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    ‘सर्वांग स्वतंत्रता/सर्वांगीण विकास’ की ओर संघ के बढ़ते कदम

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम - 16 (अंतिम) 15 अगस्त 1947 को देश दो भागों में विभक्त हो गया. ‘इंडिया दैट इज़ भारत’ और ‘पाकिस्तान’. भारत को राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त होने बाद गांधी जी ने ‘कांग्रेस का काम पूरा हो गया, अब इसे समाप्त कर के एक सेवादल के रूप में परिवर्तित कर देना चाहिए’ का सुझाव कांग्रेस के नेताओं के समक्ष रखा था. परन्तु सत्ता के मोह में फंस चुके कांग्रेस के नेताओं ने गांधी जी की एक ...

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    ‘खंडित भारत’ की ‘आधी अधूरी’ राजनीतिक स्वतंत्रता

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 15 1942 में हुए ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने के साथ स्वातंत्र्य वीर सावरकर ने एक आशंका प्रकट करते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को विशेषतया महात्मा गांधी जी को चेताया था - ‘भारत छोड़ो’ का अंत कहीं भारत तोड़ो न हो जाए. ‘1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम’ जैसे ऐतिहासिक शोधग्रंथ के लेखक तथा अंडमान जेल में कोल्हू के बैल की तरह अमानवीय यातनाएं भो ...

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    ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में स्वयंसेवकों की अतुलनीय शहादतें

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 14 संघ संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार के देहावसान के बाद संघ के सभी अधिकारी एवं कार्यकर्ता अपने नये सरसंघचालक श्री गुरुजी के नेतृत्व में डॉक्टर जी द्वारा निर्धारित कार्य-विस्तार के लक्ष्य को पूरा करने हेतु परिश्रमपूर्वक जुट गए. श्रीगुरुजी एवं सहयोगी संघ अधिकारियों के सामूहिक प्रयास के फलस्वरूप अनेक युवा स्वयंसेवक अपने घर-परिवार छोड़कर देश के प्रायः सभी प्रांतों में प्रच ...

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    अंतिम श्वास तक ‘अखंड भारत की पूर्ण स्वतंत्रता’ की चिंता

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 13 भारतवर्ष की सर्वांग स्वतंत्रता के लिए चल रहे सभी आंदोलनों/संघर्षों पर डॉक्टर हेडगेवार की दृष्टि टिकी हुई थी, यही वजह रही कि डॉक्टर हेडगेवार ने अस्वस्थ रहते हुए भी अपनी पूरी ताकत संघ की शाखाओं में लाखों की संख्या में स्वयंसेवकों अर्थात् स्वतंत्रता सेनानियों के निर्माण कार्य में झोंक दी. भविष्य में होने वाले द्वितीय विश्वयुद्ध के समय ब्रिटिश साम्राज्यवाद की होने ...

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    ‘संघ शिविर’ में महात्मा गांधी के साथ डॉक्टर हेडगेवार की ऐतिहासिक भेंट

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 12 14 फरवरी 1930 को अपने दूसरे कारावास से मुक्त होकर डॉक्टर हेडगेवार ने पुनः सरसंघचालक का दायित्व सम्भाला और संघ कार्य को देशव्यापी स्वरूप देने के लिए दिन-रात जुट गए. अब डॉक्टर जी की शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक शक्तियां संघ-स्वयंसेवकों के शारीरिक, मानसिक तथा बौद्धिक विकास में लगने लगीं. स्वभाव से परिश्रमी, मन से दृढ़ निश्चयी और बुद्धि से चतुर इस महापुरुष ने अपने स ...

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    हजारों स्वयंसेवकों के साथ डॉक्टर हेडगेवार पुनः सश्रम कारावास में

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 11 पूर्व में हुए असहयोग आंदोलन की विफलता से शिक्षा लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अब एक और देशव्यापी आंदोलन करने की योजना बनाई. महात्मा गांधी जी को इस नए, ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ का नेतृत्व सौंप दिया गया. अतः गांधी जी ने 6 अप्रैल 1920 को सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत अपनी ऐतिहासिक दांडी यात्रा के माध्यम से कर दी. गांधी जी ने सरकार द्वारा बनाए गए नमक कानून को तोड़ ...

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    संघ-शाखाओं में मनाया गया स्वतंत्रता दिवस (26 जनवरी 1930)

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 10 संघ संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार तथा उनके अंतरंग सहयोगी अप्पाजी जोशी 1928 तक मध्य प्रांत कांग्रेस की प्रांतीय समिति के वरिष्ठ सदस्य के नाते सक्रिय रहे. कांग्रेस की इन बैठकों एवं कार्यक्रमों के आयोजन में डॉक्टर जी का पूरा साथ रहता था. सभी महत्वपूर्ण प्रस्ताव इन्हीं के द्वारा तैयार किए जाते थे. इसी समय अंग्रेज सरकार ने भारतीय फौज की कुछ टुकड़ियों को चीन में भेजने का ...

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    परम वैभवशाली राष्ट्र के लिए संघ की स्थापना

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 9 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, अनुशीलन समिति समेत कई क्रांतिकारी दलों, विभिन्न संस्थाओं, लगभग 30 छोटी बड़ी परिषदों/मंडलों, समाचार पत्रों, आंदोलनों, सत्याग्रहों और व्यायामशालाओं की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने तथा एक वर्ष की सश्रम जेल यात्रा करने के पश्चात डॉक्टर हेडगेवार ने एक ऐतिहासिक शक्ति सम्पन्न और आत्मनिर्भर हिन्दू संगठन बनाने के निश्चय को व्यवहार में पर ...

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    भारत की राष्ट्रीयता का आधार वसुधैव कुटुंबकम का चिंतन रहा है

    कम्युनिस्टों के अभारतीय विचारों से प्रभावित कांग्रेस के कुछ उच्च शिक्षित नेता जब क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थों के लिए भारत की अस्मिता पर आघात करने वाले वक्तव्य देते हैं तो आश्चर्य कम, पीड़ा अधिक होती है. ऐसे वक्तव्यों से राधाकृष्णन आयोग की भारतीय शिक्षा पर की गई इस टिप्पणी का स्मरण हो आता है, ‘एक शताब्दी से अधिक समय से चली आ रही शिक्षा प्रणाली की एक गंभीर समस्या यह है कि उसने भारत के भूतकाल की अनदेखी की है और भ ...

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    विदेशी/विधर्मी परतंत्रता के कारणों पर गहरा मंथन

    डॉक्टर हेडगेवार, संघ और स्वतंत्रता संग्राम – 8 सन् 1922 में डॉक्टर हेडगेवार को मध्य प्रांत की कांग्रेस इकाई ने प्रांतीय सह मंत्री का पदभार सौंप दिया. डॉक्टर जी ने कांग्रेस के भीतर ही एक संगठित स्वयंसेवक दल बनाने का प्रयास किया था, परन्तु वह ‘फर्माबरदार’ वॉलिंटियर दल खड़ा करने के पक्ष में कतई नहीं थे. उनके स्वयंसेवक की कल्पना केवल मात्र दरियां बिछाने और कुर्सियां उठाने तक सीमित नहीं थी. वे चाहते थे कि ‘देशभक् ...

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