना ने कभी नहीं की दंगे रुकवाने की कोशिश

    कांग्रेस में हाल ही में शामिल हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने जिस जिन्ना की तारीफ में कसीदे पढ़े. जिस मोहम्मद अली जिन्ना का भी देश की तरक्की और आजादी में योगदान बताया. वह जिन्ना लाखों हिन्दुओं और सिक्खों के गुनहगार हैं. रावलपिंडी में मुस्लिम लीग के गुंडों ने जमकर हिन्दुओं और सिक्खों को मारा, उनकी संपति लूटी गई. पर, जिन्ना ने कभी अपने लोगों से दंगा रुकवाने की अपील नहीं की. अगस्त, 1947, भारत में लगभग 300 वर्ष रहने के ...

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    संघ और गांधीजी

    चुनाव का शंख बज चुका है. सभी दल अपनी-अपनी संस्कृति और परम्परा के अनुसार चुनावी भाषण भी दे रहे हैं. एक दल के नेता ने कहा कि इस चुनाव में आपको गांधी या गोडसे के बीच चुनाव करना है. एक बात मैंने देखी है. जो गांधी जी के असली अनुयायी हैं, वे अपने आचरण पर अधिक ध्यान देते हैं, वे कभी गोडसे का नाम तक नहीं लेते. संघ में भी गांधी जी की चर्चा तो अनेक बार होती देखी है, पर गोडसे के नाम की चर्चा मैंने कभी नहीं सुनी है. पर ...

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    आर्टिकल 370 – शेख अब्दुल्ला की ज़िद पर नेहरू ने संविधान सभा में पास कराया विघटनकारी अनुच्छेद

    न तो शेख अब्दुल्ला और न ही गोपालस्वामी स्थायी है. भारत सरकार की ताकत और हिम्मत पर भविष्य निर्भर करेगा और अगर हमें अपनी ताकत पर भरोसा नहीं होगा, तो हम एक राष्ट्र के रूप में मौजूद नहीं रह पाएंगे - सरदार पटेल सरदार पटेल नहीं चाहते थे विघटनकारी अनुच्छेद 370 आईसीएस अधिकारी रहे वी. शंकर अपनी किताब ‘माय रेमिनिसेंस ऑफ सरदार पटेल’ में लिखते हैं कि संविधान सभा की सामान्य छवि को सबसे ज्यादा खतरा उस प्रस्ताव से हुआ जो ...

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    हिन्दुस्थान भारतवासियों का है और पूर्ण स्वराज्य हमारा ध्येय है – डॉ. हेडगेवार

    मैं अच्छी तरह जानता हूं कि मातृभूमि के भक्तों को दमन की चक्की में पीसने वाली सरकार पर मेरे कथन का कोई भी परिणाम नहीं होने वाला है. फिर भी मैं इस बात को दोहराना चाहता हूं कि हिन्दुस्थान भारतवासियों के लिए ही है और पूर्ण स्वराज्य हमारा ध्येय है. आज तक ब्रिटिश प्रधानों एवं शासकों द्वारा उद्घोषित ‘आत्म निर्णय’ का नारा यदि कोरा ढोंग मात्र है तो सरकार खुशी से मेरे भाषण को राजद्रोहात्मक समझे, पर ईश्वर के न्याय पर ...

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