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    विनम्र श्रद्धांजलि – वनयोगी बालासाहब देशपाण्डे

    रमाकान्त केशव (बालासाहब) देशपांडे जी का जन्म अमरावती (महाराष्ट्र) में केशव देशपांडे जी के घर में 26 दिसम्बर, 1913 को हुआ था. अमरावती, अकोला, सागर, नरसिंहपुर तथा नागपुर में पढ़ाई पूरी करने के 1938 में वे राशन अधिकारी के पद नियुक्त हुए. उन्होंने एक बार एक व्यापारी को गड़बड़ करते हुए पकड़ लिया; पर बड़े अधिकारियों के साथ मिलीभगत के कारण वह व्यापारी छूट गया. इससे बालासाहब का मन खिन्न हो गया और उन्होंने नौकरी छोड ...

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    विख्यात गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन

    श्रीनिवास रामानुजन गणित के क्षेत्र में ध्रुव तारे के समान आज भी चमक रहे हैं. 98 वर्षों के बाद भी उनके द्वारा 32 वर्ष 4 मास एवं 4 दिन के छोटे से जीवनकाल में गणित के क्षेत्र में जो कार्य किया गया, उसे सिद्ध करने के लिए दुनिया के गणित के विद्वान आज भी प्रयासरत हैं. रामानुजन ने 13 वर्ष की उम्र से ही अनुसंधान कार्य शुरु किया था एवं 15 वर्ष की उम्र में स्वयं किये हुए कार्य को नोटबुक में लिखने की शुरुआत की थी. उन् ...

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    मुगल सेना को हराने वाले वीर सेनानी लाचित बोड़फुकन को नमन

    जो देश अपने सपूतों को भूल जाता है, उस देश के आत्म सम्मान को हीनता की दीमक चट कर जाती है. आक्रांताओं से लोहा लेकर देश की अस्मिता की रक्षा करने वालों की वीरता को अगर विस्मृत कर दिया जाए तो फिर हम देशप्रेम पर लम्बे चौड़े व्याख्यान देने का नैतिक अधिकार खो देते हैं. अखंड भारत के स्वप्न को लेकर आगे बढ़ रही युवा पीढ़ी को हमारे नायकों की गाथा सुनाने से पहले इस तथ्य के कारणों को भी जानना होगा, जिनके चलते राष्ट्रीय स्तर ...

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    20 नवम्बर / जन्मदिवस – वैकल्पिक सरसंघचालक डॉ. लक्ष्मण वासुदेव परांजपे

    नई दिल्ली. स्वाधीनता संग्राम के दौरान संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी ने 1930-31 में जंगल सत्याग्रह में भाग लिया था. उन दिनों संघ अपनी शिशु अवस्था में था. शाखाओं की संख्या बहुत कम थी. डॉ. जी नहीं चाहते थे कि उनके जेल जाने से संघ कार्य में कोई बाधा आये. अतः वे अपने मित्र तथा कर्मठ कार्यकर्ता डॉ. परांजपे को सरसंघचालक की जिम्मेदारी दे कर गये. डॉ. परांजपे ने इस दायित्व को पूर्ण निष्ठा से निभाया. उन्होंने इस दौर ...

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    18 नवम्बर / जन्मदिवस – परोपकार की प्रतिमूर्ति स्वामी प्रेमानन्द

    नई दिल्ली. भारत में सन्यास की एक विशेष परम्परा है. हिन्दू धर्म में ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और फिर सन्यास को आश्रम व्यवस्था कहा गया है, पर कई लोग पूर्व जन्म के संस्कार या वर्तमान जन्म में अध्यात्म और समाज सेवा के प्रति प्रेम होने के कारण ब्रह्मचर्य से सीधे सन्यास आश्रम में प्रविष्ट हो जाते हैं. आद्य शंकराचार्य ने समाज में हो रहे विघटन एवं देश-धर्म पर हो रहे आक्रमण से रक्षा हेतु दशनामी सन्यासियों की परम ...

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    17 नवम्बर / बलिदान दिवस – पंजाब केसरी लाला लाजपतराय

    ‘‘यदि तुमने सचमुच वीरता का बाना पहन लिया है, तो तुम्हें सब प्रकार की कुर्बानी के लिए तैयार रहना चाहिए. कायर मत बनो. मरते दम तक पौरुष का प्रमाण दो. क्या यह शर्म की बात नहीं कि कांग्रेस अपने 21 साल के कार्यकाल में एक भी ऐसा राजनीतिक संन्यासी पैदा नहीं कर सकी, जो देश के उद्धार के लिए सिर और धड़ की बाजी लगा दे....’’ इन प्रेरणास्पद उद्गारों से 1905 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुए कांग्रेस के अधिवेशन में लाला ...

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    श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के उन्नायक श्री अशोक सिंहल जी की पुण्यतिथि पर नमन

    बीसवीं इक्कीसवीं सदी का संधि काल हिन्दू समाज के नवजागरण के काल खण्ड के रूप में इतिहास के पन्नों में अंकित होगा. यह वह कालखंड है, जब शताब्दियों से पराधीनता की बेड़ियों में जकड़े जाने से उत्पन्न आत्मविस्मृति एवं आत्महीनता की भावना को तोड़कर हिन्दू समाज ने विश्वपटल पर हूंकार भरी थी. सोए हुए हिन्दू पौरुष को जगाने का आधार बना श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन और इस आंदोलन के स्मरण के साथ ही इसके नायकों में जो नाम प्रमुखता ...

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    16 नवम्बर / जन्म दिवस – ब्रह्मदेश में संघ के प्रचारक रामप्रकाश धीर जी

    नई दिल्ली. ब्रह्मदेश (बर्मा या म्यांमार) भारत का ही प्राचीन भाग है. अंग्रेजों ने जब 1905 में बंग-भंग किया, तो षड्यंत्रपूर्वक इसे भी भारत से अलग कर दिया था. इसी ब्रह्मदेश के मोनीवा नगर में 16 नवम्बर, 1926 को रामप्रकाश धीर जी का जन्म हुआ था. बर्मी भाषा में उनका नाम ‘सयाजी यू सेन टिन’ कहा जाएगा. उनके पिता नंदलाल जी वहां के प्रसिद्ध व्यापारी एवं ठेकेदार थे. सन् 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के समय जब अंतरराष्ट्र ...

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    15 नवम्बर / जन्मदिवस – प्रयोगधर्मी शिक्षक गिजूभाई

    नई दिल्ली. शिक्षक वह दीपक है, जो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाशमान करता है. इस प्रसिद्ध कहावत को गिजूभाई के नाम से प्रसिद्ध प्रयोगधर्मी शिक्षक गिरिजाशंकर वधेका जी ने पूरा कर दिखाया. 15 नवम्बर, 1885 को चित्तल (सौराष्ट्र, गुजरात) में जन्मे गिजूभाई के पिता अधिवक्ता थे. आनन्द की बात यह रही कि वे अध्यापन छोड़कर वकील बने, जबकि गिजूभाई उच्च न्यायालय की अच्छी खासी चलती हुई वकालत छोड़कर शिक्षक बने. गिजूभाई वकालत के सिल ...

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    14 नवम्बर / जन्मदिवस – कथक की साधिका रोहिणी भाटे

    विश्व में नृत्य की अनेक विधाएं प्रचलित हैं; पर भारतीय नृत्य शैली की अपनी विशेषता है. उसमें गीत, संगीत, अंग संचालन, अभिनय, भाव प्रदर्शन आदि का सुंदर तालमेल होता है. इससे न केवल दर्शक बल्कि नर्तक भी अध्यात्म की ऊंचाइयों तक पहुंच जाता है; पर ऐसा केवल वही कलाकार कर पाते हैं, जो नृत्य को मनोरंजन या पैसा कमाने का साधन न समझकर साधना और उपासना समझते हैं. भारत की ऐसी ही एक विशिष्ट नृत्य शैली कथक की साधिका थीं डॉ. रो ...

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