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    01 सितम्बर / जन्मदिवस – सबके हितचिंतक केशवराव गोरे

    नई दिल्ली. माता-पिता प्रायः अपने बच्चों के काम, मकान, दुकान, विवाह आदि की चिन्ता करते ही हैं. पर, 1 सितम्बर, 1915 को गोंदिया (महाराष्ट्र) में जन्मे केशव नरहरि गोरे ने प्रचारक बनने से पूर्व पिताजी के लिए मकान बनवाकर एक बहिन का विवाह भी किया. ये लोग मूलतः वाई (महाराष्ट्र) के निवासी थे. केशवराव के पिता नरहरि वामन गोरे तथा माता यशोदा गोरे थीं. रेलवे में तार बाबू होने के कारण नरहरि जी का स्थानान्तरण होता रहता था ...

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    31 अगस्त / प्रेरक प्रसंग – देशद्रोही का वध

    नई दिल्ली. स्वाधीनता प्राप्ति के प्रयत्न में लगे क्रांतिकारियों को जहां एक ओर अंग्रेजों से लड़ना पड़ता था, वहां कभी-कभी उन्हें देशद्रोही भारतीय, यहां तक कि अपने गद्दार साथियों को भी दंड देना पड़ता था. बंगाल के प्रसिद्ध अलीपुर बम कांड में कन्हाईलाल दत्त, सत्येन्द्रनाथ बोस तथा नरेन्द्र गोस्वामी गिरफ्तार हुए थे. अन्य भी कई लोग इस कांड में शामिल थे, जो फरार हो गये. पुलिस ने इन तीन में से एक नरेन्द्र को मुखबिर ब ...

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    30 अगस्त / पुण्यतिथि – तरुण तपस्वी, रामानुज दयाल

    नई दिल्ली. उ.प्र. में गाजियाबाद के पास पिलखुआ नगर वस्त्र-निर्माण के लिए प्रसिद्ध है. यहीं के एक प्रतिष्ठित व्यापारी व निष्ठावान स्वयंसेवक श्री रामगोपाल तथा कौशल्या देवी के घर में 1943 में जन्मे रामानुज दयाल ने अपना जीवन संघ को अर्पित किया; पर काल ने अल्पायु में ही उन्हें उठा लिया. सन् 1948 में संघ पर प्रतिबंध लगा, तो पिलखुआ के पहले सत्याग्रही दल का नेतृत्व रामगोपाल जी ने किया. रामानुज पर इसका इतना प्रभाव पड ...

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    29 अगस्त / जन्मदिवस – उनकी हॉकी से गेंद मानो चिपक जाती थी – ऐसे हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचन्द

    नई दिल्ली. भारतीय हॉकी का पूरे विश्व में दबदबा था और उसका श्रेय मेजर ध्यानचन्द को जाता है. मेजर ध्यानचंद का जन्म प्रयाग, उत्तर प्रदेश में 29 अगस्त, 1905 को हुआ था. उनके पिता सेना में सूबेदार थे. उन्होंने 16 साल की अवस्था में ध्यानचन्द को भी सेना में भर्ती करा दिया. वहां वे कुश्ती में बहुत रुचि लेते थे, पर सूबेदार मेजर बाले तिवारी ने उन्हें हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद तो ध्यानचंद और हॉकी एक दूसर ...

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    28 अगस्त / जन्मदिवस – प्रथम प्रचारक बाबासाहब आप्टे

    नई दिल्ली. 28 अगस्त, 1903 को यवतमाल, महाराष्ट्र के एक निर्धन परिवार में जन्मे प्रचारकों की श्रृंखला में प्रथम प्रचारक उमाकान्त केशव आप्टे जी का प्रारम्भिक जीवन बड़ी कठिनाइयों में बीता. 16 वर्ष की छोटी अवस्था में पिता का देहान्त होने के कारण परिवार की सारी जिम्मेदारी इन पर ही आ गयी. इन्हें पुस्तक पढ़ने का बहुत शौक था. आठ वर्ष की अवस्था में इनके मामा ‘ईसप की कथाएं’ नामक पुस्तक लेकर आये. उमाकान्त देर रात तक उस ...

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    27 अगस्त / पुण्यतिथि – बहुमुखी प्रतिभा के धनी : प्रताप नारायण जी

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक मुख्यतः संगठन कला के मर्मज्ञ होते हैं; पर कई कार्यकर्ताओं ने कई अन्य क्षेत्रों में भी प्रतिभा दिखाई है. ऐसे ही थे श्री प्रताप नारायण जी. स्वास्थ्य की खराबी के कारण जब उन्हें प्रवास न करने को कहा गया, तो वे लेखन के क्षेत्र में उतर गये और शीघ्र ही इस क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित हस्ताक्षर हो गये. प्रताप जी का जन्म 1927 में ग्राम करमाडीह, जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश के एक सामान्य प ...

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    26 अगस्त / इतिहास स्मृति – चित्तौड़ का पहला जौहर

    नई दिल्ली. जौहर की गाथाओं से भरे पृष्ठ भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं. ऐसे अवसर एक नहीं, कई बार आए हैं, जब हिन्दू ललनाओं ने अपनी पवित्रता की रक्षा के लिए ‘जय हर-जय हर’ कहते हुए हजारों की संख्या में सामूहिक अग्नि प्रवेश किया था. यही उद्घोष आगे चलकर ‘जौहर’ बन गया. जौहर की गाथाओं में सर्वाधिक चर्चित प्रसंग चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का है, जिन्होंने 26 अगस्त, 1303 को 16,000 क्षत्राणियों के साथ जौहर किया था. प ...

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    25 अगस्त / जन्मदिवस – शिक्षानुरागी सुशीला देवी

    नई दिल्ली. सुशीला देवी का जन्म 25 अगस्त, 1914 को जम्मू-कश्मीर राज्य के दीवान बद्रीनाथ जी, विद्यावती जी के घर में ज्येष्ठ पुत्री के रूप में हुआ था. उन्हें अपने पिताजी से प्रशासनिक क्षमता तथा माताजी से धर्मप्रेम विरासत में मिला था. जब वे कानपुर के प्रख्यात समाजसेवी रायबहादुर विक्रमाजीत सिंह की पुत्रवधू बन कर आयीं, तो ससुराल पक्ष से उन्हें शिक्षा संस्थाओं के प्रति प्रेम भी प्राप्त हुआ. इन गुणों को विकसित करते ...

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    24 अगस्त / जन्मदिवस – बलिदान को उत्सुक शहीद राजगुरु

    नई दिल्ली. सामान्यतः लोग धन, पद या प्रतिष्ठा प्राप्ति के लिए एक-दूसरे से होड़ करते हैं, पर क्रांतिवीर राजगुरु सदा इस होड़ में रहते थे कि किसी भी खतरनाक काम का मौका भगत सिंह से पहले उन्हें मिलना चाहिए. हरि नारायण जी और पार्वतीबाई के पुत्र शिवराम हरि राजगुरु का जन्म 24 अगस्त, 1908 को पुणे के पास खेड़ा (वर्तमान राजगुरु नगर) में हुआ था. उनके एक पूर्वज पंडित कचेश्वर को छत्रपति शिवाजी के प्रपौत्र साहू जी ने राजगु ...

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    23 अगस्त / बलिदान दिवस – उड़ीसा में हिन्दू जागरण के अग्रदूत : स्वामी लक्ष्मणानंद

    नई दिल्ली. कंधमाल उड़ीसा का वनवासी बहुल पिछड़ा क्षेत्र है. पूरे देश की तरह वहां भी 23 अगस्त, 2008 को जन्माष्टमी पर्व मनाया जा रहा था. रात में लगभग 30-40 क्रूर चर्चवादियों ने फुलबनी जिले के तुमुडिबंध से तीन कि.मी. दूर स्थित जलेसपट्टा कन्याश्रम में हमला बोल दिया. 84 वर्षीय देवतातुल्य स्वामी लक्ष्मणानंद उस समय शौचालय में थे. हत्यारों ने दरवाजा तोड़कर पहले उन्हें गोली मारी और फिर कुल्हाड़ी से उनके शरीर के टुकड़ ...

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