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    भारतीय ज्ञान का खजाना – 4

    भारत की प्राचीन कलाएं – भाग दो अक्सर छत्तीसगढ़ राज्य को हम नक्सलवाद से प्रभावित और अशांत प्रदेश के रूप में पहचानते हैं. परन्तु यह छत्तीसगढ़ का वास्तविक रूप नहीं है. नक्सलवाद के अलावा भी अनेक बातें इस प्रदेश में हैं, जो छत्तीसगढ़ को अत्यंत सम्पन्न बनाती हैं. प्राचीनकाल के अनेक अवशेष हमें इस राज्य में मिलते हैं. यह प्रदेश दुर्गम होने के कारण मुस्लिम आक्रमण के समय भी इस प्रांत में अन्य प्रान्तों के मुकाबले विध्वं ...

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    आतंकवाद के गढ़ में हर-हर महादेव

    जिस तरह वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण और महाभारत इत्यादि संस्कृत ग्रंथ भारत के गौरवशाली अतीत को संजोए हुए हैं, उसी तरह हमारे तीर्थ स्थल, मेले, पर्व, त्यौहार और धार्मिक यात्राएं हिमालय से कन्याकुमारी तक फैले हमारे विशाल देश को एक सूत्र में बांधे हुए है. विश्व के सबसे ऊंचे हिमालय पर्वत की हिमाच्छादित चोटियों पर 15 हजार फीट की ऊंचाई पर श्री अमरनाथ धाम की पवित्र गुफा में पिछले 05 हजार वर्षों से चली आ रही हिमलिंग क ...

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    करोड़ों हिन्दुओं का आस्था-स्थल : अमरनाथ धाम

    भारत के प्राचीन ग्रंथों और आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार श्री अमरनाथ धाम की पवित्र गुफा सम्पूर्ण सृष्टि के आद्य और आराध्य देव भगवान शिव शंकर का निवास है. इस पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले बर्फ के शिवलिंग में स्वयं भगवान शंकर विराजमान होते हैं, अतः यह अमरनाथ धाम सृष्टि के आदिकाल से ही सम्पूर्ण मानव समाज का आस्था स्थल रहा है. जब मानव का अस्तित्व हिन्दू, मुसलमान और ईसाई इत्यादि वर्गों में विभाजित ...

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    गुरु पूर्णिमा और संघ

    अपने राष्ट्र और समाज जीवन में गुरुपूर्णिमा-आषाढ़ पूर्णिमा अत्यंत महत्वपूर्ण उत्सव है. व्यास महर्षि आदिगुरु हैं. उन्होंने मानव जीवन को गुणों पर निर्धारित करते हुए उन महान आदर्शों को व्यवस्थित रूप में समाज के सामने रखा. विचार तथा आचार का समन्वय करते हुए, भारतवर्ष के साथ उन्होंने सम्पूर्ण मानव जाति का मार्गदर्शन किया. इसलिए भगवान वेदव्यास जगत् गुरु हैं. इसीलिए कहा है - 'व्यासो नारायणम् स्वयं'- इस दृष्टि से गुर ...

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    भारतीय ज्ञान का खजाना – 3

    भारत की प्राचीन कलाएं – १ विश्व के किसी भी भूभाग में यदि किसी संस्कृति को टिके रहना है, जीवंत रहना है, तो उसे परिपूर्ण होना आवश्यक है. ‘परिपूर्ण’ का अर्थ यह है कि उस संस्कृति को मानवीय मन का सर्वांगीण विचार करना चाहिए, समाज की इच्छाओं का विचार करना चाहिए. इस कसौटी पर हमारी भारतीय संस्कृति एकदम खरी उतरती है. इसीलिए विभाजन के पश्चात पाकिस्तान के राष्ट्र कवि कहे जाने वाले इकबाल ने लिखा था – यूनान, मिस्र, रोमां ...

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    भारतीय ज्ञान का खजाना – 2

    भारत का प्राचीन जल व्यवस्थापन ‘पंच महाभूत मंदिरों का रहस्य’ नामक लेख पर लोगों ने प्रतिक्रियाओं की अक्षरशः वर्षा ही कर दी. सोशल मीडिया के माध्यम से यह लेख बड़े पैमाने पर वायरल हुआ. फेसबुक पर इस लेख को अनेकों ने शेयर किया, वही व्हाट्स एप्प पर अनेक समूहों में यह लेख घूमता रहा. निश्चित रूप से कुछ लाख लोगों तक यह लेख पहुँचा ही है. अनेक प्रतिक्रियाओं में अधिकांश लोगों का यह कहना था कि, हमें ऐसे अदभुत मंदिरों के बा ...

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    भारतीय ज्ञान का खजाना – १

    पंचमहाभूतों के मंदिरों का रहस्य..! इस लेखमाला, अर्थात् ‘भारतीय ज्ञान का खजाना’ का उद्देश्य है कि हमारे देश में छिपी हुई अनेक अदभुत एवं ज्ञानपूर्ण बातों को जनता के सामने लाना. इस पुस्तक का प्रत्येक लेख प्रिंट मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से अक्षरशः लाखों लोगों तक पहुँचता है. संभवतः इसीलिए पत्र, फोन एवं सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रियाओं की मानो वर्षा ही हो रही है. परन्तु ऐसी अनेक बातें हैं, जो हमें प ...

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    आपातकाल, पुलिसिया कहर और संघ – भाग 3

    संघर्ष की भूमिगत सञ्चालन व्यवस्था प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 25 जून 1975 को समूचे देश में थोपा गया आपातकाल एक तरफा सरकारी अत्याचारों का पर्याय बन गया. इस सत्ता प्रायोजित आतंकवाद को समाप्त करने के लिए संघ द्वारा संचालित किया गया सफल भूमिगत आन्दोलन इतिहास का एक महत्वपूर्ण पृष्ठ बन गया. सत्ता के इशारे पर बेकसूर जनता पर जुल्म ढा रही पुलिस की नजरों से बचकर भूमिगत आन्दोलन का सञ्चालन करना कितना कठिन हुआ होगा ...

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    आपातकाल, पुलिसिया कहर और संघ – भाग 2

    सत्ता प्रायोजित आतंकवाद इलाहबाद हाईकोर्ट द्वारा सजा मिलने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने अपने राजनीतिक अस्तित्व और सत्ता को बचाने के उद्देश्य से जब 25 जून 1975 को रात के 12 बजे आपातकाल की घोषणा की तो देखते ही देखते पूरा देश पुलिस स्टेट में परिवर्तित हो गया. सरकारी आदेशों के प्रति वफ़ादारी दिखाने की होड़ में पुलिस वालों ने बेकसूर लोगों पर बेबुनियाद झूठे आरोप लगाकर गिरफ्तार करके जेलों में ठूंसना शुरू ...

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    आपातकाल, पुलिसिया कहर और संघ

    भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 में उस समय एक काला अध्याय जुड़ गया, जब देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सभी संवैधानिक व्यवस्थाओं, राजनीतिक शिष्टाचार तथा सामाजिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर मात्र अपना राजनीतिक अस्तित्व और सत्ता बचाने के लिए देश में आपातकाल थोप दिया. उस समय इंदिरा गांधी की अधिनायकवादी नीतियों, भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा और सामाजिक अव्यवस्था के विरुद्ध सर्वोदयी नेता जयप्रकाश नार ...

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