करंट टॉपिक्स

मातृ-मंदिर का समर्पित दीप

अश्विन चतुर्दशी कृ. 2077 (16 सितम्बर, 2020) प्रातः 6:30 बजे संघ प्रचारक सुशील जी की पुण्यात्मा ने परलोक गमन किया. सुशील जी विगत 53 वर्षों...

दत्तोपंत ठेंगड़ी – एक श्रेष्ठ चिंतक, संगठक और दीर्घदृष्टा

  डॉ. मनमोहन वैद्य सह सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिस समय स्वर्गीय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी ने भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की वह साम्यवाद के...

07 सितम्बर / जन्मदिवस – प्रचारक परिवार के रत्न अरविन्द कृष्णराव चौथाइवाले

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य को देश-विदेश में फैलाने में प्रचारकों का बहुत बड़ा योगदान है. कई परिवार ऐसे हैं, जहां एक से...

5 सितम्बर / आदर्श शिक्षक डॉ. राधाकृष्णन

प्रख्यात दर्शनशास्त्री, अध्यापक एवं राजनेता डॉ. राधाकृष्णन का जन्म पांच सितम्बर 1888 को ग्राम प्रागानाडु (जिला चित्तूर, तमिलनाडु) में हुआ था. इनके पिता वीरस्वामी एक...

उषाताई – नाम को जीवन में ढालकर सार्थक किया

चल पड़े जिधर दो डग, मग में, चल पड़े कोटि पग उसी ओर राष्ट्र सेविका समिति, विश्व के सबसे बड़े अशासकीय महिला संगठन की तृतीय प्रमुख संचालिका वंदनीया...

29 अगस्त / जन्मदिवस – उनकी हॉकी से गेंद मानो चिपक जाती थी – ऐसे हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचन्द

नई दिल्ली. भारतीय हॉकी का पूरे विश्व में दबदबा था और उसका श्रेय मेजर ध्यानचन्द को जाता है. मेजर ध्यानचंद का जन्म प्रयाग, उत्तर प्रदेश में 29 अगस्त, 1905 को हुआ...

ब्रिटिश साम्राज्य पर अंतिम निर्णायक प्रहार करने वाले नेता जी सुभाष चंद्र बोस

पुण्यतिथि पर विशेष “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” नरेंद्र सहगल यह एक ऐतिहासिक सच्चाई है कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस के नेतृत्व में आजाद...

लोकमान्य जी का स्मरण – लोकमान्य तिलक और पत्रकारिता

विद्याविलास पाठक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक - देश के स्वतंत्रता संग्राम का एक स्वर्णिम व्यक्तित्व. “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे ले कर...

लोकमान्य तिलक की ‘स्वदेशी’ अवधारणा और आत्मनिर्भर भारत

दिलीप धारुरकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में लोकमान्य तिलक जी ने जिस चतु:सूत्री का प्रतिपादन किया था, उनमें ‘स्वदेशी’ और ‘बहिष्कार’ यह दो सूत्र थे. स्वदेशी...

जयंती पर विशेष – तुलसीदास का शिक्षा दर्शन राष्ट्रहित के लिए अनुकरणीय

प्रोफेसर बाबूराम शिक्षा मानव जीवन के चरित्र निर्माण, रुचियों, प्रवृत्तियों, चेष्टाओं में बदलाव और बहुआयामी विकास के साथ सामाजिक समरसता उत्पन्न करती है. इसीलिए मानव...