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    अज्ञात  स्वतंत्रता सेनानी : डॉक्टर हेडगेवार – 3

    नरेंद्र सहगल भारत को ब्रिटिश साम्राज्यवाद के क्रूर पंजे से मुक्त करवाने के लिए समस्त भारत में एक संगठित सशस्त्र क्रांति का आधार तैयार करने हेतु केशवराव हेडगेवार को तत्कालीन राष्ट्रीय नेताओं विशेषतया लोकमान्य तिलक ने कलकत्ता भेजा था. तिलक की सांस्कृतिक राष्ट्रीय विचारधारा से प्रभावित केशवराव नागपुर में सक्रिय रहते हुए बंगाल के क्रांतिकारी दल ‘अनुशीलन समिति’ से भी जुड़ गए थे. 1910 में केशवराव ने कलकत्ता के लिए ...

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    वे पंद्रह दिन… / 03 अगस्त, 1947

    आज के दिन गांधीजी की महाराजा हरिसिंह से भेंट होना तय थी. इस सन्दर्भ का एक औपचारिक पत्र कश्मीर रियासत के दीवान, रामचंद्र काक ने गांधीजी के श्रीनगर में आगमन वाले दिन ही दे दिया था. आज 03 अगस्त की सुबह भी गांधीजी के लिए हमेशा की तरह ही थी. अगस्त का महीना होने के बावजूद किशोरीलाल सेठी के घर अच्छी खासी ठण्ड थी. अपनी नियमित दिनचर्या के अनुसार गांधी जी मुंह अंधेरे ही उठ गए थे. उनकी नातिन ‘मनु’ तो मानो उनकी परछाईं ...

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    अज्ञात  स्वतंत्रता सेनानी : डॉक्टर हेडगेवार – 2

    नरेंद्र सहगल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार जन्मजात स्वतंत्रता सेनानी थे. ‘हिन्दवी स्वराज’ के संस्थापक छत्रपति शिवाजी, खालसा पंथ का सृजन करने वाले दशमेशपिता श्रीगुरु गोविंदसिंह और आर्य समाज के संगठक स्वामी दयानन्द की भांति डॉ. हेडगेवार ने बालपन में ही संघ जैसे किसी शक्तिशाली संगठन की कल्पना कर ली थी. भारत की सनातन राष्ट्रीय पहचान हिन्दुत्व, भगवा ध्वज, अखंड भारतवर्ष की सर्वां ...

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    वे पन्द्रह दिन…/ 02 अगस्त 1947

    17, यॉर्क रोड.... इस पते पर स्थित मकान, अब केवल दिल्ली के निवासियों के लिए ही नहीं, पूरे भारत देश के लिए महत्त्वपूर्ण बन चुका था. असल में यह बंगला पिछले कुछ वर्षों से पंडित जवाहरलाल नेहरू का निवास स्थान था. भारत के ‘मनोनीत’ प्रधानमंत्री का निवास स्थान. और इस उपनाम या पद में से ‘मनोनीत’ शब्द मात्र तेरह दिनों में समाप्त होने वाला था. क्योंकि 15 अगस्त से जवाहरलाल नेहरू स्वतन्त्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रू ...

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    अज्ञात  स्वतंत्रता सेनानी : डॉक्टर हेडगेवार – 1

    नरेंद्र सहगल एक प्रखर स्वतंत्रता सेनानी डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने जन्मकाल से आज तक नाम, पद, यश, गरिमा, आत्म प्रशंसा और प्रचार से कोसों दूर रहकर राष्ट्र हित में समाजसेवा, धर्मरक्षा और राष्ट्रभक्ति के प्रत्येक कार्य में अग्रणी भूमिका निभाई है. भारत में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध लड़े गए स्वतंत्रता संग्राम में भी संघ ने आजादी के लिए संघर्षरत तत्क ...

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    वे पन्द्रह दिन… / 01 अगस्त, 1947

    शुक्रवार, 01 अगस्त 1947. यह दिन अचानक ही महत्त्वपूर्ण बन गया. इस दिन जम्मू कश्मीर के सम्बन्ध में दो प्रमुख घटनाएं घटीं, जो आगे चलकर बहुत महत्त्वपूर्ण सिद्ध होने वाली थीं. इन दोनों घटनाओं का आपस में वैसे तो कोई सम्बन्ध नहीं था, परन्तु आगे होने वाले रामायण-महाभारत में इनका स्थान आवश्यक होने वाला था. 01 अगस्त को गांधी जी श्रीनगर पहुँचे, यह थी वह पहली बात. गांधी जी का यह पहला ही जम्मू-कश्मीर दौरा था. इससे पहले ...

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    ननूर नरसंहार – वामपंथियों द्वारा किया नरसंहार, जिसके बारे में कोई बात नहीं करता

    यदि आपसे पूछा जाए कि दुनिया में तानाशाह कितने हुए तो आपका जवाब सबसे पहले हिटलर होगा, फिर शायद मुसोलिनी, फिर शायद कुछ कहेंगे लेनिन या स्टालिन. लेकिन जैसे ही आप लेनिन, स्टालिन, फिदेल कास्त्रो, माओ ज़ेडोंग जैसे नाम लेंगे कुछ लोगों की भौहें तन जाएंगीं. वे आपसे इन नामों पर बहस भी करने लगेंगे. क्रांति के नाम पर अपनी ही जनता पर तानाशाही करने वाले लेनिन, स्टालिन, कास्त्रो, माओ को आज भी भारत के कुछ लोग अपना वैचारिक ...

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    लिओनार्दो उनके राष्ट्रीय गौरव, और हमारे…..?

    अपने देश के राष्ट्रीय नायकों को कितना जानते हैं हम इस बार यूरोप प्रवास में इटली में खूब घूमना हुआ. इटली तो इसके पहले भी तीन - चार बार गया था. लेकिन तब अपना काम कर के जल्द लौट आना, यही दिनचर्या होती थी. पर्यटक इस नाते इटली देखना रह गया था, जो इस बार संभव हो सका. लेकिन इस बार मिलान, वेनिस, रोम आदि स्थानों पर विस्तार से घूमना हुआ. इन सभी स्थानों पर एक बात समान थी -  लिओनार्दो दा विंची. लिओनार्दो की मूर्तियां, ...

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    भारतीय ज्ञान का खजाना – 5

    भारत का उन्नत नौकायन शास्त्र विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थल थाईलैंड के बैंकाक हवाई अड्डे का नाम है – सुवर्णभूमि विमानतल. इस हवाई अड्डे में प्रवेश करते ही सबसे पहले जो बात सभी का ध्यान आकर्षित करती है, वह है एक विशालकाय कलाकृति. यह कलाकृति है भारतीय पुराणों में वर्णित ‘समुद्र मंथन’ की. इस कलाकृति के चारों तरफ सेल्फी लेने वाले पर्यटकों का झुण्ड सदैव उमड़ा हुआ रहता है. इसी सुवर्णभूमि विमानतल पर थोड़ा आगे बढ़ते ही एक ब ...

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    ज्ञान और विज्ञान का अनूठा मेल थे अब्दुल कलाम

    डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की चर्चा आते ही आंखें चमक उठती हैं. वे मात्र उत्कृष्ट वैज्ञानिक ही नहीं, अपितु एक उत्तम व्यक्तित्व भी थे जो सभी मत-पंथों को समान रूप से सम्मान देते थे. वे भारतीय संस्कृति और परंपरा में ढले ऋषि, मानवतावादी, प्रकृति, संगीत प्रेमी एवं बेहतरीन लेखक भी थे. आज उनकी पुण्यतिथि पर नमन है. भारतीय संस्कृति और परंपरा ऐसी है कि जो भी इसमें ढला, अमर हो गया. इसके समकालीन उदाहरणों में एक हैं पूर्व राष ...

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