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    भारतीय कालगणना ही पूर्ण वैज्ञानिक है

    वर्ष-प्रतिपदा (06 अप्रैल) से युगाब्द 5121 विक्रमी 2076 तथा शालिवाहन शक संवत्‌ 1941 का शुभारम्भ हो रहा है. अंग्रेजों के भारत में आने के पहले तक भारत का जन-समुदाय इन्हीं संवतों को मानता था. समाज की व्यवस्था ऐसी थी कि बिना किसी प्रचार के हर व्यक्ति को तिथि, मास व वर्ष का ज्ञान हो जाता था. अमावस्या को स्वतः ही बाजार व अन्य काम-काज बन्द रखे जाते थे. एकादशी, प्रदोष आदि पर व्रत-उपवास भी लोग रखते थे. तात्पर्य यह है ...

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    भारत का अध्यात्म आधारित विचार सर्वसमावेशी (inclusive) और उदार है

    मेरे परिचित परिवार की एक छात्रा जयपुर में पढ़ती है. जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल में वह स्वयंसेवी (वालंटियर) के नाते जुड़ी थी. पहले दिन के बाद उसने अपना अनुभव बताया कि सभी सत्रों में, वक्ताओं और प्रबंधकों में भी ‘लेफ़्ट’ का साफ प्रभाव और वर्चस्व दिखता है. मुझे यह जानकर आश्चर्य नहीं हुआ, अपेक्षित था. परंतु उसने एक और अनुभव बताया कि उनकी टीम लीडर, जो एक घोर वामपंथी एक्टिविस्ट है, ने सहज बातचीत में कहा कि इस बार हम ...

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    वह रात, जब कश्मीर घाटी में इस्लामिक आतंकवादियों ने 24 हिन्दुओं को बेहरहमी से मार डाला

    रामकिशन धर वर्ष 2018 में एक अंग्रेजी पत्रिका को बताते हैं कि, “बगल वाली मस्जिद से पंडितों और भारत के खिलाफ ऊंची आवाज में नारे लगने शुरू होते ही हम समझ जाते थे कि हमारा यहाँ से जाने का समय आ गया है.” ऐसा 1989 से लगातार होता रहा और आज जम्मू-कश्मीर हिन्दुओं से लगभग खाली हो चुका है. साल 1994 तक 2 लाख और 2003 तक विस्थापितों की संख्या 3 लाख से भी ऊपर चली गयी. इस साल तक वहां मात्र 7823 हिन्दू बचे थे. नाड़ीमर्ग नरस ...

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    छत्तीसिंहपुरा – जब इस्लामिक आतंकियों ने किया था 36 सिक्खों का नरसंहार

    दिसंबर 2000 में भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने दो पाकिस्तानी आतंकवादियों को गिरफ्तार किया. उनमें से एक आतंकी सियालकोट का रहने वाला मोहम्मद सुहैल मलिक था. वह अक्तूबर 1999 में चोरी-छिपे भारत में घुसा था. सेना की एक चौकी और बस पर हुए आतंकी हमलों में शामिल, सुहैल का न्यूयॉर्क टाइम्स के एक पत्रकार ने जेल में इंटरव्यू लिया. जिसमें उसने खुलासा किया कि छत्तीसिंहपुरा नरसंहार की घटना में वह भी शामिल था. जिसका उसे कोई ख ...

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    इंदौर और मेरठ की घटनाओं पर मीडिया ने क्यों साधी चुप्पी

    मेरठ में मुसलमानों की भीड़ अतिक्रमण हटाने के विरोध में पुलिस पर फायरिंग करती है. बसें तोड़ दी जाती हैं. इंदौर में एक स्कूल बस के नीचे बकरी का बच्चा आने के बाद मुसलमानों की भीड़ बच्चों की बस पर पथराव करती है. हाथ जोड़ते बच्चों पर भी उसे दया नहीं आती. वहीं सेकुलर मीडिया का एकांगी और पूर्वाग्रही रवैया बार बार सामने आने से आम लोगों में पनपती नाराजगी सोशल मीडिया पर दिखाई देती है. ड्राईफ्रूट बेचते हुए कुछ कश्मीरि ...

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    पाकिस्तान की जेलों में बंद 54 युद्धबंदियों की गुनहगार कांग्रेस

    विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान का अभिनंदन है. वह दुनिया के उन चंद खुशनसीब सैन्य पायलटों में से हैं, जो 48 घंटे के अंदर ही दुश्मन की गिरफ्त से छूटकर स्वदेश लौट रहे हैं. केंद्र सरकार की इस सफलता पर पाकिस्तान के लिए ताली बजाने वाली कांग्रेस क्या जवाब दे सकती है कि 93000 युद्धबंदियों को रिहा करके महान बनने के चक्कर में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत के 54 युद्धबंदियों को क्यों नहीं छ़ुड़वाया. आज सैन्य ...

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    अब आर नहीं पार करो…ऐसे बाज नहीं आएगा पाकिस्तान

    नापाक पाकिस्तान के जन्मकाल से लेकर आजतक के इतिहास से तो यही जगजाहिर हुआ है कि बार बार मार खाने के बाद भी पाकिस्तान बाज आने वाला नहीं है. इस दहशतगर्द मुल्क के खून में ही भारत और भारतीयता के प्रति नफरत के कीड़े मौजूद हैं. मजहबी कट्टरपन के इन कीड़ों को जितना मारो, ये बढ़ते ही जाएंगे. गत सात दशकों से आघात सह रहे भारत के पास अब एक ही विकल्प रह गया है - पाकिस्तान की तबाही तक जंग करो. नहीं तो फिर इस पड़ोसी मुल्क क ...

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    आज हर दिल में देशभक्ति की ज्वाला धधक रही है

    यह सेना की बहुत बड़ी सफलता है कि उसने पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड अब्दुल रशीद गाज़ी को आखिरकार मार गिराया, हालांकि इस ऑपरेशन में एक मेजर सहित हमारे चार जांबाज़ सिपाही वीरगति को प्राप्त हुए. देश इस समय बेहद कठिन दौर से गुज़र रहा है क्योंकि हमारे सैनिकों की शहादत का सिलसिला लगातार जारी है. अभी भारत अपने 40 वीर सपूतों को धधकते दिल और नम आँखों से अंतिम विदाई दे भी नहीं पाया था, सेना अभी अपने इन वीरों के बलिदान को ...

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    कुछ शर्म करो – हमारे जवान मरे नहीं, वे कर्तव्य पथ पर बलिदान देकर अमर हो गए हैं

    पुलवामा के अवंतीपुरा आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 49 जवान शहीद हुए हैं. हमारी सुरक्षा के लिए तत्पर इन वीरों ने अपना जीवन बलिदान कर दिया. लेकिन अंग्रेजीदां मीडिया के लिये ये जवान केवल मारे गए हैं. शहीद शब्द से शायद उन्हें नफरत है या फिर उन्हें शब्दों के अर्थ की समझ नहीं है. शहीद न समझ आए तो वीर बलिदानी शब्द भी है, ये भी समझ ना आए तो अंग्रेजी में इसे कहते हैं Martyr. मगर अधिकांश अंग्रेजी अखबारों ने Killed शब्द ...

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    हिन्दू परंपरा पर शोर मचाने वाले इस्लाम के नाम पर क्यों चुप हो जाते हैं

    जब बात हिन्दू परंपराओं की आती है तो तथाकथित नारीवादी बड़े जोर शोर से मुहिम शुरू कर देते हैं, लेकिन इस्लाम के मामलों में चुप्पी साध लेते हैं, कोई मुहिम नहीं चलाते भले ही उस परंपरा से किसी का जीवन बर्बाद हो रहा हो. 01 फरवरी को पूरे विश्व में ‘वर्ल्ड हिजाब डे’ मनाया गया. इस दिन पूरे विश्व में इस बात पर चर्चा हुई कि आखिर हिजाब के क्या फायदे हैं, हिजाब को महिलाओं की पहचान से जोड़कर देखा गया और हिजाब के बहाने मुस् ...

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